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PM मोदी का तीन दिवसीय ऑस्ट्रेलिया दौरा, डिफेंस और ट्रेड डील पर रहेगी नजर

इंडो-पैसिफिक क्षेत्र आज वैश्विक रणनीति का अहम केंद्र बन चुका है. समुद्री सुरक्षा, सप्लाई चेन, ऊर्जा संसाधन और तकनीकी सहयोग जैसे मुद्दों पर देशों के बीच नई साझेदारियां बन रही हैं. ऐसे दौर में लोकतांत्रिक देशों के बीच सहयोग सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि रणनीतिक और सुरक्षा दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

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इंडो-पैसिफिक में बढ़ती चुनौतियों के बीच ऑस्ट्रेलिया पहुंचेंगे मोदी, रणनीतिक साझेदारी होगी मजबूत. (Photo: X/@narendramodi)
इंडो-पैसिफिक में बढ़ती चुनौतियों के बीच ऑस्ट्रेलिया पहुंचेंगे मोदी, रणनीतिक साझेदारी होगी मजबूत. (Photo: X/@narendramodi)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इस सप्ताह होने वाला ऑस्ट्रेलिया दौरा दोनों देशों के बीच रणनीतिक संबंधों को नई मजबूती दे सकता है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब इंडो-पैसिफिक क्षेत्र कई सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहा है. ऐसे में दिल्ली और कैनबरा के बीच सहयोग बढ़ना पूरे क्षेत्र की स्थिरता के लिए अहम माना जा रहा है.

मोदी 8 से 10 जुलाई तक मेलबर्न के तीन दिवसीय दौरे पर रहेंगे. इस दौरान वह ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज़ के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे. इसके अलावा वह गवर्नर जनरल सैम मोस्टिन से भी मुलाकात करेंगे. इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी इंडिया-ऑस्ट्रेलिया CEOs फोरम में कारोबारियों को संबोधित करेंगे. प्रवासी भारतीयों से भी मुलाकात करेंगे.

विशेषज्ञों का कहना है कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र तेजी से वैश्विक रणनीति का केंद्र बनता जा रहा है. दुनिया की बड़ी ताकतें इस क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं. ऐसे में भारत और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के बीच मजबूत साझेदारी की जरूरत पहले से ज्यादा महसूस की जा रही है. दोनों देश सुरक्षा और समृद्धि बढ़ाने में अग्रणी भूमिका निभाना चाहते हैं.

ऑस्ट्रेलिया इंडिया इंस्टीट्यूट की चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर और पूर्व सीनेटर लिसा सिंह ने कहा कि भारत-ऑस्ट्रेलिया साझेदारी को मजबूत करने से न केवल दोनों देशों को फायदा होगा, बल्कि क्षेत्र के विकासशील देशों को भी सकारात्मक संदेश जाएगा. डिफेंस संबंधों और मैरीटाइम सिक्योरिटी को दोनों देशों के सहयोग का प्रमुख क्षेत्र है. 

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उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया ने अपनी नेशनल डिफेंस स्ट्रैटेजी में हिंद महासागर की अहम भूमिका को स्वीकार किया है. उनके मुताबिक हिंद महासागर ऐसा क्षेत्र है, जहां भारत लंबे समय से नेतृत्वकारी भूमिका निभाता रहा है. ऐसे में दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा सहयोग और मजबूत हो सकता है. ऊर्जा सहयोग को लेकर भी काफी उम्मीदें जताई जा रही हैं. 

ऊर्जा क्षेत्र में भी बढ़ सकती है साझेदारी

लिसा सिंह ने कहा कि यदि ऑस्ट्रेलिया यूरेनियम सप्लाई के माध्यम से भारत की क्लीन एनर्जी जरूरतों को पूरा करने में मदद करता है तो यह दोनों देशों के लिए लाभकारी होगा. ANU नेशनल सिक्योरिटी कॉलेज में सीनियर रिसर्च फेलो फ्रेडरिक ग्रेरे ने कहा कि पिछली यात्राओं के दौरान कई बड़े वादे किए गए थे, लेकिन अपेक्षित नतीजे सामने नहीं आए.

