देश की राजनीति में 'दिमागी नक्सली' शब्द को लेकर बवाल मचा हुआ है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से इस शब्द का इस्तेमाल किए जाने के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस छिड़ गई है. इस पर पूर्व गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक तीखी प्रतिक्रिया दी.
पूर्व गृह मंत्री ने तंज कसते हुए लिखा कि उन्हें 'दिमागी नक्सली' होने पर गर्व है. उनके इस बयान के बाद सियासी गलियारों में चर्चा का दौर जारी है.
पूर्व गृह मंत्री पी. चिदंबरम के इस ट्वीट पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कड़ा ऐतराज जताया है. किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर करते हुए इसे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बयान बताया.
उन्होंने कहा कि देश के पूर्व गृह मंत्री जैसे जिम्मेदार पद पर रहे नेता का ऐसा बयान शोभा नहीं देता है. रिजिजू ने साफ किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसी भी विपक्षी नेता को 'दिमागी नक्सली' नहीं कहा था.
पीएम मोदी ने स्वतंत्रता दिवस संबोधन में किया था जिक्र
दरअसल, 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से दिए अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा था, 'हथियारी नक्सल तो गए, लेकिन दिमागी नक्सल मौके की तलाश में हैं. हिंसा अराजकता के वो रास्ते खोज रहे हैं. इन दिमागी नक्सलियों को पहचानना होगा. इन दिमागी नक्सलियों को आइसोलेट करना होगा. राष्ट्र को विकसित राष्ट्र बनाने की मुख्यधारा की ओर देश की युवा पीढ़ी को जोड़ना होगा.
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने देश के सामने यह साफ किया कि प्रधानमंत्री के इस बयान का असल मतलब क्या था. उन्होंने बताया कि 'दिमागी नक्सली' देश के आम राजनीतिक नेताओं को नहीं कहा गया है. उन्होंने कहा कि ये उन खास विचारधारा वाले लोगों को कहा गया है जो देश की एकता के खिलाफ काम करते हैं.
रिजिजू ने इसके लिए साफ तौर से तीन कैटेगरी गिनाई हैं, जो इस दायरे में आती हैं. उन्होंने एक्स पर ट्वीट कर लिखा, 'दिमागी नक्सली वे लोग हैं जो माओवादियों का समर्थन करते हैं. जो भारत के संविधान को पूरी तरह से नकारते हैं. इसके अलावा, जो लोग देश के अलगाववादियों के साथ खड़े होते हैं. अनुच्छेद 370 को हटाने का विरोध करते हैं, वे भी इसी कैटेगरी में आते हैं.
केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि जो लोग भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को देश के बाकी हिस्सों से अलग करने के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण 'चिकन नेक' को काटने जैसी खतरनाक बातें सोचते हैं, उन्हें ही 'दिमागी नक्सली' कहा गया है.
रविशंकर प्रसाद, हर्ष संघवी ने पी. चिदंबरम पर साधा निशाना
पी. चिदंबरम के मैं हूं दिमागी नक्सली वाले बयान पर बीजेपी ने तीखा हमला बोला है. वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने कहा कि चिदंबरम के गृह मंत्री रहते हुए देश में नक्सलवाद का सबसे ज्यादा विस्तार हुआ था. उनके कार्यकाल में बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी शहीद हुए थे.
उन्होंने कहा कि आज ऐसा बयान देना बेहद शर्मनाक है. इससे यह साबित होता है कि कांग्रेस पार्टी चिदंबरम को नक्सलवाद और माओवाद के समर्थन का चेहरा बना रही है.
वहीं गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने भी यूपीए सरकार के कार्यकाल के आंकड़े सामने रखते हुए कांग्रेस को घेरा. उन्होंने कहा कि अब साफ हो गया है कि चिदंबरम के कार्यकाल में नक्सलवाद क्यों फला-फूल था, क्योंकि उस दौरान हजारों जवानों और नागरिकों की जान गई थी. पुलिस के शस्त्रागारों से हथियार लूटे गए थे. देश के सैकड़ों जिले नक्सली हिंसा की गिरफ्त में रहे थे.
इस पूरे विवाद ने देश की राजनीति में एक नया भूचाल ला दिया है। एक तरफ जहां कांग्रेस नेता सरकार की नीतियों पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बीजेपी के नेता इसका कड़ा जवाब दे रहे हैं.