scorecardresearch
 

रजिस्ट्रेशन-लैंड सर्वे के निजीकरण पर भड़के अंबुमणि रामदास, कहा- 'जनता की जेब पर पड़ेगा भारी'

रजिस्ट्रेशन और जमीन सर्वे के प्राइवेटाइजेशन पर PMK अध्यक्ष अंबुमणि रामदास ने सरकार को घेरा है. उन्होंने आरोप लगाया कि निजीकरण से जनता की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा और कर्मचारियों की नौकरियों पर संकट आएगा. साथ ही उन्होंने सरकार को चेताया कि इससे भ्रष्टाचार का खतरा भी बढ़ सकता है.

Advertisement
X
रजिस्ट्रेशन-लैंड सर्वे के निजीकरण पर अंबुमणि ने सरकार को घेरा है (Photo-File)
रजिस्ट्रेशन-लैंड सर्वे के निजीकरण पर अंबुमणि ने सरकार को घेरा है (Photo-File)

तमिलनाडु में जमीन और दस्तावेजों से जुड़े काम को लेकर सियासत गरमा गई है. PMK अध्यक्ष डॉ. अंबुमणि रामदास ने राज्य सरकार के रजिस्ट्रेशन और जमीन सर्वे सेवाओं को निजी हाथों में देने की कोशिश का विरोध किया है. उन्होंने सरकार से इस योजना को तुरंत वापस लेने की मांग की और आरोप लगाया कि इससे आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा, साथ ही इससे सरकारी कर्मचारियों की नौकरियों पर भी संकट खड़ा हो सकता है.

रामदास ने कहा कि सरकार ने पांच मॉडल डॉक्यूमेंट रजिस्ट्रेशन सेंटर शुरू करने के लिए निजी संस्थाओं से टेंडर मांगे हैं. ये सेंटर चेन्नई के अंबत्तूर, तिरुवन्मियूर और टी. नगर के अलावा चेंगलपट्टू और कोयंबटूर में प्रस्तावित हैं.

इन केंद्रों को शॉपिंग मॉल में बनाने और एयर कंडीशनिंग जैसी सुविधाएं देने की बात कही गई है. दावा है कि यहां लोग लंबी कतार में लगे बिना दस्तावेजों का रजिस्ट्रेशन करवा सकेंगे. योजना सफल होने पर 20 और केंद्र शुरू किए जाने की बात कही गई है. रामदास के मुताबिक, निजी कंपनियां लोगों से नियमित रजिस्ट्रेशन शुल्क के अलावा 2,090 से 10,630 रुपये तक सर्विस चार्ज ले सकेंगी. उन्होंने इसे जनता पर अतिरिक्त बोझ बताया है.

यह भी पढ़ें: झारखंड: सारथी योजना पर सियासत तेज, BJP ने हेमंत सरकार से मांगा हिसाब

‘सरकार अपने दफ्तरों में ही दे बेहतर सुविधा’

Advertisement

PMK अध्यक्ष ने कहा कि तमिलनाडु में पहले से 595 रजिस्ट्रेशन ऑफिस और 56 रजिस्ट्रेशन जिले हैं. ऐसे में निजी केंद्रों की जरूरत पर उन्होंने सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि अगर सरकार का मकसद लोगों को बेहतर सुविधा देना है तो मौजूदा सरकारी दफ्तरों को ही बेहतर बनाया जा सकता है. रामदास ने दावा किया कि रजिस्ट्रेशन विभाग चालू वित्त वर्ष में दस्तावेजों के रजिस्ट्रेशन से करीब 35,109 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाने का अनुमान है. उनका कहना है कि इस रकम का सिर्फ एक प्रतिशत खर्च करके भी सरकारी दफ्तरों में बेहतर सुविधाएं दी जा सकती हैं.

जमीन सर्वे करने वाले कर्मचारियों की नौकरी पर भी सवाल

रामदास ने जमीन सर्वे विभाग के अस्थायी कर्मचारियों को लेकर भी चिंता जताई. उनके मुताबिक, करीब 23 हजार रुपये मासिक वेतन पर काम कर रहे अस्थायी सर्वेयर लंबे समय से नौकरी पक्की करने और वेतन बढ़ाने की मांग कर रहे हैं. उनका दावा है कि अधिकारियों से मुलाकात के दौरान कर्मचारियों को बताया गया कि जनवरी से पूरे तमिलनाडु में जमीन सर्वे का काम निजी कंपनियों को कॉन्ट्रैक्ट पर दिया जा सकता है और दिसंबर के अंत तक अस्थायी सर्वेयरों की सेवाएं खत्म की जा सकती हैं.

‘निजीकरण से भ्रष्टाचार बढ़ने का खतरा’

रामदास ने कहा कि जमीन सर्वे और दस्तावेज रजिस्ट्रेशन दोनों ही ऐसे काम हैं, जिनमें भ्रष्टाचार की शिकायतें सामने आती रही हैं. उनका दावा है कि अगर इन सेवाओं को निजी संस्थाओं को सौंपा गया तो गड़बड़ियों पर नियंत्रण और मुश्किल हो सकता है. अब देखना होगा कि सरकार इस सियासी विरोध के बीच प्रस्तावित मॉडल रजिस्ट्रेशन सेंटर और जमीन सर्वे के निजीकरण को लेकर क्या रुख अपनाती है.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement