प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'दिमागी नक्सल' वाले बयान को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है. केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने प्रधानमंत्री के बयान का समर्थन किया. इस पर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने उन्हें करारा जवाब दिया है.
दरअसल किरेन रिजिजू ने PM मोदी के बयान का समर्थन करते हुए सोशल मीडिया पर सफाई दी है. उन्होंने लिखा था कि प्रधानमंत्री मोदी ने पूरे विपक्ष को 'दिमागी नक्सल' नहीं कहा है. उन्होंने तीन बिंदूओं के साथ दावा किया कि ऐसे लोगों का समर्थन करने वालों को ही 'दिमागी नक्सल' कहा जाता है.
रिजिजू ने बताया कि 'दिमागी नक्सल' सिर्फ वही लोग हैं जो माओवादियों का समर्थन करते हैं और भारतीय संविधान को खारिज करते हैं. जो अलगाववादियों के साथ खड़े होते हैं और अनुच्छेद 370 का समर्थन करते हैं और जो पूर्वोत्तर को भारत से अलग करने के लिए 'चिकन नेक' को काटने की बात करते हैं.
'मैं आर्टिकल 370 का समर्थन करती हूं...'
किरेन रिजिजू के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए महबूबा मुफ्ती ने कड़ा रुख अपनाया है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किरेन रिजिजू को पोस्ट री-शेयर किया है. महबूबा ने पीएम मोदी और अपने पिता मुफ्ती मोहम्मद सईद की एक फोटो शेयर करते हुए लिखा, 'मैं आर्टिकल 370 का समर्थन करती हूं. मैं दिमागी नक्सल हूं.'
'शब्दावली का विस्तार कर रहे पीएम': मनोज झा
दूसरे दलों के नेता भी पीएम मोदी के बयान की आलोचना कर रहे हैं. सांसद मनोज कुमार झा ने कहा, 'अर्बन नक्सल से लेकर दिमागी नक्सल तक, ऐसा लगता है कि प्रधानमंत्री हमारी राजनीतिक शब्दावली का लगातार विस्तार कर रहे हैं. अगर अर्बन नक्सल पोस्ट ग्रेजुएट की डिग्री है, तो दिमागी नक्सल निश्चित रूप से पीएचडी होगी. इस रफ्तार से, हमें जल्द ही एक पूरे विश्वविद्यालय और एक नए शब्दकोश की जरूरत हो सकती है.'
पी. चिदंबरम ने पुरानी राजनीतिक बयानबाजी से जोड़ा
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने भी इस पर आपत्ति जताई. उन्होंने कहा कि 'दिमागी नक्सल' बीजेपी के पुराने आरोपों जैसे 'अर्बन नक्सल', 'आंदोलनजीवी' और 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' का ही नया रूप है.
चिदंबरम ने सवाल उठाया कि अर्बन नक्सल, आंदोलनजीवी और टुकड़े-टुकड़े गैंग कौन थे? उन्होंने आरोप लगाया कि ये सभी पुराने शब्द विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने के लिए गढ़े गए थे और 'दिमागी नक्सल' उसी कड़ी में नया शब्द है.
बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने स्वतंत्रता दिवस के भाषण में 'दिमागी नक्सल' शब्द का जिक्र किया था. उन्होंने देश को ऐसे लोगों से सतर्क रहने की चेतावनी दी, जो सिस्टम में गहराई तक पैठ बना चुके हैं और नीतियों के साथ खिलवाड़ करके समाज के लिए खतरा पैदा कर रहे हैं.
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पीएम मोदी ने नागरिकों से अपील की कि वो ऐसे 'दिमागी नक्सलियों' की पहचान करें और उन्हें अलग-थलग करें. उन्होंने कहा कि देश जंगलों से सशस्त्र नक्सलवाद को खत्म करने में तो सफल रहा है, लेकिन इसके वैचारिक समर्थक अब भी हिंसा और अराजकता फैलाने के मौकों की तलाश में हैं.