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दिल्ली के 'संकटमोचक' अब केरल के 'सारथी', वेणुगोपाल बनेंगे असंतोष का परमानेंट इलाज

केरल में दस साल के बाद कांग्रेस सत्ता में लौटी है, लेकिन मुख्यमंत्री का फैसला करने में उसे पसीने छूट गए हैं. सीएम की रेस में कई नेताओं के नाम चल रहे हैं, लेकिन राहुल गांधी के राइट हैंड माने जाने वाले केसी वेणुगोपाल के नाम पर मोहर लगती है तो दिल्ली से लेकर केरल तक के समीकरण साधे जा सकते हैं.

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राहुल गांधी और केसी वेणुगोपाल की सियासी केमिस्ट्री (Photo-X)
राहुल गांधी और केसी वेणुगोपाल की सियासी केमिस्ट्री (Photo-X)

केरल में मुख्यमंत्री पद को लेकर कांग्रेस के भीतर जारी सस्पेंस खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. विधानसभा चुनाव में बहुमत मिलने के बावजूद कांग्रेस अब तक मुख्यमंत्री के नाम पर फाइनल मुहर नहीं लगा सकी.  तिरुवनंतपुरम की सड़कों से लेकर दिल्ली तक एक ही सवाल है कि केरल का मुख्यमंत्री कौन बनेगा? 

दिल्ली दरबार में केरल सीएम का मामला पहुंच चुका है. कांग्रेस हाईकमान मंगलार को केरल के सीएम के नाम पर सहमति बनाने के लिए बड़ी बैठक करेंगे. मुख्यमंत्री के लिए तीन बड़े नेताओं के नाम सबसे आगे चल रहे हैं, जिसमें रमेश चेन्निथला, वीडी सतीशन और केसी वेणुगोपाल के नाम चल रहे हैं. 

वीडी सतीशन केरल की राजनीति के मंझे खिलाड़ी हैं तो केसी वेणुगोपाल दिल्ली और  तिरुवनंतपुरम की सियासत में फिट बैठते हैं. राहुल गांधी के 'दाहिने हाथ' और संगठन के सबसे बड़े 'ट्रबलशूटर' कहे जाने वाले केसी वेणुगोपाल को मुख्यमंत्री बनाकर क्या दिल्ली से लेकर केरल तक के समीकरण को सिर्फ साधने नहीं बल्कि पार्टी के असंतोष का भी परमानेंट इलाज करने की है? 

कांग्रेस किसे बनाएगी केरल का मुख्यमंत्री
केरल की सत्ता में कांग्रेस दस साल के बाद सत्ता में लौटी है, लेकिन मुख्यमंत्री का नाम पर पार्टी कशमकश में फंसी हुई है. कांग्रेस ने मुख्यमंत्री के नाम चुनने के लिए  अजय माकन और मुकुल वासनिक को पर्यवेक्षक बनाकर केरल भेजा था. दोनों नेताओं ने कांग्रेस विधायकों से मुलाकात कर उनकी राय ली थी.

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सीएम पद के लिए रमेश चेन्निथला, वीडी सतीशन और केसी वेणुगोपाल के नाम सामने आए. इसके बाद तीनों दावेदारों और केपीसीसी अध्यक्ष सनी जोसेफ के साथ भी अलग-अलग बातचीत हुई, लेकिन अभी तक किसी एक नाम पर सहमति नहीं बन पाई है. वी डी सतीशन को जमीनी स्तर पर यूडीएफ कार्यकर्ताओं और सहयोगी दल IUML का अच्छा समर्थन मिल रहा है. 

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वहीं, केसी वेणुगोपाल खेमे का कहना है कि उन्हें अधिकांश विधायकों और कई सांसदों का समर्थन हासिल है. हालांकि, वेणुगोपाल के नाम पर एक बड़ी चिंता यह भी बताई जा रही है कि मुख्यमंत्री बनने की स्थिति में दो उपचुनाव कराने पड़ सकते हैं. इसके अलावा रमेश चेन्निथला खेमा उनके लंबे राजनीतिक अनुभव और पार्टी के प्रति निष्ठा को बड़ा आधार बता रहा है.

