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'चुनौतियों को अवसर में बदलना हमारा इतिहास', RSS के मंच से बोले उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला

नागपुर में आरएसएस के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रख्यात उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला ने देश की विकास यात्रा में संघ और उद्योगों के योगदान को रेखांकित किया. उन्होंने युवाओं को 'मेक इन भारत' का संदेश देते हुए भारतीय प्रतिभाओं से देश में रहकर वैश्विक स्तर पर सृजन करने का आह्वान किया.

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कुमार मंगलम बिड़ला ने कहा कि देश के युवा 'मेक इन भारत' के साथ पूरी दुनिया के लिए सृजन करें. (Photo-ITG)
कुमार मंगलम बिड़ला ने कहा कि देश के युवा 'मेक इन भारत' के साथ पूरी दुनिया के लिए सृजन करें. (Photo-ITG)

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के नागपुर में आयोजित एक विशेष वर्ग कार्यक्रम में देश के दिग्गज उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला ने शिरकत की. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने भारत की आर्थिक प्रगति, आत्मनिर्भरता और राष्ट्र निर्माण में संघ (RSS) की भूमिका पर विस्तार से अपने विचार रखे. बिड़ला ने युवाओं से देश की प्रगति में बढ़-चढ़कर योगदान देने का आह्वान किया.

कुमार मंगलम बिड़ला ने भारत के बढ़ते वैश्विक आर्थिक कदमों की सराहना करते हुए कहा, "आज भारत दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और हम बेहद तेजी से आगे बढ़ रहे हैं." उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन का जिक्र करते हुए कहा कि पीएम मोदी जिस 'अमृतकाल' की बात करते हैं, वह एक ऐसा दौर है जो भारत को विकास और प्रगति की नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा.

संबोधन के दौरान बिड़ला ने अपने परिवार के इतिहास और देश के विभाजन के दौर को याद किया. उन्होंने बताया, "मेरे दादा जी (जीडी बिड़ला) ने विभाजन के समय उन विकट चुनौतियों को करीब से देखा था, जब हमारे कपास के खेत पाकिस्तान में रह गए थे. लेकिन उन्होंने उस बड़ी चुनौती को भी अपनी सूझबूझ से एक अवसर में बदल दिया." उन्होंने जोर देकर कहा कि आत्मनिर्भरता केवल एक आर्थिक नीति नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का एक पवित्र संकल्प है.

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आदित्य बिड़ला ग्रुप और RSS के कार्यों में समानता
बिड़ला ने कहा कि उनके समूह और संघ की सामाजिक गतिविधियों में गहरी समानताएं हैं. दोनों ही संगठन प्राथमिक और उच्च शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक उत्थान, महिला सशक्तिकरण तथा कौशल विकास को अत्यंत महत्व देते हैं.

यह भी पढ़ें: उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला को यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन ने किया सम्मानित, दी मानद डॉक्टरेट की उपाधि

संघ के सेवा कार्यों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा, "83 हजार शाखाएं, 60 लाख स्वयंसेवक और एक लाख 77 हजार सेवा कार्यों का यह विशाल नेटवर्क अभूतपूर्व है. आज़ादी के पहले से लेकर देश में आए हर संकट- चाहे भूकंप हो या सुनामी, आरएसएस सदैव समाज के साथ खड़ा रहा है."

मोहन भागवत से संवाद और युवाओं को संदेश
सरसंघचालक मोहन भागवत के साथ अपनी मुलाकातों को याद करते हुए उद्योगपति ने कहा, "भागवत जी की सादगी, विनम्रता और राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पण हमेशा प्रेरित करता है. उनसे हर संवाद के बाद भारत के भविष्य को लेकर मेरा विश्वास और अटूट हो जाता है."

अंत में उन्होंने देश के युवाओं को आगे बढ़ने का मूलमंत्र देते हुए कहा, "मेक इन भारत, मेक फॉर भारत (भारत में बनाएं, भारत के लिए बनाएं)." उन्होंने अपील की कि युवा भारत में रहकर ही पूरी दुनिया के लिए नई तकनीकों और उत्पादों का सृजन करें.

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