अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार, 2 फरवरी को भारत के साथ एक अहम व्यापार समझौते (Trade Deal) का ऐलान किया है. इस समझौते के तहत अमेरिका ने भारतीय सामानों पर लगने वाले कुल 50 फीसदी टैरिफ को घटाकर तत्काल प्रभाव से 18% कर दिया है. ट्रंप ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी 30 मिनट की बातचीत के बाद यह फैसला लिया गया.
भारत ने रूसी तेल की खरीद बंद करने और इसके बजाय अमेरिका और संभावित रूप से वेनेजुएला से ज्यादा तेल खरीदने पर सहमति जताई है. इसके अलावा, भारत ने अगले कुछ साल में अमेरिका से 500 अरब डॉलर के ऊर्जा, तकनीक, कृषि उत्पाद और कोयला खरीदने की प्रतिबद्धता भी दिखाई है.
पीएम मोदी ने इस ऐलान का स्वागत करते हुए इसे 'मेड इन इंडिया' उत्पादों के लिए बड़ी जीत बताया और कहा कि यह सहयोग दोनों लोकतंत्रों के लिए विकास के नए द्वार खोलेगा.
यूएस एंबेसडर ने जताई थी उम्मीद...
सर्जियो गोर ने 12 जनवरी को पद संभालने के बाद ही बेहद सकारात्मक बयान दिया था. उन्होंने कहा था कि डील पर चर्चा की जाएगी. उन्होंने यह भी कहा था कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और भारतीय PM नरेंद्र मोदी के बीच दोस्ती सच्ची है और सच्चे दोस्त असहमत हो सकते हैं, लेकिन आखिर में वे हमेशा अपने मतभेदों को सुलझा लेंगे.
गोर की यह बयान कुछ ही दिन बाद दिया था, जब कुछ अमेरिकी अधिकारियों ने डील पर साइन करने में देरी के लिए भारत को ज़िम्मेदार ठहराया था, जिसे दिल्ली ने नकार दिया था. हालांकि, दोनों देशों के बीच टैरिफ पर गहमागहमी पिछले साल अप्रैल से शुरू हुई थी.
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अप्रैल से अगस्त तक... टैरिफ वॉर की टाइमलाइन
भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड विवाद की शुरुआत पिछले साल अप्रैल में हुई थी, जो धीरे-धीरे बढ़ती गई.
2 अप्रैल 2025: अमेरिका ने कई भारतीय आयातों पर 26% 'रेसीप्रोकल टैरिफ' लगाया.
10 अप्रैल 2025: ट्रंप ने इन टैरिफ को 90 दिनों के लिए रोक दिया, लेकिन सभी अमेरिकी आयातों पर 10% शुल्क बरकरार रखा.
31 जुलाई 2025: ट्रंप ने भारतीय सामानों पर 25% टैरिफ का ऐलान किया और रूसी तेल खरीदने पर दंड की चेतावनी दी.
7 अगस्त 2025: भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद जारी रखने पर ट्रंप ने टैरिफ बढ़ाकर 50% कर दिया. यह किसी भी अमेरिकी व्यापारिक भागीदार पर लगाया गया सबसे अधिक शुल्क था.
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रूसी तेल छोड़ अमेरिका से खरीदेगा भारत
इस डील का सबसे अहम हिस्सा भारत की एनर्जी पॉलिसी में बदलाव है. ट्रंप के मुताबिक, भारत अब रूस से कच्चा तेल खरीदना बंद कर देगा, जिसे अमेरिका यूक्रेन युद्ध की फंडिंग रोकने की दिशा में एक बड़ा कदम मान रहा है. इसके बदले भारत अमेरिकी ऊर्जा संसाधनों में भारी इन्वेस्टमेंट करेगा. राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि भारत ने अपने व्यापारिक अवरोधों (Non-Tariff Barriers) को जीरो करने का भी वादा किया है, जिससे अमेरिकी कंपनियों को भारतीय बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी.