देश के पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने पंडित जवाहरलाल नेहरू के एक पुराने बयान का जिक्र किया है. एजी नूरानी मेमोरियल लेक्चर में उन्होंने कहा कि नेहरू ने भारत के लिए साम्यवाद नहीं, बल्कि हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता को खतरा बताया था. अंसारी ने यह बात एजी नूरानी की किताब The RSS: A Menace to India का हवाला देते हुए कही.
अंसारी ने मंच से नेहरू के हवाले से कहा, ''भारत के लिए खतरा साम्यवाद नहीं है, यह हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता है.'' उन्होंने बताया कि नूरानी ने अपनी किताब के परिचय में नेहरू की इस टिप्पणी का जिक्र किया था. यह टिप्पणी विदेश मंत्रालय के अधिकारियों की एक बैठक से जुड़ी बताई गई है.
नूरानी की किताब का जिक्र क्यों?
हामिद अंसारी का भाषण मुख्य रूप से एजी नूरानी के जीवन, लेखन और उनके विचारों पर था. इसी दौरान उन्होंने नूरानी की 2019 में प्रकाशित किताब The RSS: A Menace to India का जिक्र किया. अंसारी ने इसे नूरानी की प्रमुख किताबों में से एक बताया. उन्होंने किताब के परिचय में लिखी बातों का संदर्भ दिया. इसी हिस्से में नूरानी ने नेहरू की उस टिप्पणी का उल्लेख किया था, जिसे अंसारी ने कार्यक्रम में पढ़कर सुनाया.
अंसारी के मुताबिक, नूरानी ने अपनी किताब में नेहरू की टिप्पणी को विदेश मंत्रालय के अधिकारियों की एक बैठक से जोड़ा था. यह रिकॉर्ड तत्कालीन विदेश सचिव गुंडेविया से जुड़ा बताया गया है. अंसारी ने उसी रिकॉर्ड के हवाले से नेहरू की बात सामने रखी. यानी कार्यक्रम में कही गई यह बात अंसारी का अपना बयान नहीं थी. उन्होंने इसे नूरानी की किताब में दर्ज नेहरू के पुराने कथन के तौर पर पेश किया.
अंसारी ने आज के संदर्भ का भी जिक्र किया
अपने भाषण में अंसारी ने नूरानी के लेखन के जरिए भारत में राष्ट्रवाद, पहचान और राजनीति से जुड़े मुद्दों पर भी बात की. उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में ऐसी प्रवृत्तियां सामने आई हैं, जो नागरिक राष्ट्रवाद की स्थापित सोच पर सवाल उठाती हैं. अंसारी ने इसके साथ सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का भी जिक्र किया. उनके मुताबिक, ऐसी सोच चुनावी बहुमत को धार्मिक बहुमत के रूप में पेश करती है. उन्होंने कहा कि इन प्रवृत्तियों का राजनीतिक तथा कानूनी स्तर पर मुकाबला किया जाना चाहिए.
एजी नूरानी मेमोरियल लेक्चर में हामिद अंसारी ने नूरानी की किताब The RSS: A Menace to India का जिक्र किया. यह किताब साल 2019 में प्रकाशित हुई थी. अंसारी ने इसी किताब के परिचय में दर्ज जवाहरलाल नेहरू के एक पुराने बयान को अपने भाषण में सामने रखा.