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'सबके खिलाफ एंटी इनकंबेंसी आई, BJP के खिलाफ क्यों नहीं… चुनावों में धांधली हुई', बोले राहुल गांधी

राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति से लेकर चुनाव आयोग के कामकाज और उनके फैसलों पर गंभीर सवाल उठाए. राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि देश में चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित किया जा रहा है और कहा कि वोट की सुरक्षा चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है. 

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राहुल गांधी ने कहा कि वोट देश की पूरी संवैधानिक व्यवस्था की नींव है. (Photo- Screengrab)
राहुल गांधी ने कहा कि वोट देश की पूरी संवैधानिक व्यवस्था की नींव है. (Photo- Screengrab)

कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बीजेपी, केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला. उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति से लेकर चुनाव आयोग के फैसलों और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर गंभीर सवाल उठाए. 

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि देश में वोट को नष्ट किया गया है और इसके बाद कानून और संस्थाओं को भी प्रभावित किया गया. यह सिर्फ वोट पर हमला नहीं, बल्कि हर भारतीय की लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति और देश की संवैधानिक व्यवस्था पर हमला है.

राहुल गांधी ने कहा कि वह पिछले तीन साल से चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहे हैं और हरियाणा, महाराष्ट्र और कर्नाटक के उदाहरण देकर अपने दावों के समर्थन में सबूत पेश करते रहे हैं. उन्होंने कहा कि अब चुनाव आयोग के दो सदस्यों की ओर से दर्ज कराई गई आपत्तियों के बाद उनके सवालों का संदर्भ और महत्वपूर्ण हो गया है.

'एंटी-इनकंबेंसी बीजेपी के लिए क्यों नहीं?'

राहुल गांधी ने अपने भाषण की शुरुआत देश में एंटी-इनकंबेंसी को लेकर सवाल उठाते हुए की. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में लंबे समय तक सत्ता में रहने वाली सरकारों के खिलाफ आमतौर पर एंटी-इनकंबेंसी देखने को मिलती है. उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का उदाहरण देते हुए कहा कि बांग्लादेश युद्ध में जीत के बाद वह लोकप्रियता के शिखर पर थीं, लेकिन एक-दो साल के भीतर ही उनके खिलाफ बड़ी एंटी-इनकंबेंसी देखने को मिली.

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राहुल गांधी ने कहा कि ऐसा कांग्रेस के नेताओं के साथ हुआ, क्षेत्रीय दलों के नेताओं के साथ हुआ, लेकिन नरेंद्र मोदी, अमित शाह और बीजेपी के मामले में ऐसा क्यों नहीं होता? उन्होंने हरियाणा का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां 50 साल तक सत्ता बदलती रही, लेकिन अब एंटी-इनकंबेंसी गायब हो गई. उन्होंने महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और गुजरात का भी जिक्र किया.

राहुल गांधी ने कहा कि वह किसी व्यक्ति की लोकप्रियता या किसी सरकार के प्रदर्शन को समझ सकते हैं, लेकिन यह समझना मुश्किल है कि एंटी-इनकंबेंसी अचानक कैसे गायब हो गई. उन्होंने इसकी तुलना सद्दाम हुसैन के इराक और उत्तर कोरिया से भी की.

'वोट देश की नींव, वोट खत्म तो संविधान का मतलब नहीं'

राहुल गांधी ने कहा कि जब कोई भारतीय वोट डालता है तो वह संविधान में अपनी 'एनर्जी' और 'पावर' डालता है. उनके मुताबिक, वोट से संविधान को शक्ति मिलती है, संविधान से कानून बनते हैं और कानूनों से देश की संस्थाएं काम करती हैं. उन्होंने कहा कि संसद, राज्यसभा और विधानसभाओं में बैठने वाले लोग वोट के जरिए चुने जाते हैं. इस तरह वोट, संविधान, कानून और संस्थाएं एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं.

राहुल गांधी ने कहा कि अगर वोट खत्म कर दिया गया तो संविधान का कोई मतलब नहीं रह जाएगा. संविधान से निकलने वाले कानून भी सवालों में आ जाएंगे और देश की संस्थाओं का भी कोई अर्थ नहीं रह जाएगा.

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उन्होंने आरोप लगाया कि देश के वोट को 'डिस्ट्रॉय' किया गया है. राहुल गांधी ने कहा कि यह सिर्फ वोट की चोरी नहीं है, बल्कि इसके बाद कानून और संस्थाओं को प्रभावित करने की प्रक्रिया भी हुई.

'वोट चोरी, कानून चोरी और फिर संस्था चोरी'

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि वोट की कथित चोरी के बाद कानून की चोरी और फिर संस्थाओं की चोरी हुई. उन्होंने कहा कि इसके बाद शिक्षा व्यवस्था, नौकरशाही और न्यायपालिका में RSS से जुड़े लोगों को भर दिया गया. उन्होंने इसे देश के खिलाफ 'कॉनस्पिरेसी' बताते हुए कहा कि ऊपर कथित साजिशकर्ता हैं और नीचे उनके लिए काम करने वाले लोग हैं.

राहुल गांधी ने कहा कि अगर वोट चोरी हुई है तो उसके आधार पर बनाए गए कानूनों पर भी सवाल उठता है. उन्होंने कहा कि कानून का आधार ही वोट है. उन्होंने जोर देकर कहा कि वह यह बात हल्के में नहीं कह रहे हैं. उनके मुताबिक, वह पिछले तीन साल से लगातार यह मुद्दा उठा रहे हैं और हरियाणा, महाराष्ट्र तथा कर्नाटक में इसके समर्थन में सबूत पेश कर चुके हैं.

