सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने गुरुग्राम स्थित अस्पताल से अपना वीडियो मैसेज जारी किया है. इस वीडियो में वह कहते दिख रहे हैं कि 'मैं अभी जिंदा हूं. उन्होंने कहा कि मैं, मैं सरकार से विनती करता हूं कि वो बच्चों पर ताकत या बल का प्रयोग न करें. मुझे इस पर सरकार से आश्वासन चाहिए, अगर आश्वासन मिल जाए तो मैं आज ही अनशन तोड़ूंगा. अगर आश्वसन नहीं मिला तो मैं अनशन जारी रखूंगा.'
सोनम ने कहा- अनशन को 25 दिन बीत गए हैं लेकिन अभी तक जिंदा हूं. कुछ सांसद मुझसे मिलने आए, उन्होंने भूख हड़ताल खत्म करने की अपील की. मुझे अगर सरकार की तरफ से भरोसा मिले तो मैं आज ही अनशन खत्म करने को तैयार हूं. बस सरकार छात्रों के खिलाफ कार्रवाई न करें.
25 दिन में 11 किलो वजन कम- सोनम वांगचुक
सोनम वांगचुक ने कहा- 25वें दिन तक लगभग मेरा 11 किलो वजन कम हुआ है और काफी मांसपेशियां कम होने लगी है मगर ठीक ही हूं. कल मैं रात को यहां गुरुग्राम के एक निजी अस्पताल में लाया गया हूं सफदरजंग से. मैं दाद देना चाहता हूं उन सभी छात्रों को जिन्होंने इतने शांतिपूर्ण तरीके से खुद पर लाठियां खाते हुए वापस कोई हमला न करते हुए सब्र से काम लिया.
सोनम ने आगे कहा कि, 'हालांकि बहुत. उकसाने पर भी और कुछ तत्वों को पत्थर फेंकने के लिए लाए जाने पर भी आपने सब्र से काम लिया. छात्रों पर बहुत ही बर्बरता से हमले हो रहे थे इसलिए मैंने अपना अनशन जारी रखने का फैसला किया था. अब भी मेरे पास बहुत से नेतागण अनशन तोड़ने की अपील के साथ आए थे.'

'बच्चों पर न हो ताकत का प्रयोग'
इसमें शासक दल के मंत्री आए और सांसद भी. वे लगभग 65 हस्ताक्षरों के साथ यहां आकर अपील कर रहे हैं कि मैं अनशन तोड़ूं और वापस देश सेवा में लग जाऊं. मैं खुद भी ऐसा ही करना चाहता हूं. मेरे लिए मेरा काम बहुत जरूरी है. मगर मैं सरकार से विनती करता हूं कि वो और ऐसे ताकत बल का प्रयोग बच्चों पर न करें.
उन पर किसी तरह के आरोप या एफआईआर न हो, ताकि उन्हें जेल या पुलिस द्वारा सताया न जा सके. मुझे ये आश्वासन चाहिए और वो आश्वासन अगर जल्द मिल जाए तो मैं आप सब के और जो नेतागण यहां पर आए उनकी बातों की इज्जत करते हुए, अपना अनशन आज ही तोडूंगा. मगर अगर ऐसा कोई आश्वासन नहीं आए तो बदकिस्मती से मुझे ये अनशन जारी रखना पड़ेगा. जय हिंद.
सोनम वांगचुक की पत्नी ने क्या कहा?
वहीं इससे पहले सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की पत्नी डॉ. गीतांजलि आंगमो ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद सोनम वांगचुक को बेहतर इलाज के लिए सफदरजंग अस्पताल से यहां लाया गया था. अदालत ने स्पष्ट कहा था कि सोनम किसी हिरासत में नहीं हैं और उन्हें बेहतर इलाज तथा स्वतंत्र माहौल उपलब्ध कराया जाए, ताकि अस्पताल में पुलिस की मौजूदगी न रहे.
अस्पताल के बाहर भारी पुलिस बल क्यों?
डॉ. आंगमो ने कहा कि इसके बावजूद अस्पताल के बाहर भारी पुलिस बल तैनात है. उन्होंने इसे शर्मनाक बताते हुए कहा कि 25 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे एक भारतीय नागरिक को मानसिक शांति नहीं दी जा रही, बल्कि लगातार तनावपूर्ण माहौल में रखा जा रहा है. उन्होंने कहा कि कई सांसद सोनम वांगचुक से मिलने और उन्हें अनशन समाप्त करने का अनुरोध करने के लिए सभी सांसदों के हस्ताक्षर वाला पत्र लेकर आए हैं, लेकिन सरकार उन्हें मिलने की अनुमति नहीं दे रही है. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सरकार नहीं चाहती कि सोनम वांगचुक अपना अनशन समाप्त करें.
डॉ. आंगमो ने बताया कि सोनम वांगचुक ने आज सोशल मीडिया पर कहा है कि वह तभी अपना अनशन तोड़ेंगे, जब सांसद उनसे अनुरोध करेंगे और भारत सरकार यह आश्वासन देगी कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई गलत कार्रवाई नहीं की जाएगी. उन्होंने कहा कि यह आश्वासन कानूनी, शारीरिक या एफआईआर समेत किसी भी प्रकार की कार्रवाई न करने से जुड़ा होना चाहिए.