
सियासी हलके में इन दिनों शशि थरूर चर्चा का केंद्र बन गए हैं. भारत सरकार ने पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में ऑपरेशन सिंदूर के बाद अब आतंक पर पाकिस्तान को बेनकाब करने के लिए अलग-अलग देशों में सात सर्वदलीय संसदीय डेलिगेशन का भेजने का ऐलान किया है. इसमें से एक डेलिगेशन की अगुवाई शशि थरूर करेंगे. शशि थरूर ने इसे सम्मान की बताया है, वहीं कांग्रेस ने इस पर ऐतराज जताते हुए कहा है कि हमने तो उनका नाम सरकार को भेजा ही नहीं था. कांग्रेस के तल्ख तेवर, शशि के रुख से अब यह बहस भी छिड़ गई है कि थरूर की सियासी नाव किधर जा रही है?
किधर जा रही है थरूर की सियासी नाव?
पिछले कुछ समय से रह-रहकर यह चर्चा होती रही है कि शशि थरूर केंद्र में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार की अगुवाई कर रही भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का दामन थाम सकते हैं. ऐसे कयास इसलिए लगते रहे हैं, क्योंकि कई मौकों पर शशि थरूर कांग्रेस के आधिकारिक स्टैंड के विपरीत बीजेपी और सरकार पर सॉफ्ट नजर आए हैं. अब कांग्रेस के तल्ख तेवरों के बावजूद डेलिगेशन को लेकर पीआईबी के एक्स पोस्ट पर थरूर ने जिस तरह रिएक्ट किया, उसने इस तरह की चर्चा को और हवा दे दी है.
शशि थरूर की सियासी दिशा को लेकर वरिष्ठ पत्रकार रशीद किदवई कहते हैं डेलिगेशन का मामला राष्ट्रीय हित से जुड़ा विषय है. इसे शशि थरूर के कांग्रेस छोड़ने की तरह नहीं देखा जाना चाहिए. शशि थरूर संयुक्त राष्ट्र संघ में रहे हैं, विदेशी मामलों के जानकार हैं और प्रभावशाली विदेश मंत्री रह चुके हैं. उनकी मौजूदगी से भारत का डेलिगेशन अपना पक्ष मजबूत और प्रभावी तरीके से दुनिया के सामने रख सकेगा. यह कोई पहला मौका नहीं है जब विपक्ष के किसी नेता को किसी डेलिगेशन की अगुवाई सौंपी गई हो.

उन्होंने कहा कि साल 1994 में तब के प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव की सरकार ने विपक्ष के तत्कालीन नेता अटल बिहारी वाजपेयी की अगुवाई में भारत का डेलिगेशन संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग भेजा था. इस डेलिगेशन ने कश्मीर मुद्दे पर भारत के खिलाफ प्रस्ताव लाने के पाकिस्तानी प्रयासों को विफल कर दिया था. यह अलग बात है कि इस मसले पर राजनीति हो रही है और पक्ष-विपक्ष, दोनों इसका फायदा उठाने में जुटे नजर आ रहे हैं. अब अगर सरकार ने कांग्रेस के सुझाए नाम दरकिनार कर शशि थरूर को मौका दिया है, तो इसे भी सहर्ष स्वीकार किया जाना चाहिए. कांग्रेस ने थरूर का नाम न देकर गलती की थी, जिसे सत्तापक्ष ने भुनाया.
थरूर के रुख से कैसे फंस गई है कांग्रेस
कांग्रेस सांसद शशि थरूर के हालिया स्टैंड से कांग्रेस फंस गई है. कांग्रेस ने तल्ख प्रतिक्रिया देते हुए यह जरूर कहा है कि पार्टी की ओर से जो नाम सुझाए गए थे, उनमें से किसी को भी शामिल नहीं किया गया है. पार्टी की ओर से जो नाम भेजे गए थे, उनमें शशि थरूर का नाम नहीं था. कांग्रेस के भीतर से भी थरूर पर एक्शन की मांग जोर पकड़ रही है, लेकिन ताजा मामले में पार्टी उहापोह की स्थिति में फंस गई है. अगर थरूर के खिलाफ कोई एक्शन होता है, तो यह पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद सरकार के हर फैसले में साथ देने वाले पार्टी के स्टैंड के खिलाफ होगा. राजनीतिक नुकसान जो होगा, वो अलग.
कब-कब बीजेपी पर सॉफ्ट दिखे थरूर
केरल के तिरुवनंतपुरम से चार बार के सांसद शशि थरूर कई मौकों पर बीजेपी पर सॉफ्ट दिखे और अपनी ही पार्टी के नेताओं को चुभने लगे. ऐसे पांच मौके...
1- पीएम मोदी का अमेरिका दौरा और F-35 डील
शशि थरूर ने डोनाल्ड ट्र्ंप के अमेरिका का राष्ट्रपति निर्वाचित होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे और इसके नतीजों को उत्साहजनक बताया था. उन्होंने पीएम मोदी की इस यात्रा के दौरान एफ-3 स्टील्थ फाइटर जेट कको लेकर हुई बात को भी महत्वपूर्ण बताते हुए कहा था कि राफेल के बादइस अत्याधुनिक लड़ाकू विमान के आ जाने से भारतीय वायु सेना की स्थिति बहुत अच्छी हो जाएगी. थरूर का यह बयान ऐसे समय में आया था, जब कांग्रेस एफ-35 को कबाड़ बताने वाले एलॉन मस्क के बयान को आधार बनाकर मोदी सरकार को घेर रही थी.

2- विदेश नीति और रूस-यूक्रेन युद्ध
दो महीने पहले मार्च में ही शशि थरूर ने मोदी सरकार की विदेश नीति की तारीफ की थी और रूस-यूक्रेन युद्ध में भारत की कूटनीति पर टिप्पणी की थी. थरूर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए कहा था कि पीएम ने दो हफ्ते के भीतर रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोल्दोमिर जेलेंस्की, दोनों को गले लगाया. दोनों ही देशों में उन्हें (पीएम मोदी को) स्वीकार भी किया गया. रूस-यूक्रेन युद्ध पर भारत के रुख की आलोचना करने के लिए मुझे शर्मिंदगी उठानी पड़ी. केरल बीजेपी के अध्यक्ष के सुरेंद्रन ने इसे राहुल गांधी के मुंह पर तमाचा बताया था.
यह भी पढ़ें: 'कांग्रेस में होना और कांग्रेस का होना दोनों अलग बात हैं', शशि थरूर पर जयराम रमेश का तंज
3- पहलगाम हमला
पहलगाम आतंकी हमले के बाद जब कांग्रेस पार्टी इंटेलिजेंस फेल्योर के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरने में जुटी थी, तब भी पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर अलग लाइन पर खड़े नजर आए थे. उन्होंने इजरायल में हमास के हमले का जिक्र करते हुए कहा था कि कोई भी देश सौ फीसदी अचूक खुफिया तंत्र नहीं रख सकता.
यह भी पढ़ें: 'जो जिम्मेदारी मिली वो निभाऊंगा, पार्टी की राय पर कोई टिप्पणी नहीं', डेलिगेशन लिस्ट में नाम होने पर बोले शशि थरूर
4- ऑपरेशन सिंदूर
ऑपरेशन सिंदूर के बाद कांग्रेस ने सेना के शौर्य को सलाम किया था. कांग्रेस इस ऑपरेशन के को लेकर सरकार का जिक्र करने से परहेज करती नजर आई, वहीं शशि थरूर का रुख पार्टी से बिलकुल उलट रहा. शशि थरूर ने ऑपरेशन सिंदूर के लिए सरकार की तारीफ की थी. उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर को संयमित और सटीक कार्रवाई बताया था.
यह भी पढ़ें: अमेरिका में शशि थरूर, सऊदी अरब में ओवैसी... दुनिया में PAK को बेनकाब करेंगे MPs के ये 7 डेलिगेशन
5- सर्वदलीय संसदीय डेलिगेशन
सरकार ने पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान को बेनकाब करने के लिए सर्वदलीय संसदीय डेलिगेशन की अगुवाई करने वाले सांसदों के नाम का ऐलान किया, तो उसमें पहला नाम था शशि थरूर का. थरूर का नाम देख कांग्रेस लाल-पीली हो गई, लेकिन थरूर ने इसे सम्मान की बात बताते हुए केंद्र का आभार जताने में जरा भी देर नहीं लगाई. थरूर ने कहा कि एक सर्वदलीय डेलिगेशन का नेतृत्व करने के लिए भारत सरकार के निमंत्रण से सम्मानित महसूस कर रहा हूं. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय हित की बात होगी, मेरी सेवाओं की जरूरत होगी, तो मैं पीछे नहीं रहूंगा.