scorecardresearch
 

राम मंदिर ट्रस्ट, चढ़ावा और सिस्टम... 22 जुलाई की बैठक क्यों मानी जा रही है सबसे अहम?

राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के कथित मामले ने सिर्फ करोड़ों रुपये के हिसाब-किताब पर सवाल नहीं खड़े किए, बल्कि ट्रस्ट की पूरी प्रशासनिक व्यवस्था को भी कटघरे में ला दिया. अब ट्रस्ट के भीतर जिम्मेदारियां बदली जा रही हैं, पास जारी करने का सिस्टम नए हाथों में सौंपा जा रहा है और 22 जुलाई के बाद दर्शन से लेकर चढ़ावे तक कई व्यवस्थाओं में बड़े बदलाव की तैयारी है.

Advertisement
X
ट्रस्ट ने महंत दिनेंद्र दास के नाम से जारी की है नई डिजिटल आईडी. (Photo: ITG)
ट्रस्ट ने महंत दिनेंद्र दास के नाम से जारी की है नई डिजिटल आईडी. (Photo: ITG)

राम मंदिर में पिछले कुछ हफ्तों से प्रशासनिक बदलावों की भी चर्चा है. इसकी वजह है चढ़ावा गिनती में कथित अनियमितताओं की जांच और उसके बाद ट्रस्ट के भीतर शुरू हुआ बदलावों का दौर. ऐसे में सवाल है कि आखिर राम मंदिर में अब किसके पास सबसे अहम जिम्मेदारियां होंगी और महंत दिनेंद्र दास की भूमिका अचानक इतनी महत्वपूर्ण क्यों हो गई है?

सूत्रों के मुताबिक, श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने महंत दिनेंद्र दास की प्रशासनिक भूमिका बढ़ा दी है. उनके नाम से नई डिजिटल आईडी बनाई गई है, जिसके जरिए अब श्रद्धालुओं के लिए दर्शन पास जारी किए जा सकेंगे. वहीं, ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा की पहले इस्तेमाल हो रही पास जारी करने वाली आईडी को सस्पेंड कर दिया गया है. हालांकि, ट्रस्ट की ओर से इस बदलाव पर अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है.

दरअसल, जांच एजेंसियों की पड़ताल में कथित तौर पर सामने आया कि चढ़ावा प्रकरण के आरोपी टिन्नू यादव ने इसी पास सिस्टम का दुरुपयोग कर बड़ी संख्या में लोगों के लिए पास जारी करवाए थे. अब जांच सिर्फ चोरी गई रकम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी देखा जा रहा है कि पास जारी करने की प्रक्रिया में कहीं सुरक्षा और प्रशासनिक चूक तो नहीं हुई. यही वजह है कि ट्रस्ट ने सबसे पहले उसी व्यवस्था में बदलाव शुरू किया है, जिससे श्रद्धालुओं की एंट्री और वीआईपी पास का संचालन होता है.

Advertisement

महंत दिनेंद्र दास की बढ़ी भूमिका का क्या मतलब है?

महंत दिनेंद्र दास पहले से ही ट्रस्ट के ट्रस्टी हैं, लेकिन अब उनके पास प्रशासनिक स्तर पर एक नई जिम्मेदारी आ गई है. नई आईडी मिलने का सीधा मतलब है कि श्रद्धालुओं के पास जारी करने की प्रक्रिया अब उनके अधिकार क्षेत्र में आएगी. यह तकनीकी बदलाव के साथ ट्रस्ट के भीतर जिम्मेदारियों का बदलाव भी है. यानी जिन व्यवस्थाओं पर पहले दूसरे पदाधिकारी नजर रखते थे, उनमें अब महंत दिनेंद्र दास की भूमिका अधिक प्रभावी हो सकती है.

