दूसरों को जिंदगी देने के लिए पूरी उम्र समर्पित करने वाले एक महान डॉक्टर ने आखिरकार दुनिया को अलविदा कह दिया. जिस चिकित्सा क्षेत्र में उन्होंने अपनी पहचान बनाई, जिस बीमारी को समझने और उसका इलाज खोजने के लिए सैकड़ों शोध पत्र लिखे, उसी तंत्रिका संबंधी बीमारी के इलाज के दौरान उनकी जिंदगी का सफर थम गया. पद्मश्री से सम्मानित देश के जाने-माने न्यूरोसर्जन डॉ. अशोक कुमार महापात्रा का 74 साल की उम्र में निधन हो गया. उन्होंने दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में सोमवार रात अंतिम सांस ली.
डॉ. महापात्रा के निधन की खबर से चिकित्सा जगत में शोक की लहर है. उनके परिवार के सूत्रों के मुताबिक, वह एम्स में न्यूरोलॉजिकल बीमारियों का इलाज करा रहे थे. उनके परिवार में पत्नी और एक बेटी हैं.
870 से ज्यादा शोध पत्र और 16 किताबें लिखीं
डॉ. अशोक कुमार महापात्रा ने चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया था. उन्होंने अपने करियर में 870 से अधिक शोध पत्र लिखे और 16 किताबें प्रकाशित कीं. न्यूरोसर्जरी के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए साल 2024 में उन्हें पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया था. वह सिर्फ एक कुशल डॉक्टर ही नहीं, बल्कि चिकित्सा जगत की नई पीढ़ी को तैयार करने वाले मार्गदर्शक भी थे.
डॉ. महापात्रा का नाम ओडिशा में तब घर-घर तक पहुंचा, जब उन्होंने 2017 में दिल्ली एम्स में सिर से जुड़े जुड़वां बच्चों जगा और कालिया को अलग करने वाली जटिल सर्जरी का नेतृत्व किया था. करीब 16 घंटे तक चले इस ऑपरेशन ने पूरे देश का ध्यान खींचा था. भारत में अपनी तरह की पहली सर्जरी बताई गई इस उपलब्धि ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई.
AIIMS भुवनेश्वर की स्थापना में भी निभाई अहम भूमिका
डॉ. महापात्रा ने ओडिशा के भुवनेश्वर में एम्स की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. वह इस संस्थान के पहले निदेशक भी बने. सेवानिवृत्ति के बाद वह इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड SUM हॉस्पिटल से जुड़े. साल 2020 में उन्होंने SOA विश्वविद्यालय के कुलपति का पद संभाला और दो साल तक इस जिम्मेदारी को निभाया.
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने उनके निधन पर गहरा दुख जताया है. दोनों नेताओं ने चिकित्सा विज्ञान और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में उनके योगदान को याद किया. डॉ. महापात्रा का पार्थिव शरीर मंगलवार को अंतिम संस्कार के लिए भुवनेश्वर लाया जाएगा.
एक ऐसे डॉक्टर का जाना चिकित्सा जगत के लिए बड़ी क्षति है, जिन्होंने शोध, इलाज और अपनी ऐतिहासिक उपलब्धियों से हजारों लोगों की जिंदगी को छुआ.