लखनऊ अग्निकांड की जांच में अब नया बड़ा खुलासा हुआ है. अलीगंज फायर घटना के बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के पुराने रिकॉर्ड्स से पता चला है कि सपा सरकार के कार्यकाल में इस इमारत का ध्वस्तीकरण का आदेश कथित तौर पर पैसों के दम पर रुकवा दिया गया था. वहीं, इस पूरे मामले में अधिकारियों की मिलीभगत से रुकवाने के संगीन आरोपों की विस्तृत जांच के लिए एलडीए ने एक जांच कमेटी का गठन कर किया है जो अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपेगी.
आजतक के पास वह एक्सक्लूसिव नक्शा मौजूद है जो इस पूरी धांधली की गवाही दे रहा है. रिकॉर्ड के मुताबिक रिहायशी इलाके में बने इस रेजिडेंशियल मकान का कोई नक्शा पास ही नहीं था. इसके बावजूद अधिकारियों से साठगांठ करके इस पूरी अवैध बिल्डिंग के अंदर धड़ल्ले से कमर्शियल एक्टिविटी चलाई जा रही थी.
धनबल से रुकवाया ध्वस्तीकरण
शुरुआती रिकॉर्ड से ये गंभीर बात सामने आई है कि नियमों के तहत इस अवैध निर्माण को गिराने के लिए ध्वस्तीकरण की कार्रवाई आदेश जारी किया गया था. लेकिन आरोप है कि तत्कालीन सपा सरकार के कार्यकाल में प्रभावशाली लोगों ने अपने भारी धनबल का इस्तेमाल किया और विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से बुलडोजर की बड़ी कार्रवाई को बीच में ही रुकवा दिया. इस खुलासे ने प्रशासनिक पारदर्शिता और अधिकारियों की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
LDA ने गठित की जांच कमेटी
पुराने रिकॉर्ड से हुए खुलासे के बाद प्रशासनिक पारदर्शिता पर उठे गंभीर सवालों के बीच पूरे मामले की जांच के लिए LDA (लखनऊ ) ने पांच सदस्यीय विशेष टीम का गठन कर दिया है. ज्ञानेंद्र वर्मा के नेतृत्व में गठित इस टीम में के.के. गौतम, मानवेंद्र सिंह, मनोज सागर और रविनंदन सिंह को शामिल किया गया है. ये टीम घटना के सभी पहलुओं की विस्तृत जांच करेगी और प्रधिकरण के अधिकारियों की संलिप्तता का पता लगाई. इसके बाद कमेटी अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपेगी.
आपको बता दें कि लखनऊ के अलीगंज में सोमवार को एक इमारत में भीषण आग लगई. इस हादसे में 15 लोगों की मौत हो गई और कई लोग घायल हो गए. घटना से नाराज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्देश पर इस पूरे मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय एसआईटी का गठन किया है जो 7 दिनों के अंदर शासन को अपनी रिपोर्ट देगी.
एसआईटी को शुरुआती जांच में बिल्डिंग के अंदर कई खामियां मिली हैं. शुरुआती जांच में ओवरलोडिंग का खुलासा भी हुआ है.