कांग्रेस हाईकमान के पाले में आई गेंद
कांग्रेस नेतृत्व किसी भी गुट में नाराजगी नहीं चाहता. यही वजह है कि हाईकमान लगातार अलग-अलग नेताओं से राय लेकर व्यापक सहमति बनाने की कोशिश कर रहा है. कांग्रेस नेतृत्व यह सुनिश्चित करना चाहता है कि मुख्यमंत्री के नाम के ऐलान के बाद पार्टी में किसी तरह अंदरूनी कलह खुलकर सामने न आए.
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केरल मुख्यमंत्री का फैसला अब दिल्ली दरबार तक पहुंच गया है. दिल्ली में मंगलवार शाम होने वाली बैठकों के बाद मुख्यमंत्री के नाम का एलान जल्द किया जा सकता है, हालांकि अंतिम निर्णय पूरी तरह कांग्रेस हाईकमान पर निर्भर करेगा, लेकिन कांग्रेस के महासचिव और राहुल गांधी करीबी केसी वेणुगोपाल के नाम की चर्चा है. माना जा रहा है कि वेणुगोपाल के जरिए कांग्रेस केरल की राजनीति में कई जटिल समीकरण साधने की कोशिश कर रही है.

असंतोष का इलाज बनेंगे कांग्रेस के वेणुगोपाल
केरल कांग्रेस दशकों से कई ध्रुवों में बंटी हुई है, जिसमें एक गुट रमेश चेन्निथला का है तो दूसरा वीडी सतीशन का है. ये दोनों ही केरल की राजनीति में पूरी तरह सक्रिय हैं. तीसरा गुट केसी वेणुगोपाल का माना जाता है. सतीशन और चेन्निथला की आपसी खींचतान के बीच वेणुगोपाल एक ऐसे 'न्यूट्रल अंपायर' की तरह हैं, जिन्हें हाईकमान का पूरा वरदहस्त प्राप्त है.

केसी वेणुगोपाल के नाम पर मुहर लगाकर कांग्रेस उस आंतरिक कलह को खत्म करना चाहती है, जिसने अक्सर पार्टी की जीत को हार में बदला है. वेणुगोपाल को दिल्ली हाईकमान का करीबी माना जाता है, खासकर राहुल गांधी. ऐसे में वेणुगोपाल दिल्ली (हाईकमान) और तिरुवनंतपुरम (स्थानीय नेतृत्व) के बीच एक मजबूत कड़ी का काम कर सकते हैं. 

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वेणुगोपाल को केरल भेजने का मतलब यह भी है कि दिल्ली में महासचिव संगठन का पद खाली होगा. इससे राहुल गांधी को एआईसीसी में नए चेहरों और नई ऊर्जा को शामिल करने का मौका मिलेगा. इसके अलावा दिल्ली में जो कांग्रेसी वेणुगोपाल को लेकर असहज होते हैं, उनके लिए भी रास्ता खुलेगा. वेणुगोपाल का केरल जाना सिर्फ एक राज्य का भला नहीं करेगा, बल्कि दिल्ली में रुकी हुई सांगठनिक सर्जरी को भी रफ्तार देगा.

केरल पर राहुल गांधी का 'डायरेक्ट कंट्रोल'
केसी  वेणुगोपाल को मुख्यमंत्री बनाया जाता है तो इस बात का भी संकेत होगा कि राहुल गांधी अब केरल को कांग्रेस के लिए बीजेपी की तर्ज पर 'गुजरात' बनाना चाहते हैं. एक ऐसा राज्य जो संगठन और फंड दोनों के मामले में पार्टी की रीढ़ बने.केसी वेणुगोपाल के जरिए दिल्ली का सीधा नियंत्रण तिरुवनंतपुरम पर होगा. 

वेणुगोपाल को मुख्यमंत्री बनाने का मतलब है कि केरल की सत्ता की चाबी सीधे तौर पर दिल्ली हाईकमान के हाथ में होगी. इससे केंद्र सरकार (भाजपा) के साथ टकराव के मुद्दों पर कांग्रेस अधिक रणनीतिक तरीके से काम कर पाएगी. केसी वेणुगोपाल का राष्ट्रीय स्तर पर संगठनात्मक अनुभव (कर्नाटक और अन्य राज्यों का प्रबंधन) केरल में 'डबल इंजन' जैसी कार्यक्षमता के काम आ सकती है.