यह भी पढ़ें: राम मंदिर चढ़ावा चोरी में बड़ा खुलासा! रिश्तेदारों को आरोपी भेजते थे रकम, छिपा रखे हैं जेवरात और कैश

सूत्रों के अनुसार, 22 जुलाई को प्रस्तावित श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक कई बड़े फैसलों का आधार बन सकती है. बताया जा रहा है कि बैठक में नए महासचिव के चयन पर चर्चा हो सकती है. खाली पदों पर नए सदस्यों की नियुक्ति को अंतिम रूप दिया जा सकता है. दर्शन व्यवस्था में बदलाव का खाका पेश किया जा सकता है. चढ़ावा प्रबंधन को और पारदर्शी बनाने के लिए नई व्यवस्था लागू करने पर फैसला हो सकता है. सुरक्षा, क्राउड मैनेजमेंट और दर्शन व्यवस्था को आधुनिक बनाने के प्रस्तावों पर मुहर लग सकती है. ट्रस्ट का मकसद है कि मंदिर की व्यवस्थाएं अधिक जवाबदेह, पारदर्शी और श्रद्धालुओं के लिए सहज बनें.

Advertisement

चढ़ावा चोरी की जांच कहां तक पहुंची?

इसी बीच चढ़ावा चोरी के मामले की जांच भी लगातार आगे बढ़ रही है. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, जांच में सामने आया है कि चोरी की गई दान राशि का एक हिस्सा शेयर बाजार में निवेश किया गया, जबकि कुछ रकम ब्याज पर भी चलाई गई.

जांच एजेंसियों का दावा है कि आरोपियों ने लेनदेन छिपाने के लिए अपने रिश्तेदारों और करीबी लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल किया. पहले रकम दूसरे खातों में भेजी गई और बाद में उसे वापस अपने खातों में मंगाया गया. अब तक तीनों आरोपियों से जुड़े करीब 30 बैंक खातों को फ्रीज किया जा चुका है. शुरुआती जांच में इन खातों में खाताधारकों की ज्ञात आय से ज्यादा लेनदेन की बात भी सामने आई है.

आरोपियों के ठिकानों पर तलाशी में क्या मिला?

पुलिस ने आरोपी अनुकल्प मिश्रा के घर तलाशी ली और परिवार के सदस्यों से पूछताछ की. इससे पहले सह-आरोपी लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडेय के घरों पर भी छापेमारी हो चुकी है. सूत्रों के मुताबिक, तलाशी के दौरान नकदी, सोने के आभूषण और एक कार बरामद हुई है. हालांकि अभी तक यह आधिकारिक रूप से नहीं बताया कि किस आरोपी के यहां से कितनी नकदी या कौन-कौन सी संपत्ति मिली.

Advertisement

जांच में अनुकल्प मिश्रा के नाम पर खरीदी गई करीब एक एकड़ जमीन के दस्तावेज भी मिले हैं. दस्तावेजों के अनुसार जमीन करीब 6.7 लाख रुपये में खरीदी गई थी, जबकि मौजूदा कीमत कई गुना अधिक है.

अब ट्रस्ट की प्राथमिकता क्या है?

चढ़ावा मामले के बाद ट्रस्ट अब सिर्फ आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई तक सीमित नहीं रहना चाहता. फोकस पूरी व्यवस्था को मजबूत बनाने पर है. सूत्रों के अनुसार, आने वाले समय में दर्शन व्यवस्था को और सुगम बनाया जाएगा. चढ़ावा प्रबंधन में डिजिटल निगरानी और जवाबदेही बढ़ाई जाएगी. पास जारी करने की प्रक्रिया को अधिक नियंत्रित किया जाएगा. पूजा-पद्धति और राग-भोग व्यवस्था को रामानंदी परंपरा के अनुरूप और व्यवस्थित किया जाएगा. सुरक्षा और क्राउड मैनेजमेंट में तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया जाएगा.

यानी, राम मंदिर में अब बदलाव सिर्फ चेहरों का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम का दिखाई दे सकता है. फिलहाल सबकी निगाहें 22 जुलाई की ट्रस्ट बैठक पर टिकी हैं. माना जा रहा है कि इसी बैठक के बाद यह साफ होगा कि राम मंदिर के प्रशासनिक ढांचे में किसकी भूमिका कितनी बढ़ेगी, कौन नई जिम्मेदारी संभालेगा और श्रद्धालुओं को दर्शन से लेकर चढ़ावे तक किन नई व्यवस्थाओं का सामना करना पड़ेगा.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement