देश में ऊर्जा संकट को लेकर चिंता बढ़ रही है और इसका असर अब सरकारों के फैसलों में साफ दिखाई देने लगा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मिडिल-ईस्ट में तनाव के बीच पूरे देश से ईंधन बचाने की अपील की थी. अब यह अपील सिर्फ एक संदेश नहीं रही, बल्कि कई राज्यों में सीधे एक्शन में बदल चुकी है. बीजेपी शासित राज्यों में इसे लेकर काफी सख्ती दिखाई जा रही है. राज्य सरकारें लगातार नए निर्देश जारी कर रही हैं, ताकि हर स्तर पर पेट्रोल-डीजल की बचत की जा सके. मकसद साफ है कि आने वाले समय में किसी भी बड़े संकट से निपटा जा सके.
दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात में इस दिशा में अलग-अलग फैसले लिए जा रहे हैं. कहीं सरकारी काफिलों में वाहनों की संख्या घटाई जा रही है, तो कहीं अधिकारियों को सार्वजनिक परिवहन अपनाने के निर्देश दिए जा रहे हैं. इसका असर सिर्फ प्रशासन तक सीमित नहीं है, बल्कि आम लोगों के बीच भी ईंधन बचाने की सोच मजबूत होती दिख रही है. सरकारों का मानना है कि जब सब मिलकर छोटे-छोटे कदम उठाएंगे, तभी हम इस बड़ी मुसीबत से मजबूती से निपट पाएंगे.
दिल्ली में ये एक्शन लिया गया
पीएम मोदी की अपील के बाद दिल्ली में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने तुरंत कदम उठाते हुए विभागीय कामकाज के लिए वाहनों की संख्या सीमित करने का फैसला लिया है. अब मंत्री, विधायक और सरकारी अधिकारी जरूरत के हिसाब से कम से कम वाहनों का उपयोग करेंगे. साथ ही, कारपूलिंग और सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता देने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं. इसका मकसद सरकारी कामकाज में ईंधन की खपत को सीधे तौर पर कम करना है.
राजस्थान में ये एक्शन लिया गया
वहीं, राजस्थान में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अपने काफिले में गाड़ियों की संख्या घटाने का आदेश दिया है. इसके साथ ही उन्होंने साफ किया है कि फालतू गाड़ियों का इस्तेमाल अब पूरी तरह बंद किया जाएगा. सीएम भजन लाल शर्मा ने हर स्तर पर फिजूलखर्ची रोकने पर भी जोर दिया है. इसके अलावा, राज्य के सभी अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को ईंधन बचाने की सलाह दी गई है. सीएम ने खुद अपने काफिले में भी कम से कम गाड़ियों के इस्तेमाल के निर्देश दिए हैं. साथ ही सभी से अपील की गई है कि वे जरूरत के मुताबिक ही गाड़ियों का उपयोग करें, ताकि पेट्रोल-डीजल की बचत हो और सरकारी कामकाज में सादगी बनी रहे.
उत्तर प्रदेश में ये एक्शन लिया गया
जबकि, उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस अभियान को और आगे बढ़ाया है. अधिकारियों के साथ हुई बैठक में मुख्यमंत्री और मंत्रियों के काफिले में 50 प्रतिशत गाड़ियों की कटौती करने के निर्देश दिए गए हैं. इसके साथ ही मेट्रो, बस, सीएनजी, इलेक्ट्रिक वाहन, कारपूलिंग और साइकिल के इस्तेमाल को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है. साथ ही सरकारी बैठकों और कार्यक्रमों को अब ऑनलाइन करने की भी सलाह दी गई है, ताकि बेवजह यात्रा और ईंधन खर्च कम हो सके. इसके अलावा कुछ संस्थानों में हफ्ते में दो दिन घर से काम करने की सलाह भी दी जा रही है, ताकि दफ्तर आने-जाने की जरूरत कम हो और ईंधन की बचत हो सके.
मध्य प्रदेश में ये एक्शन लिया गया
मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने काफिले में वाहनों की संख्या 13 से घटाकर 8 कर दी है. उन्होंने कहा है कि राष्ट्रहित में पेट्रोल और डीजल की बचत जरूरी है. साथ ही सभी मंत्री और नए निगम-मंडल पदाधिकारियों से सादगी के साथ काम संभालने की अपील की गई है, वहीं प्रदेशवासियों से सार्वजनिक परिवहन अपनाने का आग्रह किया गया है ताकि ईंधन की बचत हो सके.
गुजरात में डिप्टी सीएम ने दौरा रद्द कर ईंधन बचत की मिसाल पेश की
गुजरात में भी इस अभियान का असर देखने को मिला है. डिप्टी सीएम हर्ष सांघवी ने प्रधानमंत्री की अपील के बाद अपना अमेरिका दौरा रद्द कर दिया है, जिसे इस नीति के प्रति गंभीरता के संकेत के रूप में देखा जा रहा है.
अब कई राज्यों में 'नो व्हीकल डे' जैसे सुझाव सामने आ रहे हैं. साथ ही सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने, स्कूल बसों का बेहतर उपयोग करने और बिजली बचत जैसे कदम भी उठाए जा रहे हैं. वहीं, दफ्तरों में अलग-अलग समय पर काम शुरू करने की सलाह दी जा रही है, ताकि पीक आवर्स में भीड़ कम हो और ईंधन की खपत घट सके.