संसद के मॉनसून सत्र का आज 18वां दिन है. (Photo- ITGD) संसद का मॉनसून सत्र जारी है और आज सत्र का 18वां दिन है. बीते कुछ दिनों से संसद के भीतर और बाहर सत्ता और विपक्ष के बीच भारी हंगामा देखने को मिल रहा है. झारखंड में चल रहे छात्र प्रदर्शन को लेकर खींचतान जारी है और आज भी इस मुद्दे पर हंगामा होने के आसार नजर आ रहे हैं.
बुधवार को संसद में जस्टिस यशवंत वर्मा मामले में जांच रिपोर्ट पेश की जाएगी. संसद में आज का सत्र इसीलिए भी अहम है क्योंकि आज राज्यसभा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह दो बड़े बिल पेश करेंगे.
इनमें पहला 'केरला (अल्टरेशन ऑफ नेम) बिल 2026' है, जो केरल राज्य का नाम आधिकारिक रूप से बदलकर 'केरलम' करने से जुड़ा हुआ है. दूसरा 'द नेशनल कोऑपरेटिव डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (अमेंडमेंट) बिल, 2026' है, जिसका मकसद राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम के कामकाज और वित्तीय व्यवस्था को और मजबूत बनाना है.
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह संसद में एक प्रस्ताव पेश करेंगे. इसके तहत 'विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026' (FCRA) को दोनों सदनों की एक संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजा जाएगा. इस समिति में कुल 31 सदस्य होंगे, जिनमें से 21 सदस्य लोकसभा से (अध्यक्ष द्वारा मनोनीत) और 10 सदस्य राज्यसभा से (सभापति द्वारा मनोनीत) शामिल किए जाएंगे. समिति की बैठक के लिए कम से कम एक-तिहाई सदस्यों की मौजूदगी अनिवार्य होगी. इस संयुक्त समिति को अपनी रिपोर्ट शीतकालीन सत्र 2026 के पहले सप्ताह के आखिरी दिन तक संसद में सौंपनी होगी. इसके साथ ही लोकसभा, राज्यसभा से इस समिति में शामिल होने और अपने सदस्यों के नाम भेजने का अनुरोध करेगी.
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, संसद में जवाब देने के लिए सरकार जो समय-सीमा तय करना चाहती है, वो स्वयं में अलोकतांत्रिक है. दरअसल ये जवाब नहीं होगा, थोथा बयान होगा. सच तो ये है कि बीजेपी चाह ही नहीं रही है कि कोई जवाब दिया जाए वो तो सत्र को खत्म करने के लिए उतावली है. जिम्मेदारी और जवाबदेही समय की किसी शर्त से नहीं, बल्कि उत्तरदायित्व के तर्क से निभाई जाती है. ये कोई जिज्ञासा के सतही समाधान की औपचारिकता नहीं है बल्कि भगवान और इंसान दोनों के साथ दुर्व्यवहार और दुर्भावना का बेहद गंभीर मुद्दा है. देश भाषण सुनने के मूड में नहीं है!'
राज्यसभा और लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 2 बजे से शुरू होने वाली है. बताया जा रहा है कि सरकार आज दोपहर 2 बजे FCRA बिल को JPC के पास भेजने का प्रस्ताव पेश करने वाली है.
गृह मंत्री अमित शाह के बयान के बाद सरकार के भीतर बैठकों का दौर जारी है. इसी सिलसिले में केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू, अर्जुन राम मेघवाल और एल. मुरुगन के बीच एक अहम बैठक हुई.इस बैठक के बाद किरेन रिजिजू लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिलने उनके केबिन पहुंचे. ओम बिरला से मुलाकात करने के तुरंत बाद किरेन रिजिजू ने गृह मंत्री अमित शाह से भी मुलाकात की.
अमित शाह ने हाल ही में विपक्ष को चैलेंज देते हुए कहा कि वो आज दोपहर 3 बजे से कल 3 बजे तक सदन में चर्चा के लिए तैयार हैं. इस पर राहुल गांधी ने उनपर पलटवार किया है और कहा है कि उन्हें लेक्चर की जरूरत नहीं है. उन्होंने कहा, 'विपक्ष ने साफ-साफ कह दिया है कि हमें अमित शाह के लेक्चर में कोई दिलचस्पी नहीं है. जब मैं 'हम' कहता हूं, तो मेरा मतलब इस देश की युवा पीढ़ी से है. स्टूडेंट्स को गोली किसने मारी? स्टूडेंट्स को कीलों वाली लाठियों से पीटने का ऑर्डर किसने दिया? क्या अमित शाह ने हमारे बच्चों को गोली मारने का ऑर्डर दिया था? अगर दिया है, तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए. पिछले 20 दिनों से अमित शाह गायब हैं. भारत के गृह मंत्री में हिम्मत नहीं है; वह सदन में नहीं आ सकते.'
