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'फैसले किस बहुमत से लिए...', ओवैसी ने SIR और चुनाव आयोग पर उठाए सवाल

हैदराबाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) फैसले को गलत बताते हुए चुनाव आयोग से फैसले के बहुमत की जानकारी मांगी है. उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया से गरीबों को दस्तावेज जुटाने में भारी परेशानी हो रही है और इसे 'बैकडोर NRC' माना जा रहा है.

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 (Photo-ITG)
(Photo-ITG)

हैदराबाद सांसद और AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने एक बार फिर मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि वह शुरुआत से ही SIR के खिलाफ रहे हैं और इसे 'बैकडोर NRC' मानते हैं. ओवैसी ने चुनाव आयोग के भीतर फैसले लेने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए.

हैदराबाद में ओवैसी ने कहा, 'मैं शुरू से SIR का विरोध करता रहा हूं. मेरा मानना है कि SIR को लेकर लिया गया फैसला गलत था, लेकिन हम क्या कर सकते थे? सुप्रीम कोर्ट ने इसे बरकरार रखा.' ओवैसी ने हाल में चुनाव आयोग के भीतर मतभेदों को लेकर सामने आई मीडिया रिपोर्ट का जिक्र करते हुए सवाल किया कि आयोग के फैसले किस तरह लिए गए. 

दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों का किया जिक्र

उन्होंने कहा कि देश को बताया जाना चाहिए कि कितने फैसले बहुमत से लिए गए? ओवैसी ने दो चुनाव आयुक्तों की ओर से दर्ज आपत्तियों का जिक्र करते हुए पूछा कि अगर कुछ फैसले बहुमत के आधार पर नहीं हुए तो उनकी कानूनी स्थिति क्या होगी? मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 मौकों पर अलग-अलग मुद्दों को लेकर रिकॉर्ड पर आपत्तियां दर्ज की थीं. हालांकि चुनाव आयोग का कहना है कि सदस्यों की टिप्पणियां और अलग-अलग राय विचार-विमर्श की सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं और अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए.

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ओवैसी ने SIR की प्रक्रिया से गरीबों को परेशानी होने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि लोगों को दस्तावेज खोजने के लिए इधर-उधर भागना पड़ रहा है. इससे गरीबों पर बड़ा बोझ पड़ रहा है. उन्होंने उन लोगों का मुद्दा भी उठाया, जिनके नाम अंतिम SIR सूची में नहीं आए. ओवैसी ने सवाल किया कि अगर माता-पिता या दादा-दादी का नाम पुरानी सूची में नहीं मिलता तो उनके बच्चों और अगली पीढ़ियों की मैपिंग किस आधार पर की जाएगी.

तेलंगाना में SIR से जुड़ी दिक्कतें बताईं

ओवैसी ने मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की मौजूदा प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि जब इससे जुड़ा विधेयक संसद में आया था, तभी उन्होंने इसकी विश्वसनीयता को लेकर चिंता जताई थी. उन्होंने तेलंगाना में SIR की व्यावहारिक दिक्कतों का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य में NRC नहीं हुआ और स्थायी निवास प्रमाणपत्र की व्यवस्था भी नहीं रही है. ऐसे में लोगों से पुराने रिकॉर्ड और दस्तावेज मांगने से परेशानी बढ़ सकती है.

ओवैसी ने प्रक्रिया को ऑनलाइन किए जाने पर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि एक तरफ BLO को घर-घर जाकर नोटिस देने और दस्तावेज लेने हैं, दूसरी तरफ बड़ी संख्या में मामलों को ऑनलाइन संभालना है. उनके मुताबिक, इतने बड़े स्तर पर इस प्रक्रिया को पूरा करना बेहद मुश्किल है. ओवैसी इससे पहले भी SIR को 'बैकडोर NRC' बताते हुए नागरिकों से दस्तावेज मांगने और नाम छूटने की आशंका को लेकर सवाल उठा चुके हैं.

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