भारत और अमेरिका ने दुनिया को चौंकाते हुए ट्रेड डील का ऐलान कर दिया. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि भारतीय सामानों पर अमेरिकी टैरिफ को 50 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी कर दिया गया है. साथ ही यह भी दावा किया गया कि भारत रूस से तेल की खरीद नहीं करेगा और अमेरिकी सामानों का आयात बढ़ाएगा. इस ट्रेड को लेकर सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई है.
अमेरिका के ट्रेड डील को बीजेपी मोदी सरकार की कूटनीतिक जीत और देश की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने वाली बता रही है तो कांग्रेस सहित विपक्षी पार्टियां सवाल खड़े कर रही हैं. कांग्रेस से लेकर सपा और तमाम विपक्षी पार्टियां ट्रेड डील को लेकर मोदी सरकार को घेरने में जुट गई हैं.
अखिलेश ने किसान विरोधी डील बताया
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को लेकर मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है. अखिलेश यादव ने कहा कि कि भारत के कृषि बाजार को अमेरिकी उत्पादों के लिए खोलना देश की 70 फीसदी आबादी के साथ धोखा है, जो खेती पर निर्भर है. साथ ही उन्होंने कहा कि इससे विदेशी सामान आने से बिचौलियों और मुनाफाखोरों का एक नया वर्ग तैयार होगा, जिससे खाने-पीने की चीजें महंगी हो सकती हैं.
अखिलेश यादव का आरोप है कि अमेरिका के व्यापार समझौता किसानों की आय कम हो जाएगी, जिससे वे कर्ज में डूबकर अपनी जमीनें बड़े कॉरपोरेट्स को बेचने पर मजबूर हो जाएंगे. उन्होंने यहां तक कह दिया कि बीजेपी हमेशा से विदेशी ताकतों के लिए एजेंट की तरह काम करती आई है और यह डील इसी का हिस्सा है.
कांग्रेस ने उठाए गंभीर सवाल
कांग्रेस ने भी इस डील पर गंभीर सवाल उठाए हैं. कांग्रेस का कहना है कि कृषि जैसे संवेदनशील सेक्टर को विदेशी कंपनियों के लिए खोलना कोई मामूली बात नहीं है. उन्होंने सरकार से मांग की है कि इस पूरी डील का मसौदा जनता के सामने रखा जाए ताकि पता चल सके कि परदे के पीछे क्या शर्तें तय हुई हैं. अभिषेक मनु सिंघवी से लेकर मनीष तिवारी सहित कांग्रेस के तमाम नेताओं ने ट्रेड डील के लेकर सवाल खड़े किए.
कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने ट्रंप की ट्रूथ पोस्ट को एक्स पर शेयर करते हुए लिखा है कि रूसी तेल की ख़रीद बंद. अमेरिकी निर्यात पर टैरिफ नहीं. भारत के निर्यात पर 18 फीसदी टैरिफ. भारत अमेरिका से 500 अरब डॉलर की कीमत की ऊर्जा, तकनीक, कृषि उत्पाद और कोयले का आयात करेगा. भारत की रणनीतिक स्वायत्तता कहां गई?
'ट्रेड डील की तारीफ करना देशद्रोह'
कांग्रेस सोशल मीडिया प्रभारी सुप्रिया श्रीनेत ने जिसे बिल्कुल समझ नहीं है, वही भारत-अमेरिका डील का जश्न मनाएगा. यह डील इतनी एकतरफा और भारत के लिए नुकसानदायक है कि इसकी तारीफ करने वाला देशद्रोही ही हो सकता है. अभी देखा कि बीजेपी के सांसद इसकी तारीफ़ कर रहे थे. इसमें कोई हैरानी की बात नहीं है. नासमझ देशद्रोहियों का झुंड!
कांग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील पूरी तरह सरेंडर का मामला है. डोनाल्ड ट्रम्प की घोषणा के अनुसार, भारत टैरिफ घटाकर 0% कर देगा, जबकि अमेरिका भारत में बने प्रोडक्ट्स पर 18% टैरिफ लगाएगा. ऐसा लगता है कि अब अमेरिका यह तय कर रहा है कि हम किससे तेल खरीद सकते हैं, और भारत पर दबाव डालकर उसे अपनी पूरी एनर्जी निर्भरता बदलने के लिए मजबूर कर रहा है.
उन्होंने कहा कि भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता खेती को बचाने की रही है, और अगर ट्रम्प एडमिनिस्ट्रेशन के अधिकारियों की बात मानें तो पूरा भारतीय बाज़ार जल्द ही अमेरिकी खेती के प्रोडक्ट्स से भर जाएगा. जब आधे से ज़्यादा भारत खेती पर निर्भर है, तो यह उन गरीब किसानों के लिए मौत की सज़ा है जो विशाल अमेरिकी खेती इंडस्ट्री का मुकाबला नहीं कर पाएंगे. यह डील पूरी तरह से बिना किसी पारदर्शिता के की गई, जिसमें जनता को इसकी डिटेल्स के बारे में नहीं बताया गया. साथ ही केसी वेणुगोपाल ने कहा कि ट्रेड डील में क्या-क्या समझौते हुए हैं, उसके विस्तार से रखना चाहिए.
