प्रधानमंत्री मोदी ने आज लाल किले से 'दिमागी नक्सल' शब्द का इस्तेमाल किया. उनके इस बयान पर कांग्रेस ने उन्हें घेरना शुरू कर दिया. कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि प्रधानमंत्री जिन्हें अर्बन नक्सल कहते हैं उन्हीं की मांगों को वे स्वीकारते हैं.
देश आज अपनी स्वतंत्रता की 80वीं वर्षगांठ मना रहा है. ऐसे में, लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री मोदी ने देश को संबोधित किया. उन्होंने अपने संबोधन में 'दिमागी नक्सल' शब्द का इस्तेमाल किया. कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि 2-3 साल पहले तक प्रधानमंत्री अर्बन नक्सल शब्द का इस्तेमाल करते थे. जब संसद में पूछा गया कि अर्बन नक्सल की परिभाषा क्या है तो गृह मंत्री ने कहा 'अर्बन नक्सल' जैसी कोई चीज़ नहीं है और न ही इसकी कोई परिभाषा है.
कांग्रेस नेता का कहना है कि प्रधानमंत्री जिन्हें अर्बन नक्सल कहते थे उनकी ही मांगों को बाद में उन्होंने माना. उन्होंने दावा किया कि जाति जनगणना को 2-3 साल पहले तक अर्बन नक्सल की सोच बताया जाता था. लेकिन 1 साल पहले सरकार ने जाति जनगणना का फैसला लिया. उन्होंने कहा कि यह प्रधानमंत्री का पुराना तरीका है, वे पहले अर्बन नक्सल, दिमागी नक्सल शब्द का इस्तेमाल करते हैं और फिर बाद में उनकी मांगों को मानते हैं.
जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री मोदी के भाषण को राजनीतिक भाषण बताया है. उनका कहना है कि प्रधानमंत्री के भाषण में कुछ नया नहीं था. वे पहले जो दावे करते थे, अभी भी वही दावे कर रहे हैं.
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बता दें, स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री ने दिमागी नक्सल शब्द का इस्तेमाल किया. उन्होंने कहा कि कुछ लोग समाज को गलत दिशा में ले जाने के लिए तरह-तरह के दांव चल रहे हैं और ऐसे तत्वों को पहचानना जरूरी है.
पीएम मोदी ने कहा कि हमने नक्सलवाद खत्म करने का संकल्प लिया था. 21वीं सदी में दशकों पुरानी चुनौतियों को खत्म करना अनिवार्य है. नक्सलवाद और माओवाद ने लाखों युवाओं के भविष्य को तबाह कर दिया. अनेक माताओं के दूधमय नवजातों को छीन लिया, मां-बाप के सपनों को चूर-चूर कर दिया.