कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने यूजीसी-नेट जून 2026 के तीन विषयों- इंग्लिश, कॉमर्स और सोशियोलॉजी की परीक्षाएं रद्द होने पर केंद्र की मोदी सरकार और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) पर तीखा हमला बोला है. राहुल गांधी ने कहा कि गलती NTA करती है लेकिन इसकी सजा छात्रों को भुगतनी पड़ती है.
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या ये पेपर पहले ही लीक हो गए थे. उधर, NTA ने प्रश्नपत्रों में भारी खामियों और पुराने प्रश्नों के दोहराव के बाद इन तीन विषयों की री-एग्जाम 9 और 10 सितंबर 2026 को कराने का नोटिस जारी किया है.
'शोषण की मशीन'
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा, 'मोदी जी, देखिए आपकी NTA ने क्या किया है. 22 से 30 जून के बीच हुई परीक्षाएं दो महीने बाद गलत पेपर सेट करने और पुराने सवाल दोहराने के कारण रद्द कर दी गईं.'
उन्होंने कहा कि मैंने कोटा, देहरादून और प्रयागराज में ये बाक कही थी और इसको कहता रहूंगा, ये अब कोई शिक्षा व्यवस्था नहीं, बल्कि एक 'एक्सट्रैक्शन मशीन' (शोषण का तंत्र) बन चुकी है, जो छात्रों से पैसे, साल, मानसिक शांति और आत्मविश्वास छीनती है और बदले में कुछ नहीं देती, नौकरी भी नहीं देती.
NTA नहीं मानती अपनी गलती
राहुल गांधी ने NTA और सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठाते हुए कहा कि मोदी सरकार के हर तंत्र की तरह NTA भी कभी अपनी गलती नहीं मानती. NTA अभी-भी असली सवाल का जवाब नहीं देगी - क्या परीक्षा से पहले ये पेपर लीक हुए थे?
तय होनी चाहिए NTA की जिम्मेदारी
उन्होंने कहा, 'धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा पहला कदम था, आखिरी नहीं. NTA के नेतृत्व की भी जवाबदेही तय होनी चाहिए.' सितंबर में दोबारा परीक्षा देने वाले छात्रों का हौसला बढ़ाते हुए राहुल ने कहा कि गलती छात्रों की नहीं है. PM मोदी ने एक ऐसा सिस्टम बनाया है जो परीक्षा ठीक से नहीं करा सकता और फिर परीक्षा देने वाले छात्रों को ही दोषी ठहराया जाता है. आपके साल छीने जा रहे हैं और जब तक PM मोदी इसका जवाब नहीं देते, हम नहीं रुकेंगे.
NTA के आधिकारिक नोटिस के अनुसार, इंग्लिश, कॉमर्स और सोशियोलॉजी के पेपर में तथ्यात्मक, अनुवाद और टाइपिंग की गंभीर गलतियां पाई गईं. अब अंग्रेजी की परीक्षा 9 सितंबर को शिफ्ट 1 और कॉमर्स की शिफ्ट 2 में होगी. सोशियोलॉजी का री-टेस्ट 10 सितंबर को शिफ्ट 1 में कराया जाएगा. NTA ने स्पष्ट किया है कि छात्रों से दोबारा कोई परीक्षा शुल्क नहीं लिया जाएगा, सीटों की संख्या नहीं घटेगी.
एनटीए ने साफ किया है कि अन्य 84 विषयों के परिणाम निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार ही घोषित किए जाएंगे. इन 84 विषयों के जेआरएफ (JRF), असिस्टेंट प्रोफेसर पात्रता और पीएचडी प्रवेश के ई-प्रमाण पत्र जारी करने में कोई देरी नहीं होगी. इसके अलावा, असिस्टेंट प्रोफेसर की पात्रता के लिए दोनों परीक्षाओं (जून या रीटेस्ट) में शामिल अभ्यर्थियों में से उच्च संख्या के आधार पर 6% चयन होगा और किसी भी विषय की सीटें घटाई नहीं जाएंगी.
वहीं, परीक्षा रद्द होने पर विरोध जताते हुए कहा कि सालों तक तैयारी करने और दूर-दराज के केंद्रों तक यात्रा करने वाले छात्रों को सिस्टम की नाकामी की सजा भुगतनी पड़ रही है. उन्होंने आरोप लगाया गया कि शिक्षा व्यवस्था छात्रों के पैसे, समय और मानसिक स्वास्थ्य को छीनने वाली मशीन बन चुकी है.