दिसंबर 2023 के कानून का किया जिक्र

राहुल गांधी ने दिसंबर 2023 में बनाए गए कानून का भी जिक्र किया. उन्होंने आरोप लगाया कि इस कानून के जरिए ज्ञानेश कुमार को कानूनी कार्रवाई से इम्यूनिटी दी गई और उन्हें लीगल सिस्टम से बाहर कर दिया गया. उन्होंने सवाल किया कि यह कानून किसने बनाया. राहुल गांधी ने इसका जवाब देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम लिया और आरोप लगाया कि ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि ज्ञानेश कुमार सरकार के लिए काम कर रहे थे.

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'ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति पर मैंने डिसेंट नोट दिया था'

राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की स्वतंत्रता के लिए चुनाव आयुक्त और मुख्य चुनाव आयुक्त चुनने की प्रक्रिया कार्यपालिका के प्रभाव से स्वतंत्र होनी चाहिए.

राहुल गांधी के मुताबिक, उन्होंने प्रधानमंत्री को एक डिसेंट नोट दिया था. उन्होंने कहा कि उनकी आपत्ति को नजरअंदाज कर दिया गया और प्रधानमंत्री तथा गृह मंत्री की भूमिका वाली चयन प्रक्रिया के बाद ज्ञानेश कुमार को चुना गया.

राहुल गांधी ने कहा कि उन्होंने अपने डिसेंट नोट में लिखा था कि स्वतंत्र चुनाव आयोग का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि चुनाव आयुक्त और मुख्य चुनाव आयुक्त को चुनने की प्रक्रिया कार्यपालिका के हस्तक्षेप से मुक्त और निष्पक्ष होनी चाहिए.

उन्होंने आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया स्वतंत्र नहीं थी और उस पर प्रधानमंत्री तथा गृह मंत्री का दबाव था.

'पहले इन दोनों चुनाव आयुक्तों ने कुछ नहीं कहा'

राहुल गांधी ने चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से दर्ज की गई असहमतियों को लेकर एक पूरी टाइमलाइन बताई. उन्होंने कहा कि जब उन्होंने महाराष्ट्र चुनाव को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की, तब दोनों चुनाव आयुक्तों की ओर से कुछ नहीं कहा गया. दिसंबर 2023 के कानून, उनके डिसेंट नोट और उनके 'वोट चोरी' से जुड़े कार्यक्रमों के दौरान भी दोनों चुनाव आयुक्तों की तरफ से कोई सार्वजनिक आपत्ति नहीं आई.

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राहुल गांधी ने अपनी 'वोट चोरी यात्रा' और उसके बाद किए गए प्रेजेंटेशन का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि इन कार्यक्रमों में उन्होंने बताया था कि कथित वोट चोरी किस तरह और केंद्रीकृत तरीके से की जा रही है. इसके बाद दोनों चुनाव आयुक्तों की ओर से चिट्ठियां लिखी जानी शुरू हुईं.

'10 महीने में 14 बार दर्ज हुई आपत्ति'

राहुल गांधी ने कहा कि अब सामने आया है कि दो चुनाव आयुक्तों ने 10 महीनों में 14 बार रिकॉर्ड पर आपत्ति दर्ज की. उनका जो मूल सवाल था, उसका किसी ने जवाब नहीं दिया था और अब दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों से उसी मुद्दे पर नए सवाल खड़े हुए हैं.

उन्होंने कहा कि हरियाणा में उनकी 'वोट चोरी' को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की तारीख और दोनों चुनाव आयुक्तों की ओर से चिट्ठियां लिखे जाने के समय के बीच भी एक संबंध दिखाई देता है.

'देश इतिहास में एक नई जगह पहुंच गया है'

राहुल गांधी ने कहा कि अब देश एक नई जगह पहुंच गया है. उन्होंने दावा किया कि आजादी के बाद लोकतंत्र पर इस तरह का हमला नहीं हुआ है. उनके आरोप किसी एक चुनाव तक सीमित नहीं हैं. उनके मुताबिक, यह देश की लोकतांत्रिक और संवैधानिक व्यवस्था से जुड़ा सवाल है. राहुल गांधी ने एक बार फिर आरोप लगाया कि 2024 के लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनावों में गड़बड़ी हुई. उन्होंने कहा कि आने वाले समय में यह पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगा. वोट, संविधान, कानूनी ढांचे और संस्थाओं के बीच जो कड़ी है, वह आजादी के बाद भारत के इतिहास में पहले कभी इस तरह नहीं टूटी.

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राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से भी अपील की. उन्होंने कहा कि उनके दो जूनियर चुनाव आयुक्तों ने जो बातें सामने रखी हैं, उन्हें ज्ञानेश कुमार को समझना चाहिए और उन्हें 'अप्रूवर' बन जाना चाहिए. राहुल गांधी ने कहा कि इस मामले में आगे परिणाम होंगे.

उन्होंने कहा कि कांग्रेस और विपक्ष इस मुद्दे पर चुप नहीं बैठेगा. उनके पास पर्याप्त जानकारी है और आने वाले दो से चार महीनों में और बातें सामने आएंगी. कांग्रेस और विपक्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की कथित भूमिका की जांच की मांग को आगे बढ़ाएंगे.

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