25 जनवरी 2026 को भारत 16वां राष्ट्रीय मतदाता दिवस मना रहा है. इस मौके पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने युवा मतदाताओं को वोटर कार्ड सौंपे. इस दौरान उन्होंने लोकतंत्र में मताधिकार की अहमियत को लेकर बात की. मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार भी इस उत्सव का हिस्सा बने.
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि हमारी माताओं बहनों ने रिकॉर्ड संख्या में मतदान कर लोकतंत्र को निश्चित रूप से समृद्ध किया है. आंबेडकर जी का मानना था कि मताधिकार राजनीतिक शिक्षा को सुनिश्चित करने का माध्यम है.
राष्ट्रपति मुर्मू ने आगे कहा, '26 नवंबर को संविधान बनकर स्वीकार हुआ और 26 जनवरी को लागू हुआ. जबकि निर्वाचन आयोग की स्थापना 25 जनवरी 1950 को हुई थी. हमारे यहां 95 करोड़ से ज्यादा मतदाता हैं. माई इंडिया माई वोट मतदाता के हक और अहमियत की बात कहता है.'
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने बताया मताधिकार का महत्व
इस दौरान मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने भी मताधिकार पर अपनी राय दी. उन्होंने कहा, 'भारत के गौरवशाली इतिहास में ईसापूर्व 800 साल से भी पहले से गणतांत्रिक शासन प्रणाली थी, जब दुनिया अंधकार में सभ्यता टटोल रही थी. आज भी लगभग 70 लोकतांत्रिक देशों और 40 से ज्यादा देशों के चुनाव आयोगों के शीर्ष अधिकारियों ने दिल्ली घोषणा पत्र स्वीकार किया.'
कुमार ने आगे कहा, 'भारत के साथ लोकतंत्र और चुनाव प्रबंधन क्षेत्र में साथ काम करने पर सहमति जताई है. देश भर के बीएलओ को पहली बार स्पेशल ट्रेनिंग दी गई, मानदेय बढ़ाया गया और विशिष्ट पहचान पत्र मुहैया कराया गया. आयोग ने भी सभी राजनीतिक दलों से 27 से ज्यादा मीटिंग की.'
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SIR को बताया 'सबसे बड़ी कवायद'
उन्होंने बताया, 'SIR अब तक की सबसे बड़ी कवायद शुरू की गई ताकि कोई भी पात्र मतदाता छूटे नहीं और कोई भी अपात्र वोटर लिस्ट में शामिल न हो पाए.
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विधि और न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा, 'ये भारतीय लोकतंत्र की आत्मा यानी वोटर से संवाद करने का है. वोटर वोट के जरिए अपनी बात कहता है. तभी ये हक है. इसके पीछे बाबा साहब अंबेडकर की सोच रही एक व्यक्ति एक वोट और एक मूल्य के सिद्धांत पर सबको मताधिकार दिया. सरकार ने भी अपनी तरफ से कई पहल की है ताकि अंतिम व्यक्ति तक लोकतंत्र की पहुंच, पकड़ और भागीदारी सरलता से सुनिश्चित हो.'