पंजाब चुनाव से पहले एक बार फिर शिरोमणि अकाली दल और बीजेपी के एक साथ आने की चर्चाएं तेज हो गई हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह सुखबीर सिंह बादल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 7 अगस्त को हुई मुलाकात है. इस बैठक के ठीक बाद अकाली दल ने महिला आरक्षण बिल और परिसीमन के नए प्रस्ताव को अपना समर्थन दे दिया. केंद्र सरकार के अहम फैसलों पर जताई गई इस सहमति के बाद दोनों पुराने सहयोगियों के बीच फिर से गठबंधन के कयास लगाए जाने लगे हैं.
बता दें कि बीजेपी और अकाली दल का औपचारिक साथ करीब 24 साल (1997 से 2020) तक चला था. सितंबर 2020 में कृषि कानूनों के विरोध में अकाली दल एनडीए से अलग हो गया था. अब पीएम मोदी के साथ मुलाकात के बाद दोनों दलों के बीच जमी बर्फ पिघलती (पुरानी दूरी कम होना) नजर आ रही है.
दरअसल, समर्थन का यह फैसला चंडीगढ़ में सुखबीर सिंह बादल के आवास पर हुई एक अहम बैठक के बाद लिया गया. पार्टी के बड़े नेताओं के साथ लंबे मंथन के बाद सुखबीर सिंह बादल ने साफ कर दिया कि उनकी पार्टी संसद में महिला आरक्षण बिल का खुलकर साथ देगी.
परिसीमन को लेकर भी पार्टी ने अपना पुराना रुख बदल लिया है. अकाली दल अब केंद्र के उस नए प्लान के साथ खड़ा हो गया है, जिसके तहत देश के हर राज्य में लोकसभा सीटें 50 प्रतिशत बढ़ाई जानी हैं. पार्टी के वरिष्ठ नेता दलजीत सिंह चीमा ने बताया कि पहले 2011 की जनगणना से परिसीमन जोड़ने का विरोध किया जा रहा था. अब जब सभी राज्यों में सीटें बराबर अनुपात में बढ़ाने की बात है, तो पार्टी को इस पर कोई आपत्ति नहीं है.
केजरीवाल के बयान पर पलटवार
पीएम मोदी से मुलाकात के बाद जब अकाली दल के समर्थन की खबरें आईं, तो आप प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर तंज कसा. उन्होंने लिखा, "ना-ना करते प्यार तुम ही से कर बैठे. तो क्या चंदा चोर पार्टी और बेअदबी पार्टी का गठबंधन हो रहा है?"
केजरीवाल के इस बयान पर अकाली दल ने भी पलटवार करने में देरी नहीं की. पार्टी नेता दलजीत सिंह चीमा ने चुटकी लेते हुए कहा कि विरोधी नेताओं की ऐसी बातें सीधे तौर पर उनकी घबराहट और डर को जाहिर कर रही हैं. उन्हें समझ आ गया है कि पंजाब का सियासी माहौल बदलने वाला है.
पंजाब में फिर जम सकती है पुरानी जोड़ी
बता दें कि 7 अगस्त (शुक्रवार) को प्रधानमंत्री से हुई मुलाकात के बाद अकाली दल के इस फैसले को दोनों दलों के बीच पिघलती बर्फ (यानी कम होती दूरियों) के रूप में देखा जा रहा है. जानकारों का मानना है कि यह कदम पंजाब की राजनीति में एक नए समीकरण की शुरुआत हो सकता है.
हालांकि, बीजेपी के साथ गठबंधन के सीधे सवाल पर दलजीत सिंह चीमा थोड़ा संभलकर बोले. उन्होंने कहा कि फिलहाल सिर्फ उन्हीं फैसलों को सामने रखा जा रहा है, जो आज की बैठक में तय किए गए हैं.
फिलहाल अकाली दल ने महिला आरक्षण बिल और परिसीमन के प्रस्ताव पर अपना रुख साफ कर दिया है. अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि BJP और SAD के रिश्तों को लेकर आगे क्या फैसला होता है.