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J-K: नेशनल कॉन्फ्रेंस MP मोहम्मद अकबर लोन के बेटे हिलाल लोन पर लगा PSA

स्थानीय प्रशासन का मानना है कि अगर लोन को रिहा किया जाएगा तो उत्तर कश्मीर में कानून व्यवस्था बिगड़ सकती है. जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने कई नेताओं के खिलाफ पीएसए के तहत कार्रवाई की है. पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती, उमर अब्दुल्ला और फारूक अब्दुल्ला के खिलाफ भी पीएसए लगा है.

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हिलाल लोन पर पब्लिक सेफ्टी एक्ट में केस दर्ज (फाइल फोटो)
हिलाल लोन पर पब्लिक सेफ्टी एक्ट में केस दर्ज (फाइल फोटो)

  • कई नेताओं के खिलाफ पीएसए के तहत कार्रवाई
  • उमर और महबूबा के खिलाफ PSA में केस दर्ज

नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता और सांसद मोहम्मद अकबर लोन के बेटे हिलाल लोन पर पब्लिक सेफ्टी एक्ट (पीएसए) लगाया गया है. मुख्यधारा के नेताओं के खिलाफ हुई कार्रवाई का यह सातवां मामला है. हिलाल लोन 5 अगस्त से प्रिवेंटिव डिटेंशन में हैं, जब केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का फैसला किया था.

सोमवार सुबह डिप्टी कमिश्नर ने एक डोजियर हिलाल लोन को सौंपा और उन्हें इस बात की जानकारी दी कि उनके खिलाफ पीएसए के तहत कार्रवाई हुई है. स्थानीय प्रशासन का मानना है कि अगर उन्हें रिहा किया जाएगा तो उत्तर कश्मीर में कानून व्यवस्था बिगड़ सकती है. जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने कई नेताओं के खिलाफ पीएसए के तहत कार्रवाई की है. पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती, उमर अब्दुल्ला के खिलाफ भी पीएसए लगा है. मोहम्मद अकबर बारामुला से सांसद हैं.

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दो दिन पहले जम्मू-कश्मीर विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष मुबारक गुल और नेशनल कांफ्रेंस के नेता तनवीर सादिक को श्रीनगर के एमएलए हॉस्टल से रिहा किया गया. गुल व सादिक, पांच अगस्त को अनुच्छेद 370 के रद्द होने के बाद से हिरासत में थे. इससे पहले पीपुल्स कांफ्रेंस के अध्यक्ष सज्जाद लोन और पीडीपी नेता वहीद पारा को हिरासत से रिहा किया गया था, जबकि जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्रियों- और महबूबा मुफ्ती पर पीएसए के तहत मामला दर्ज किया गया है. जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला को श्रीनगर के गुपकर रोड के उनके घर पर हिरासत में रखा गया है.

बता दें, के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को पीएसए के अंतर्गत हिरासत में लिए जाने के खिलाफ उनकी बहन सारा अब्दुल्ला पायलट ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की. वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने मामले की तत्काल सुनवाई की मांग की है, जिसपर शीर्ष अदालत विचार करने के लिए सहमत हो गई है. सारा ने उमर को पांच फरवरी को पीएसए के अंतर्गत रखने के आदेश को असंवैधानिक बताया और कहा कि यह मौलिक अधिकारों का भी उल्लंघन करता है.

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