जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई का मामला सुप्रीम कोर्ट में है. दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर अत्यधिक बल प्रयोग के आरोपों से इनकार करते हुए कोर्ट में जवाबी हलफनामा दाखिल किया है. पुलिस का कहना है कि शुरुआत में प्रदर्शन शांतिपूर्ण था, लेकिन बाद में भीड़ अनियंत्रित हो गई. कई स्तरों की बैरिकेडिंग तोड़कर संसद की ओर बढ़ने की कोशिश की गई.
डीसीपी सचिन शर्मा की तरफ से दाखिल हलफनामे में कहा गया है कि हालात बिगड़ने के बाद प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए उपलब्ध और वैध तरीकों का इस्तेमाल किया गया. पुलिस के मुताबिक, भीड़ के हिंसक और अनियंत्रित होने के बाद ही चरणबद्ध तरीके से बल प्रयोग किया गया.
यह भी पढ़ें: 'हां सीवान में AK-47 से हुई थी फायरिंग, जवान ट्रैप...', सुप्रीम कोर्ट में बिहार सरकार का कुबूलनामा
यह जवाब उन याचिकाओं के संबंध में दाखिल किया गया है, जिनमें कथित पुलिस ज्यादती की कोर्ट की निगरानी में जांच कराने की मांग की गई है. इसे चार संबंधित याचिकाओं में साझा जवाब के तौर पर भी पेश किया गया है.
केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस से एससी ने पूछे सवाल
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शनकारियों की पहचान और पुलिस की कार्रवाई से जुड़े दूसरे मुद्दों पर भी केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा है. पुलिस द्वारा सोशल मीडिया पर आरोपियों की तस्वीरें और वीडियो पोस्ट करने के खिलाफ दाखिल याचिका पर भी कोर्ट ने नोटिस जारी किया है.
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान सोशल मीडिया पर ऐसे कंटेंट को नियंत्रित करने की चुनौती पर सवाल उठाया. कोर्ट ने कहा कि समस्या यह है कि इसे कंट्रोल कैसे किया जाए, क्योंकि सोशल मीडिया की कोई सीमारेखा नहीं है.
फेशियल रिकग्निशन पर भी एससी ने मांगा जवाब
याचिकाकर्ताओं की तरफ से वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को भी मामले में पक्षकार बनाया गया है. उन्होंने बताया कि अलग-अलग हाईकोर्ट्स ने इस संबंध में कुछ दिशानिर्देश जारी किए हैं और याचिका में उन्हें लागू कराने की मांग की गई है.
यह भी पढ़ें: 45 फीसदी सांसदों पर क्रिमिनल केस, 14 मुख्यमंत्रियों पर भी कई मुकदमें, सुप्रीम कोर्ट में रिपोर्ट पेश
वहीं, जंतर-मंतर प्रदर्शनकारियों की फेशियल रिकग्निशन तकनीक से पहचान किए जाने के आरोप पर भी सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. पिछली सुनवाई में आरोप लगाया गया था कि प्रदर्शनकारियों की पहचान के लिए फेशियल रिकग्निशन का इस्तेमाल किया गया और इससे जुड़ा डेटा निजी कंपनियों के पास रखा जा रहा है. अब इन आरोपों पर भी पुलिस और केंद्र का जवाब महत्वपूर्ण होगा.