हालांकि, उन्होंने माना कि इस बार व्यापार क्षेत्र में बड़ी प्रगति देखने को मिल सकती है. उनके अनुसार व्यापक कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक कोऑपरेशन एग्रीमेंट (CECA) की दिशा में नए कदम उठाए जा सकते हैं. ग्रेरे ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच द्विपक्षीय व्यापार में वृद्धि हुई है. दोनों देश लगातार बातचीत कर रहे हैं.

24.1 बिलियन डॉलर का हुआ व्यापार

ऑस्ट्रेलिया इस समय भारत का 14वां सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है. दोनों देशों के बीच 2025-26 में सामान और सेवाओं का द्विपक्षीय व्यापार 24.1 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है. भारत के विदेश मंत्रालय ने भी हाल ही में कहा था कि प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा CECA पर चल रही बातचीत को नई गति देगा.

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भारत और ऑस्ट्रेलिया 2022 में लागू हुए इकोनॉमिक कोऑपरेशन एंड ट्रेड एग्रीमेंट (ECTA) को आगे बढ़ाने के लिए CECA पर चर्चा कर रहे हैं. ग्रेरे का मानना है कि दोनों क्रिटिकल मिनरल्स, रिन्यूएबल एनर्जी, डिजिटल टेक्नोलॉजी और निवेश के क्षेत्र में भी नए अवसर तलाश सकते हैं. इनसे दोनों को दीर्घकालिक लाभ की संभावना है.

तीसरी बार ऑस्ट्रेलिया जाएंगे मोदी

यूनिवर्सिटी ऑफ मेलबर्न के सीनियर लेक्चरर प्रदीप तनेजा ने कहा कि नरेंद्र मोदी तीन बार ऑस्ट्रेलिया का दौरा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बनेंगे. उन्होंने कहा कि यह अपने आप में बेहद महत्वपूर्ण और असाधारण बात है. इससे साफ होता है कि दोनों देश अपने द्विपक्षीय संबंधों को कितना महत्व देते हैं.

मोदी इससे पहले 2014 और 2023 में ऑस्ट्रेलिया का आधिकारिक दौरा कर चुके हैं. तनेजा ने उम्मीद जताई कि दोनों देश अपने सुरक्षा सहयोग ढांचे को और आधुनिक बना सकते हैं. उन्होंने कहा कि 2009 के संयुक्त सुरक्षा घोषणा पत्र को अपडेट किया जा सकता है. इससे द्विपक्षीय सुरक्षा सहयोग में नए स्तंभ जोड़े जा सकेंगे.

क्वाड सहयोग पर भी रहेगा जोर

साल 2009 में भारत और ऑस्ट्रेलिया के रिश्तों को पहली बार रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया गया था. साल 2020 में इसे कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप में अपग्रेड किया गया. भारत, ऑस्ट्रेलिया और जापान के बीच द्विपक्षीय तथा त्रिपक्षीय सहयोग क्वाड को मजबूत बनाए रखने के लिए जरूरी है.

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प्रदीप तनेजा ने कहा कि क्वाड देशों पर चीन का दबाव निकट भविष्य में कम होता नहीं दिख रहा. इसलिए क्षेत्रीय सहयोग और समन्वय की आवश्यकता बनी रहेगी. क्वाड भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका का एक अनौपचारिक समूह है, जो खुले, स्वतंत्र और समावेशी इंडो-पैसिफिक के समर्थन के लिए काम करता है.

रिश्तों की मजबूती पर अलग राय

सिडनी यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर सल्वाटोर बैबोन्स ने कहा कि यह दौरा महत्वपूर्ण है क्योंकि ऑस्ट्रेलिया की घरेलू राजनीति अक्सर भारत पर फोकस को पीछे छोड़ देती है. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के संबंध अभी भी अपेक्षाकृत कमजोर हैं. दोनों देशों को आपसी सहयोग बढ़ाना चाहिए.

ग्रिफिथ यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर इयान हॉल को इस दौरे से ठोस परिणामों की उम्मीद है. उन्होंने कहा कि शिखर बैठक के दौरान किसी महत्वपूर्ण डिफेंस एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर हो सकते हैं. इसके साथ ही व्यापार और निवेश बढ़ाने के लिए नए संकल्प भी सामने आ सकते हैं. क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में भी नई डील देखने को मिल सकती है.  

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