उत्तर भारत भीषण गर्मी की चपेट में है. कहीं बिजली का संकट है तो कहीं पानी का. देश की राजधानी के कई इलाके भी पानी का संकट झेल रहे हैं. दक्षिण दिल्ली के दक्षिणपुरी इलाके में सैंकड़ों लोग भीषण जल संकट झेल रहे हैं. बड़ी बात ये है कि समस्या दो चार दिन या सप्ताह की नहीं है बल्कि महीने से अधिक गुजर चुके हैं.
दक्षिणपुरी के ब्लॉक 10 और 11 समेत आसपास के इलाकों में पिछले करीब एक महीने से पानी की किल्लत है. घर के नल सूख चुके हैं और पानी के लिए लोगों को संघर्ष करना पड़ रहा है. हालात इतने खराब हैं कि कई परिवारों को नहाने और घरेलू कामों के लिए भी पानी नहीं मिल पा रहा. लोग बिना नहाए धोए दफ्तर जाने पर मजबूर हैं तो बच्चे बिना नहाए धोए स्कूल. महिलाओं और बीमारों के लिए स्थिति बेहद दयनीय है.
स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले एक महीने से पानी का संकट है लेकिन सुनाई नहीं है. इलाको के कुछ घरों में पानी के नए कनेक्शन भी लगे हैं और उन घरों में जहां कहीं पानी आता है, वो नाले के पानी सा काला या बदबूदार है.
आज तक की टीम ने इलाके के एक घर में आ रहे सप्लाई के पानी के रियल्टी चेक किया. पानी का रंग बेहद काला और बदबू इतनी की घर में खड़ा होना मुस्किल था. घर के बच्चे कंधों पर पानी के डब्बे उठाकर दूर से पानी भर कर लाते हैं ताकि जरूरत पूरी हो सके.
सरकार ने कहा था कि पानी का संकट नहीं होगा, भले ही टैंकर से पानी देना पड़े. लोग कहते हैं टैंकर तो आते हैं लेकिन वो सरकारी नहीं निजी हैं जिनके लिए 1500 रुपए की कीमत चुकानी पड़ती है.
भीषण गर्मी ने संकट को और गंभीर बना दिया है. दिल्ली में तापमान 45 डिग्री के पार है तो पानी की जरूर बढ़ी है लेकिन राजधानी का एक इलाका ऐसा है जहां पीने का पानी भी मुहैया नहीं है.
देवली और दक्षिण दिल्ली के आसपास कई इलाकों में इस समय पानी की किल्लत की शिकायतें सामने आ रही हैं. देवली के साथ जिन इलाकों में इस मौसम में हर साल पानी की समस्या समस्या आती है उसमें संगम विहार, दक्षिणपुरी, आंबेडकर नगर, खानपुर, तिगड़ी, मदनगीर, तुगलकाबाद एक्सटेंशन, कालकाजा के कुछ हिस्से, बदरपुर बॉर्डर के आसपास की कॉलोनियां शामिल हैं. इन इलाकों को वाटर स्ट्रेस जोन कहा जाता है.
स्थानीय लोगों का कहना है कि छोटे-छोटे बच्चे अपने कंधों पर भारी पानी के डिब्बे उठाकर घर की ज़रूरतें पूरी करने में लगे रहते हैं. ब्लॉक 10 में रहने वाली लगभग 20 साल की सरोज एक हाथ में खाली पानी की बोतल और दूसरे हाथ में गंदे कपड़ों से भरा पीला बैग लेकर अपनी बहन के घर जा रही हैं, क्योंकि वहां पानी उपलब्ध है. वह बताती हैं कि वहीं कपड़े धोएंगी और पीने का पानी भी भरकर वापस लाएंगी.
पानी की समस्या से नाराज लोगों ने हाल ही में प्रदर्शन भी किया और सड़कें तक जाम कर दीं, लेकिन उनका कहना है कि अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला. सबसे ज्यादा असर उन घरों पर पड़ रहा है जहां बुज़ुर्ग और महिलाएं रहती हैं. परिवार के कामकाजी सदस्य जैसे ही काम पर निकलते हैं, वे पानी के लिए दूसरों पर निर्भर हो जाते हैं.
भीषण गर्मी ने इस संकट को और बढ़ा दिया है. दिल्ली में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस पार कर चुका है, जिससे पानी की मांग तेजी से बढ़ी है. दिल्ली सरकार का दावा है कि किसी भी इलाके में पानी की कमी नहीं होने दी जाएगी और जहां जरूरत होगी, वहां टैंकर भेजे जाएंगे लेकिन जमीनी हकीकत सूखे नल और घरों में रखे खाली पानी के बर्त, इन दावों पर सवाल खड़े करती है.