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चप्पल पहनने वाले हूतियों ने यमन को दिया गच्चा! AI क्लोन से बनाई आर्मी जनरल की आवाज

यमन में ईरान समर्थित हूती लड़ाकों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग कर जनरल तारेक सालेह की आवाज क्लोन करके फर्जी ऑडियो जारी किया, जिससे यूएई समर्थित सैनिक पीछे हट गए और मोखा बंदरगाह पर कब्जा हो गया.

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हूती लड़ाकों ने बंदरगाह पर किया क्बजा. (Image: Social Media)
हूती लड़ाकों ने बंदरगाह पर किया क्बजा. (Image: Social Media)

यमन में ईरान समर्थित हूती लड़ाकोंने गुरुवार को भीषण लड़ाई के बाद लाल सागर तट पर स्थित रणनीतिक बंदरगाह शहर मोखा पर कब्जा कर लिया. यूएई समर्थित नेशनल रेजिस्टेंस फोर्सेज के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल तारेक सालेह के सैनिकों ने पीछे हटने का फैसला किया. इस हमले के दौरान हूती लड़ाकों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल कर जनरल सालेह की आवाज को क्लोन किया. सैनिकों में भ्रम फैलाने और मनोबल गिराने के लिए फर्जी ऑडियो जारी कर पीछे हटने का संदेश जारी किया. इसके जरिए हूती लड़ाकों ने जमीन पर तेजी से बढ़त बना ली.

यमन के युद्ध के मैदान में चप्पल पहने नजर आने वाले हूती लड़ाकों ने अपने पारंपरिक हथियारों के साथ एआई तकनीक को शामिल किया है. ईरानी मिसाइलों और ड्रोनों से लैस हूती लड़ाकों ने मोखा पर कब्जा करने के लिए डिजिटल हथियार का सहारा लिया. भीषण गोलाबारी के बीच सैनिकों को लगा कि उनके कमांडर ने पीछे हटने का फरमान सुनाया है.

लेफ्टिनेंट जनरल तारेक सालेह पूर्व यमनी राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला सालेह के भतीजे हैं. उनकी सेना ने आरोप लगाया कि हूतियों ने जवानों को भ्रमित करने और उनका मनोबल तोड़ने के लिए जनरल की आवाज का क्लोन तैयार किया. मोखा स्थित सेटेलाइट टेलीविजन चैनल अलजम्हूरिया टीवी ने इस बात की पुष्टि की कि अंसार अल्लाह यानी हूतियों ने ये साजिश रची.

बाब अल मंदेब और होर्मुज में दोहरा खतरा

मोखा लाल सागर तट पर बाब अल-मंदेब के करीब स्थित है जो दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है. साल 2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से हुए सीजफायर के बाद ये हूतियों की सबसे बड़ी क्षेत्रीय बढ़त मानी जा रही है. मोखा सालेह की सेना का मुख्य ठिकाना था.

मोखा पर हूतियों के आने से लाल सागर, अदन की खाड़ी और हिंद महासागर को जोड़ने वाले जलमार्ग के बंद होने का खतरा बढ़ गया है. होर्मुज में समुद्र व्यापार पहले से ही खतरे में है. ऐसे में इन दोनों प्रमुख समुद्री मार्गों पर (चोकपॉइंट्स) रुकावट आने से दुनिया भर में तेल आपूर्ति और एशिया-यूरोप व्यापार बुरी तरह प्रभावित हो सकता है.

अरबी भाषा में सालेह के नाम से प्रसारित ऑडियो में कहा गया, 'वीरों, इन नौजवानों ने सीखा है कि लड़ाई में पासा कभी भी पलट सकता है. युद्ध में आगे बढ़ने और पीछे हटने, दोनों की जरूरत होती है. कुछ दिन आपके पक्ष में होते हैं तो कुछ नहीं और इसमें कोई शर्म की बात नहीं है. हमारे पास रिजर्व बल, अतिरिक्त ताकत और लड़ाई जारी रखने के लिए सैनिक मौजूद हैं.'

