
माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर आज एक अनोखा किस्सा देखने को मिला. भारत में अफगानिस्तान के राजदूत फरीद मामुन्दजई ने अपने जीवन का एक किस्सा शेयर किया. इस पर खुद को किसान बताने वाले एक शख्स ने अफगानी राजदूत को अपने गांव हरिपुरा आने का न्योता दे दिया. इस पर फरीद मामुन्दजई ने पूछा कि क्या ये सूतर का हरिपुरा गांव है? तो फिर प्रधानमंत्री मोदी (PM Modi) ने ट्वीट कर लिखा कि आप किसान के गांव भी जाइए और आप सूरत के हरिपुरा गांव भी जाइए.
दरअसल, हुआ ये कि फरीद मामुन्दजई (Farid Mamundzay) ने ट्विटर (Twitter) पर एक किस्सा शेयर करते हुए लिखा कि कुछ दिन पहले वो एक डॉक्टर के पास इलाज कराने गए थे, लेकिन जब डॉक्टर को पता चला कि वो अफगान के राजदूत हैं तो डॉक्टर ने उनसे कोई फीस नहीं ली. इस पर डॉक्टर ने उनसे कहा कि मैं एक भाई से फीस नहीं ले सकता हूं.
2/2 मैं एक भाई को चार्ज नहीं करूंगा।
— Farid Mamundzay फरीद मामुन्दजई فرید ماموندزی (@FMamundzay)
आभार व्यक्त करने के लिए शब्द नहीं थे।
यह भारत है; प्यार, सम्मान, मूल्य और करुणा।
आपके कारण मेरे दोस्त, अफगान थोड़ा कम रोते हैं, थोड़ा और मुस्कुराते हैं और बहुत अच्छा महसूस करते हैं।
उनके इस ट्वीट पर खुद को किसान बताने वाले एक शख्स बालकौर सिंह ढिल्लोन ने ट्वीट कर लिखा कि सर कभी हमारे हरिपुरा गांव भी आइए. फिर फरीद मामुन्दजई ने पूछा कि ये सूरत का हरिपुरा गांव है तो शख्स ने बताया कि नहीं ये राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में है, जो पंजाब की सीमा से सटा हुआ है. तब अफगानी राजदूत ने कहा कि राजस्थान के साथ अफगानिस्तान का लंबा इतिहास रहा है और स्थिति सामान्य होते ही मैं हरिपुरा जरूर आऊंगा.

दोनों के बीच बात चल ही रही थी कि फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) भी इसमें शामिल हो गए. उन्होंने लिखा कि आप बालकौर ढिल्लोन के गांव भी जाइए और गुजरात के हरिपुरा भी जाइए, वो भी अपने आप में इतिहास समेटे हुए है.
आप के हरिपुरा भी जाइए और गुजरात के हरिपुरा भी जाइए, वो भी अपने आप में इतिहास समेटे हुए है। मेरे भारत के एक डॉक्टर के साथ का अपना अनुभव आपने जो शेयर किया है, वो भारत-अफगानिस्तान के रिश्तों की खुशबू की एक महक है।
— Narendra Modi (@narendramodi)
हरिपुरा की आबादी 1,700 के आसपास
गुजरात के सूरत जिले के बरडोली तालुका में स्थित हरिपुरा गांव की आबादी 1,700 के आसपास है. 2011 की जनगणना के मुताबिक, इस गांव नें 402 परिवार रहते हैं और यहां की कुल आबादी 1,714 है. इनमें से 861 पुरुष और 853 महिलाएं हैं. इस गांव की साक्षरता दर 77.97% है.