संसद के जारी मॉनसून सत्र के बीच FCRA बिल भी चर्चा में है. सूत्रों के अनुसार सरकार विशेष सत्र बुलाकर इस बिल पर चर्चा करा सकती है. FCRA यानी विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (Foreign Contribution (Regulation) Amendment Bill, 2026) को लेकर कहा जा रहा है कि इससे विदेशी फंड वाले NGO पर शिकंजा कसेगा.इन्हीं तमाम चर्चाओं के बीच गुरुवार शाम 5:30 बजे कैथोलिक बिशप केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मिलेंगे.
जानकारी के अनुसार FCRA से जुड़े मुद्दों पर आज शाम 5:30 बजे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ अहम बैठक होने वाली है. बैठक में प्रमुख कैथोलिक बिशप और चर्च प्रमुख हिस्सा लेंगे. सूत्रों के अनुसार, करीब 10 ईसाई नेताओं का प्रतिनिधिमंडल गृह मंत्री से मुलाकात कर FCRA से जुड़े अपने मुद्दों और चिंताओं से अवगत कराएगा.
बैठक के दौरान FCRA से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है. माना जा रहा है कि प्रतिनिधिमंडल चर्च और ईसाई संस्थाओं से जुड़े मामलों में अपनी चिंताओं को गृह मंत्री के सामने रखेगा.
बिल में ऐसा क्या है?
असल में इस बिल के जरिये विदेशी फंड लेने वाले NGO पर अब सरकार की सीधी नजर होगी. इस संशोधन बिल के तहत केंद्र सरकार विदेशी चंदा पाने वाले गैर सरकारी संगठनों यानी NGO के लिए नियमों को और कड़ा करने जा रही है. इसके लिए विदेशी अंशदान नियमन कानून यानी FCRA में संशोधन का बिल सोमवार को लोकसभा में पेश किया जा सकता है.
सरकार से जुड़े सांसदों और सूत्रों का कहना है कि विदेशी पैसा लेने वाले संगठनों की जिम्मेदारी और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए यह बदलाव जरूरी हैं. हालांकि विपक्ष इस बिल का विरोध कर सकता है क्योंकि उनका मानना है कि इससे NGO के काम करने की आजादी पर असर पड़ सकता है. फिर भी सरकार को भरोसा है कि सदन में यह बिल आसानी से पास हो जाएगा.
नए बिल के प्रावधानों को आसान भाषा में समझिए...
1. नए बिल में सबसे बड़ा बदलाव एक नई संस्था बनाने का है जिसे नामित प्राधिकरण कहा जाएगा.
2. अगर किसी संस्था का FCRA रजिस्ट्रेशन रद्द होता है, खुद सरेंडर करती है या रिन्यू नहीं होता, तो उसका विदेशी फंड और उससे बनी संपत्ति इसी प्राधिकरण के पास चली जाएगी.
3. सरकार चाहे तो यह संपत्ति किसी विभाग को दे सकती है या बेच सकती है, और बिक्री का पैसा सरकारी खजाने में जमा होगा.
4. रजिस्ट्रेशन की अवधि खत्म होने पर वह अपने आप रद्द माना जाएगा.
5. विदेशी फंड कितने समय तक रखा और खर्च किया जा सकता है, इसकी समय सीमा भी तय होगी.
6. सस्पेंशन के दौरान संस्था अपनी संपत्ति बेच या ट्रांसफर नहीं कर सकेगी.
7. FCRA मामलों में जांच अब सरकार की इजाजत के बिना शुरू नहीं होगी.
8. सजा को घटाकर पांच साल से एक साल कर दिया गया है.
9. नियम तोड़ने पर डायरेक्टर, ट्रस्टी और पदाधिकारी भी जिम्मेदार माने जाएंगे.
10. संस्था बंद होने या निष्क्रिय होने पर उसकी संपत्ति स्थायी रूप से सरकार के पास चली जाएगी.