शशि थरूर ने भी पूछा सवाल
टैरिफ समझौते को लेकर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सरकार से पारदर्शिता और स्पष्टता की मांग की है. उन्होंने कहा कि अगर यह समझौता वास्तव में देश के हित में है तो विपक्ष उसे खुशी-खुशी स्वीकार करेगा, लेकिन फिलहाल सरकार की ओर से सिर्फ बयानों और सोशल मीडिया पोस्ट के अलावा कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आई है. शशि थरूर ने कहा, ‘हमें केवल स्पष्टता चाहिए. अगर यह सच में अच्छी खबर है, तो हम भी इसका जश्न मनाना चाहेंगे. लेकिन अभी हमारे पास सिर्फ प्रधानमंत्री का ट्वीट और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ट्वीट है. क्या एक संसदीय लोकतंत्र में इतना ही काफी है?’
सरकार से कांग्रेस के पांच सवाल
कांग्रेस पार्टी ने अपने एक्स हैंडल पर एक पोस्ट में लिखा कि सीज़फ़ायर की तरह ट्रेड डील की घोषणा भी डोनाल्ड ट्रंप की ओर से की गई. ये बताया गया कि 'मोदी की रिक्वेस्ट' पर ट्रेड डील की जा रही है.
ट्रंप का कहना है कि भारत अमेरिका के ऊपर टैरिफ़ और नॉन टैरिफ़ बैरियर 0 फीसदगी तक घटाएगा. मतलब आपने अमेरिका के लिए पूरा बाज़ार खोल दिया. इससे भारतीय इंडस्ट्री का ज़बरदस्त नुक़सान होगा. यहां के व्यापारी, यहां के किसान, सबका साथ छोड़ दिया आपने.
2. कृषि क्षेत्र को अमेरिका के लिए खोलने की बात है, आख़िर क्या सौदा हुआ है? हमारे किसानों के हितों का ध्यान रखा गया है या उनका साथ भी छोड़ दिया गया है?
हमारे किसानों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी?
3. ये भी कहा गया कि मोदी रूस से तेल नहीं खरीदेंगे, अमेरिका और वेनेज़ुएला से तेल खरीदेंगे. क्या ट्रेड डील में मोदी सरकार रूस का साथ छोड़ने पर राजी हुई है?
4. अमेरिका से ज़्यादा सामान ख़रीदने की बात भी कही है. अगर ऐसा है तो 'मेक इन इंडिया' का क्या हुआ?
5. ट्रेड डील में किन बिंदुओं पर बात हुई, क्या तय हुआ, ये बात देश को जानने का हक़ है.
कांग्रेस ने मांग की है कि सरकार को इस बारे में सारी जानकारी देश और संसद से साझा करनी चाहिए.
विपक्ष पूरी तरह से फ्रस्ट्रेट है-जेपी नड्डा
केंद्रीय मंत्री और पूर्व बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने अमेरिका-भारत ट्रेड डील के लिए पीएम मोदी की तारीफ की. उन्होंने कहा कि यहां ये बताना चाहता हूं कि विपक्ष फ्रस्ट्रेट है. सरकार की तरफ से ये बताना चाहता हूं कि हम इस ट्रेड डील पर स्टेटमेंट लेकर आएंगे और संबंधित मंत्री इसकी पूरी जानकारी देंगे. सरकार स्टेटमेंट देने वाली है और हम इस पर चर्चा के लिए पूरी तरह से तैयार हैं.
जेपी नड्डा ने कहा कि कांग्रेस को अच्छे काम में भी सिर्फ बुराई दिखती है. उन्होंने कहा कि ट्रंप ने टैरिफ लगाया, तब भी विपक्ष कह रहा था कि सरकार कहां है, क्या कर रही है. अब ट्रंप ने टैरिफ घटा दिया, तब भी विपक्ष को दिक्कत है. हम हर विषय पर चर्चा के लिए तैयार हैं जेपी नड्डा ने विपक्ष को कठघरे में खडड़ा करते हुए कहा कि इन्हें न तो विकास में इंट्रेस्ट है, ना ही ट्रेड में. इनको सिर्फ राजनीति में इंट्रेस्ट है.
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि विपक्ष पहले कहा था कि 50 फीसदी टैरिफ लग गया, सरकार जवाब दे, जब अमेरिका ने उसे घटाकर 18 फीसदी कर किया तो अब जवाब मिल गया. इसके बाद भी सवाल उठा रहे हैं. विपक्ष के हर मुद्दे पर सरकार चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन उन्हें राष्ट्र से जुड़े मुद्दों पर कोई लेना देना नहीं है. विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं है.