अयोध्या स्थित राम मंदिर के चढ़ावे में कथित घोटाले मामले में एफआईआर दर्ज कर ली गई है. इस मामले में एसआईआटी की सिफारिश के बाद एफआईआर दर्ज हुई है. शुरुआती जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर यह कदम उठाया गया है. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के ट्रस्ट की शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई है. श्री कृष्ण मोहन की शिकायत पर मामला दर्ज हुआ है.
सूत्रों के मुताबिक, एफआईआर में आठ लोगों को नामजद किया गया है. यह एफआईआर रमाशंकर यादव (टिन्नू यादव), अनुकल्प मिश्रा, अविनाश शुक्ला, मनीष यादव, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष, करुणेश और लवकुश मिश्रा के खिलाफ दर्ज की गई है.
यूपी सरकार के निर्देश पर बीएनसी के तहत 306, 316(5), 317(4), 317(5), 61 और 3(5) की धाराओं में एफआईआर दर्ज हुई है. यह एफआईआर चोरी, चोरी में मदद करना, गबन, धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और सरकारी कर्मचारी या संस्थाकर्मी के द्वारा आपराधिक षडयंत्र के तहत विश्वासघात की धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है. यह मामला रामजन्मभूमि कोतवाली में दर्ज हुआ है.
जिन लोगों के पास से रकम मिली है, उन सभी को एफआईआर में नामजद किया गया है. कहा जा रहा है कि इस मामले में बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां होंगी. ऐसे में आगे की जांच और संभावित कार्रवाई पर अब सबकी नजरें टिकी हैं.
इस घटनाक्रम पर विश्व हिंदू परिषद के प्रमुख आलोक कुमार ने कहा कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले विवाद खड़ा कर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन पूरी दुनिया देख रही है.
ये मामला पहली बार 7 जून को राजनीतिक बहस का विषय बना था. समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने दावा किया था कि राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए करोड़ों रुपए के दान में गड़बड़ी हुई है. अखिलेश यादव ने अदालत से इस मामले का संज्ञान लेने की भी मांग की थी.