सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल करने, दस्तावेज हवा में उड़ाने और सुरक्षा कर्मियों के साथ धक्का-मुक्की करने के मामले में दिल्ली पुलिस ने मुख्य आरोपी प्रबल प्रताप सिंह और उसके साथी चंद्रभान को गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस ने दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश कर दो दिन की रिमांड पर लिया है. यह मामला 10 जुलाई 2026 को सुप्रीम कोर्ट के कोर्टरूम नंबर-13 में जस्टिस के.वी. विश्वनाथन और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ के समक्ष हुई घटना से जुड़ा है.
घटना के संबंध में दिल्ली के तिलक मार्ग थाने में प्रबल प्रता सिंह और उसके साथी चंद्रभान के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 132, 221, 224 और 3(5) समेत अन्य धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी. पुलिस के मुताबिक, 24 वर्षीय प्रबल प्रताप सिंह, उत्तर प्रदेश के इटावा का रहने वाला है और लखनऊ यूनिवर्सिटी में एलएलबी थर्ड ईयर का छात्र है. वहीं, 23 वर्षीय चंद्रभान, रायबरेली जिले के पूरे सिंहारे गांव का निवासी है और लखनऊ यूनिवर्सिटी में एलएलबी सेकेंड ईयर का छात्र है. प्रबल प्रताप सिंह ने सुप्रीम कोर्ट के जजों को आदेश देने की कोशिश की थी.
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सुप्रीम कोर्ट में हंगामे के बाद सुरक्षाकर्मियों ने तत्काल हस्तक्षेप करते हुए प्रबल प्रताप सिंह और उसके साथी चंद्रभान को कोर्टरूम से बाहर निकाल दिया था. इसके बाद उन्हें सुप्रीम कोर्ट परिसर में मौजूद सुरक्षा अधिकारियों की निगरानी में रखा गया था. प्रबल प्रताप इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक आदेश को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचे था. उसकी मांग लखनऊ के एक मामले में एफआईआर दर्ज कराने से जुड़ी थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप से इनकार करते हुए याचिका खारिज कर दी थी.
एफआईआर के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट में एक मामले की सुनवाई के दौरान प्रबल प्रताप सिंह याचिकाकर्ता के रूप में पेश हुआ था. आरोप है कि उसने सुनवाई के दौरान अभद्र और असंसदीय भाषा का इस्तेमाल किया, कोटरूम के भीतर कागज फेंके और कार्यवाही में जानबूझकर बाधा डाली. जब सुरक्षा कर्मियों ने उसे रोकने की कोशिश की तो उसने ड्यूटी पर तैनात अधिकारी के साथ धक्का-मुक्की कर सरकारी काम में बाधा पहुंचाई.
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दिल्ली पुलिस ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों के बाद दोनों आरोपियों का आईएचबीएएस (IHBAS) में मेडिकल टेस्ट कराया गया. मेडिकल रिपोर्ट में किसी तत्काल सक्रिय मनोरोग उपचार की आवश्यकता नहीं पाई गई. जांच के दौरान आरोपियों के कब्जे से आपत्तिजनक शब्दों वाले पर्चे (पैम्फलेट) भी बरामद किए गए हैं. पुलिस का कहना है कि दोनों से पूछताछ जारी है और मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है.