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वेणुगोपाल के जरिए न केवल केंद्र के साथ राज्य के टकरावों में एक राष्ट्रीय नजरिया दिखेगा, बल्कि केरल सरकार के द्वारा बनाई जाने वाली योजनाओं को 'नेशनल मॉडल' के रूप में पेश करने में आसानी होगी. राहुल गांधी की सियासी मॉडल को भी जमीन पर उतारना आसान हो जाएगा. 

'कन्नूर' के गढ़ में माकपा को घेरेगी कांग्रेस
केरल की सियासी में कन्नूर का वही राजनीतिक महत्व है जो यूपी में इटावा या सैफई का. यह मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और माकपा का पावर सेंटर है. केसी वेणुगोपाल इसी क्षेत्र से आते हैं. बीजेपी ने जिस तरह 'ममता को हराने के लिए शुभेंदु अधिकारी' को लाई, उसी तर्ज पर कांग्रेस वेणुगोपाल पर दांव खेलकर माकपा के सबसे मजबूत किले में सेंध लगा सकती है.  केरल में कद्दावर चेहरे को मुख्यमंत्री बनाकर कांग्रेस वामपंथियों के 'कैडर वोट' को चुनौती देना चाहती है।.

नायर, ईसाई, मुस्लिम को साधने का दांव 
केरल की सियासत पूरी तरह से तीन स्तंभों पर टिकी है, जिसमें एक नायर कम्युनिटी, दूसरा ईसाई समुदाय और तीसरा मुस्लिम समाज है. वेणुगोपाल नायर समुदाय से आते हैं. पिछले कुछ सालों में भाजपा ने इस समुदाय में पैठ बनाई थी, लेकिन वेणुगोपाल के मुख्यमंत्री बनने से नायर सर्विस सोसाइटी (NSS) का झुकाव फिर से कांग्रेस की ओर किया जा सकता है. 

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मुस्लिम लीग (IUML) जैसे घटक दल हमेशा एक ऐसे मुख्यमंत्री के साथ सहज होते हैं, जिसकी दिल्ली में धमक हो. वेणुगोपाल का कद इतना बड़ा है कि सहयोगी दलों के बीच उनकी बात पत्थर की लकीर मानी जाएगी. इसके अलावा वेणुगोपाल आसानी से ईसाई समुदाय को भी साधकर रख सकते हैं, क्योंकि कन्नूर के इलाके में ईसाई वोटर अच्छी खासी संख्या में है. 

वेणुगोपाल के जरिए बीजेपी का काउंटर
केरल में भाजपा का ग्राफ धीरे-धीरे बढ़ रहा है. भाजपा अक्सर कांग्रेस पर 'अल्पसंख्यक तुष्टीकरण' का आरोप लगाती है. एक सौम्य और धार्मिक छवि वाले हिंदू नेता (वेणुगोपाल) को मुख्यमंत्री बनाकर कांग्रेस भाजपा के उस नैरेटिव को कुंद करना सकती है. ये कांग्रेस का 'सॉफ्ट हिंदुत्व' और 'सोशल इंजीनियरिंग' का एक ऐसा कॉकटेल बन सकता है, जो बहुसंख्यक और अल्पसंख्यक दोनों को एक साथ जोड़ सकता है.

हालांकि, रास्ता इतना आसान भी नहीं है. रमेश चेन्निथला और सतीशन जैसे कद्दावर नेता, जो सालों से सीएम पद का सपना देख रहे हैं, उनकी नाराजगी कांग्रेस के लिए सिरदर्द बन सकती है. वेणुगोपाल पर 'पैराशूट सीएम' का ठप्पा लगाने की कोशिश माकपा जरूर करेगी, लेकिन कांग्रेस एक तीर से कई राजनीतिक समीकरण साधना चाहती है. अब देखना है कि दिल्ली के वेणुगोपाल क्या केरल के भाग्य विधाता बनेंगे? 

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