इस रिकॉर्डिंग को सोशल मीडिया पर यमनी एक्टिविस्ट अदेल अल-हसनी ने शेयर किया. ये जानकारी 'बाशा रिपोर्ट' के एक आकलन के अनुसार है जो एक्स पर ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस और संघर्ष-निगरानी करने वाला एक अकाउंट है. इसके प्रसार से इस संदेश को काफी लोगों तक पहुंचने में मदद मिली, खासकर ऐसे वक्त में जब सैनिक युद्ध के मैदान में दबाव में थे और मोचा की सुरक्षा व्यवस्था की स्थिति को लेकर विरोधाभासी खबरें आ रही थीं.

वहीं, इस कथित ऑडियो ऑपरेशन के साथ-साथ एक और मनोवैज्ञानिक कदम था. 'बाशा रिपोर्ट' के अनुसार, 10 सितंबर को तड़के करीब 2 बजे, हूति सेना ने पश्चिमी तट पर तैनात सैनिकों को संदेश भेजे. इन संदेशों में उन लोगों को माफी देने की पेशकश की गई जो अपने हथियार डाल देंगे, आत्मसमर्पण कर देंगे और घर लौट जाएंगे.

ऐसा लगता है कि ऑडियो और संदेशों का मकसद सरकार समर्थक सैनिकों को ये विश्वास दिलाना था कि उनका प्रतिरोध (रेजिस्टेंस) टूट रहा है और पीछे हटना या आत्मसमर्पण करना ही उनके लिए सबसे सुरक्षित विकल्प है. हालांकि न तो इन संदेशों की और न ही सैनिकों पर इनके कथित असर की स्वतंत्र रूप से पुष्टि की गई है.

इसके बाद 'नेशनल रेजिस्टेंस' के मिलिट्री मीडिया ने हूतियों पर सालेह के नाम से ऑडियो क्लिप बनाने का आरोप लगाया. 'अल-जुमहुरिया टीवी' ने इसे 'जनमत को गुमराह करने और मनोबल पर असर डालने की एक नाकाम कोशिश' करार दिया.

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एंथ्रोपिक के क्लॉड AI का हथियारों में इस्तेमाल

ऑडियो विवाद के साथ ये खुलासा भी हुआ कि उत्तरी यमन में हूती एडवांस एआई का इस्तेमाल कर रहे हैं. एंथ्रोपिक कंपनी की 154 पन्नों की थ्रेट इंटेलिजेंस रिपोर्ट के अनुसार, लड़ाकों ने गाइडेड मिसाइलों के सॉफ्टवेयर विकसित करने के लिए क्लॉड एआई का इस्तेमाल करने की कोशिश की. रिपोर्ट में इस बात का विस्तार से ब्योरा दिया गया है.

मिसाइल गाइडेंस-हाइपरसोनिक प्रोजेक्ट्स का खुलासा

रिपोर्ट में बताया गया कि एक गाइडेड रॉकेट और 2,000 किलोमीटर से ज्यादा मारक क्षमता वाली मल्टी-स्टेज बैलिस्टिक मिसाइल के लिए कोड का इस्तेमाल किया गया. इसमें आर2000 मिसाइल परिवार शामिल है, जिसमें हाइपरसोनिक-ग्लाइड वैरिएंट भी शामिल है. हालांकि, कंपनी ने सीधे हूतियों का नाम नहीं लिया, लेकिन विवरण यमन के शिया गुट की ओर इशारा करते हैं.

डिजिटल हथियार और पारंपरिक जंग का खतरनाक मेल

मोखा के इस पूरे घटनाक्रम ने साबित कर दिया है कि चप्पल पहनने वाले लड़ाके भी पारंपरिक मैदानी जंग के साथ डिजिटल तकनीक को जोड़ सकते हैं. एडवांस हथियारों से लैस सेना के बीच दहशत और भ्रम फैलाकर उन्हें पीछे हटने पर मजबूर किया जा सकता है. युद्ध का ये नया रूप अब गंभीर सामरिक चिंता बन चुका है.

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