एनसीईआरटी (NCERT) की कन्नड़ भाषा की पाठ्यपुस्तक 'कृष्णा' के नाम को लेकर जारी विवाद अब नए राजनीतिक मोड़ पर पहुंच गया है. इस मुद्दे पर विपक्ष ने कर्नाटक सरकार पर कथित दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया है. दरअसल, एनसीईआरटी ने स्पष्ट किया है कि उसकी भाषा की पुस्तकों के नाम भारत की प्रमुख नदियों के आधार पर रखे गए हैं. इसी क्रम में अलग-अलग भाषाओं की पुस्तकों के नाम गंगा, यमुना, कावेरी और कृष्णा जैसी नदियों पर आधारित हैं. एनसीईआरटी का कहना है कि 'कृष्णा' नाम का संबंध नदी से है, न कि किसी धार्मिक या राजनीतिक संदर्भ से.
इस बीच विपक्ष ने एक नया सवाल उठाया है. उसका कहना है कि कर्नाटक के मुख्यमंत्री के आधिकारिक सरकारी आवास का नाम भी 'कृष्ण' है. ऐसे में यदि सरकारी आवास के नाम पर कोई आपत्ति नहीं है, तो फिर 'कृष्णा' नाम की पाठ्यपुस्तक पर विवाद क्यों खड़ा किया जा रहा है? सूत्रों के मुताबिक, विपक्ष का तर्क है कि जब राज्य सरकार स्वयं 'कृष्ण' नाम का इस्तेमाल करती है, तब किसी पुस्तक के नाम में 'कृष्णा' शब्द होने पर सवाल उठाना राजनीतिक विरोधाभास को दिखाता है. विपक्ष इसे सरकार के रुख में कथित दोहरे मापदंड का उदाहरण बता रहा है.
वहीं, सरकार की ओर से इस मुद्दे पर अभी विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं आई है. हालांकि, 'कृष्णा' नाम को लेकर शुरू हुई बहस अब केवल पाठ्यपुस्तक तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का विषय बन गई है.