अमित शाह ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, 'आज 3 बजे तक स्पीकर साहब को वो (विपक्ष) पत्र दे दें. 3 बजे से लेकर कल 3 बजे तक सभी तरह की चर्चा के लिए हम तैयार हैं. मैं सदन में ही बैठूंगा, सबको सुनूंगा और सब चीजों का जवाब दूंगा. सरकार के पास छुपाने के लिए कुछ नहीं है. मैं ये भी चर्चा करूंगा कि आपने चर्चा क्यों नहीं की. भारतीय जनता पार्टी की, मोदी जी के नेतृत्व में सरकार हर चीज पर चर्चा के लिए तैयार है. संसद चलने दें, बस. आज मैं चैनलों के माध्यम से विपक्ष से कहना चाहता हूं कि आप एक पत्र 2 बजे तक लिखकर दे दीजिए, स्पीकर साहब को. 3 बजे से चर्चा चालू कर देंगे और कल 3 बजे मैं सारी चीजों का जवाब दे दूंगा. संसद में चर्चा करने के नियम बने हैं, तरीके बने हैं. अब मुझे कोई कहता है कि आप एक स्टेटमेंट दे दो, इतने गंभीर मसले पर इस तरह से चर्चा नहीं हो सकती है. शायद आपकी पद्धति में होगा, मगर संसदीय पद्धति ये नहीं है.संसद में एट लेंथ चर्चा होती है. आज 3 बजे से देर रात तक, जब तक वो बैठें, और कल दोपहर 3 बजे तक हम तो Question Hour भी suspend करने के लिए तैयार हैं, अगर स्पीकर साहब अनुमति देते हैं. कल 3 बजे तक मैं चर्चा के लिए तैयार हूं. मैं खुद बैठूंगा, हर चीज लिखूंगा और हर चीज का जवाब दूंगा, जिससे देश की जनता के सामने सारी चीजें स्पष्ट हो जाएं- दूध का दूध और पानी का पानी हो जाए. अब विपक्ष ने तय करना है कि उनको चर्चा करनी है या हंगामा करना है.'
अमित शाह ने आगे कहा, 'सबसे पहले तो लापता, भाग गए ऐसे शब्दों का इस्तेमाल न करें. जब से संसद सत्र शुरू हुआ मैं लगातार संसद में आता हूं. विपक्ष संसद को चलने ही नहीं दे रहा. जहां तक चर्चा का सवाल है, हमारे केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री ने बहुत स्पष्ट कर दिया कि छात्र आंदोलन पर सरकार हर तरह की चर्चा के लिए तैयार है. मैं सब चीजों का जवाब दूंगा. सरकार के पास छुपाने के लिए कुछ नहीं है. मैं वो भी चर्चा करूंगा कि आपने संसद को चलने क्यों नहीं दिया.'
अमित शाह ने विपक्ष के आरोपों का खंडन करते हुए कहा, 'सरकार हर चीज पर चर्चा के लिए तैयार है. विपक्ष संसद को चलने दे. मैं विपक्ष को कहना चाहता हूं कि आप 2 बजे तक स्पीकर को पत्र लिखकर दे दीजिए. सरकार आज 3 बजे से रात जब तक वे बैठे और कल 3 बजे तक सरकार चर्चा के लिए तैयार है. मैं खुद चर्चा में बैठूंगा.'
तृणमूल कांग्रेस सांसद सौगत रॉय ने दिल्ली में छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई पर विरोध किया है. उन्होंने कहा कि दिल्ली में छात्रों पर लाठीचार्ज किया गया और उन पर पेलेट गन और आंसू गैस के गोले छोड़े गए. उन्होंने कहा कि कहीं भी छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग करना पूरी तरह से गलत है और उनकी पार्टी इसका कतई समर्थन नहीं करती है. सौगत रॉय ने मांग की कि संसद में छात्रों पर लाठीचार्ज और पेलेट गन के इस्तेमाल पर चर्चा होनी चाहिए. इसके साथ ही उन्होंने इस घटना के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से माफी मांगने की भी मांग की है.
FCRA बिल को JPC को भेजे जाने पर समाजवादी पार्टी सांसद डिंपल यादव ने भी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा, 'अगर इसे JPC को भेजा जा रहा है, तो ये अच्छा है. इस बिल से सरकार उन ऑर्गनाइजेशन को डरा सकती थी जो शायद उनके हिसाब से काम नहीं कर रहे थे.'
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई और राम मंदिर दान चोरी के मुद्दे को लेकर विपक्ष के सांसदों के साथ विरोध प्रदर्शन में शामिल हुईं. विपक्ष इस मामले पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से संसद में बयान देने की मांग कर रहा है. उनका कहना है कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई गलत थी और सरकार को इस पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए.
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा, 'वो माइनॉरिटी को दबाने के लिए FCRA बिल लाना चाहते हैं. वो इसे सिर्फ अपने फायदे के लिए लाना चाहते हैं. आप आज जहां पानी भरा है, वहां एयरपोर्ट बना रहे हैं और एक्सप्रेसवे पर गड्ढे हैं. तो, आप क्या कर रहे हैं? हम सरकार चलाने वाले और एयरक्राफ्ट पायलट में समानताएं देख सकते हैं.'
संसद का मॉनसून सत्र का 18वां दिन भी हंगामे से भरा नजर आ रहा है. 11 बजे से शुरू हुई लोकसभा की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित हो गई है.
FCRA बिल को JPC को भेजे जाने पर राज्यसभा में LoP मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, 'इसे भेजा जाना चाहिए.' उन्होंने आगे कहा, 'कल कुछ नहीं होगा. हम वही करते रहेंगे जो अब तक करते आ रहे हैं.'
संसद में 18वें दिन का सत्र शुरू होने से पहले ही हंगामा शुरू होता नजर आ रहा है. संसद के बार एक तरफ बीजेपी के सांसद राहुल गांधी के जवाब देने को लेकर के झारखंड के मुद्दे पर प्रदर्शन कर रहे हैं, तो वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस और समाजवादी पार्टी गृह मंत्री अमित शाह के जवाब को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं.

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी संसद में चल रहे डेडलॉक के बारे में पूछे जाने पर मीडिया पर गुस्सा हो गईं, उन्होंने पूछा, 'आपको क्या लगता है इसके लिए कौन जिम्मेदार है? क्या आप जनता के प्रति जवाबदेह नहीं हैं जब आप (सरकार) छात्रों पर लाठीचार्ज करते हैं और उनके खिलाफ पैलेट गन का इस्तेमाल करते हैं, और बिहार में उन पर AK-47 का भी इस्तेमाल करते हैं. क्या हमें भी आप सब (मीडिया) की तरह चुपचाप बैठे रहना चाहिए?'
FCRA बिल पर समाजवादी पार्टी के MP राम गोपाल यादव ने कहा, 'ये बिल कभी नहीं लाना चाहिए था. झारखंड, गुजरात के डांग इलाके और देश के दूसरे आदिवासी इलाकों में NGOs ने जितना काम किया है, उतना अब तक कई सरकारों ने नहीं किया है.' राम मंदिर के मुद्दे पर उन्होंने कहा, 'ये मुद्दा बना रहेगा, ये आज देश के हर घर तक पहुंच गया है.
FCRA बिल को लेकर सत्ता और विपक्ष के बीच खींचतान जारी है. आज ये बिल सदन में पेश हो सकता है, इससे पहले JMM सांसद महुआ माझी ने कहा, 'हमारी पार्टी की मीटिंग में तय होगा कि आगे किस तरीके कदम बढ़ाना है लेकिन हमारे राज्य में भी बहुत सारे NGO और संस्थाएं हैं जो की फॉरेन फंडिंग से चलती है, जो कि राज्य के लिए बहुत बेहतर काम करती हैं. ऐसी संस्थाओं पर कड़ाई नहीं करनी चाहिए ये हम चाहते हैं.'
आज संसद में जस्टिस यशवंत वर्मा मामले में जांच रिपोर्ट पेश की जाएगी. दरअसल मार्च 2025 में दिल्ली स्थित उनके सरकारी आवास में आग लगने के बाद स्टोर रूम से जले हुए नोट मिले थे. इसके बाद उनके खिलाफ जांच शुरू हुई और उन्हें पद से हटाने की मांग उठी थी. इस मामले की जांच के लिए तीन सदस्यों की कमेटी बनाई गई थी. कमेटी ने इस मामले में जो दस्तावेज और मौखिक साक्ष्य जमा कर लिए हैं, जिसकी रिपोर्ट आज लोकसभा और राज्यसभा में पेश की जाएगी.