राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) और आसपास के इलाकों में बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने पंजाब और हरियाणा सरकार को पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं. आयोग ने साफ किया है कि पराली प्रबंधन से जुड़ी योजनाओं को केवल कागजों तक सीमित रखने के बजाय जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू करना होगा.
इसके साथ ही वाहनों, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल और औद्योगिक इकाइयों से होने वाले प्रदूषण पर भी निगरानी बढ़ाने को कहा गया है. सर्दियों में वायु प्रदूषण की स्थिति को नियंत्रित करने के लिए दोनों राज्यों के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की गई. आयोग ने किसानों को पराली प्रबंधन की मशीनें उपलब्ध कराने और उनके इस्तेमाल को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया.
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के अध्यक्ष राजेश वर्मा की अध्यक्षता में गुरुवार को चंडीगढ़ में पंजाब और हरियाणा के अधिकारियों के साथ अलग-अलग बैठकें हुईं. इन बैठकों में पराली प्रबंधन, फसल अवशेष प्रबंधन (CRM) मशीनों के इस्तेमाल और प्रदूषण नियंत्रण के लिए राज्यों की ओर से लागू की जा रही कार्ययोजनाओं की समीक्षा की गई.
आयोग ने पराली जलाने की घटनाओं पर निगरानी रखने और उन्हें रोकने के लिए अपनाए जा रहे तरीकों का भी जायजा लिया. अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े उपायों को तय समयसीमा के भीतर लागू किया जाए और उनके प्रभाव की लगातार निगरानी की जाए.
पंजाब में हुई बैठक के दौरान धान की पराली के प्रबंधन के लिए उपलब्ध मशीनों की संख्या, उनकी तैनाती और किसानों की ओर से उनके इस्तेमाल की समीक्षा की गई. आयोग ने मशीनों के उपयोग में सामने आ रही कमियों को दूर करने के निर्देश दिए. साथ ही पराली के संग्रह, परिवहन और उसके उचित निस्तारण की व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया गया.
आयोग का कहना है कि पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए किसानों को जरूरी संसाधन उपलब्ध कराना और मौजूदा व्यवस्थाओं का प्रभावी इस्तेमाल सुनिश्चित करना जरूरी है. पराली जलाने की घटनाओं का पता लगाने और उन पर कार्रवाई के लिए उपग्रह आधारित अलर्ट, ड्रोन और कम लागत वाले सेंसरों के इस्तेमाल की भी समीक्षा की गई.
इन तकनीकों के जरिए खेतों में पराली जलाने की घटनाओं पर नजर रखने और संबंधित अधिकारियों तक सूचना पहुंचाने की व्यवस्था पर चर्चा हुई. इसके अलावा आयोग ने ईंट भट्ठों में पराली से तैयार बायोमास पेलेट्स और ब्रिकेट्स के इस्तेमाल की प्रगति का आकलन किया. ताप विद्युत संयंत्रों में कोयले के साथ बायोमास जलाने यानी को-फायरिंग से जुड़े लक्ष्यों की भी समीक्षा की गई, ताकि पराली के वैकल्पिक उपयोग को बढ़ावा मिल सके.
हरियाणा के अधिकारियों के साथ बैठक में पराली जलाने के अलावा प्रदूषण के अन्य स्रोतों पर भी चर्चा हुई. इसमें वाहनों से निकलने वाला धुआं, सड़कों और खुले क्षेत्रों की धूल, निर्माण एवं विध्वंस गतिविधियों से होने वाला प्रदूषण और औद्योगिक इकाइयों का उत्सर्जन शामिल रहा.
आयोग ने ईंधन और CNG स्टेशनों पर स्वचालित नंबर प्लेट पहचान प्रणाली (ANPR) के जरिए वाहनों के वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUCC) की जांच से जुड़े नियमों के पालन की समीक्षा की. इसके साथ ही निर्धारित आयु पूरी कर चुके वाहनों के खिलाफ कार्रवाई और डीजल ऑटो रिक्शा को चरणबद्ध तरीके से हटाने की प्रगति का भी जायजा लिया गया.
आयोग ने सड़कों पर जमा धूल को नियंत्रित करने के लिए मशीनीकृत सफाई की व्यवस्था पर जोर दिया. निर्माण और विध्वंस स्थलों पर धूल उड़ने से रोकने के उपायों को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश भी दिए गए. इसके अलावा औद्योगिक इकाइयों को निर्धारित पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित करने को कहा गया. आयोग ने प्रदूषण के सभी प्रमुख स्रोतों पर एक साथ कार्रवाई करने की जरूरत बताई, ताकि वायु गुणवत्ता में सुधार के प्रयासों को प्रभावी बनाया जा सके.
CAQM ने पंजाब और हरियाणा को अपनी कार्ययोजनाओं को समयबद्ध तरीके से लागू करने के निर्देश दिए हैं. आयोग ने जिला प्रशासन और संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय बनाने के साथ किसानों को पराली प्रबंधन के प्रति जागरूक करने पर भी जोर दिया. आयोग ने चेतावनी दी कि यदि लापरवाही के कारण पराली जलाने की घटनाओं में बढ़ोतरी होती है, तो इसे गंभीरता से लिया जाएगा.
इसके साथ ही राज्यों को निगरानी व्यवस्था मजबूत करने और पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए जमीनी स्तर पर सक्रिय रहने को कहा गया है. आयोग ने कहा कि पराली को केवल प्रदूषण का कारण मानने के बजाय उपयोगी संसाधन के रूप में विकसित करने की जरूरत है. इसके लिए पराली से बायोमास आधारित ईंधन तैयार करने और उसके औद्योगिक इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जा सकता है.
ईंट भट्ठों और ताप विद्युत संयंत्रों में बायोमास के उपयोग को बढ़ावा देना इसी दिशा में उठाए जाने वाले कदमों में शामिल है. आयोग के मुताबिक, इससे पराली के वैकल्पिक इस्तेमाल और चक्रीय अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन मिल सकता है. सर्दियों में वायु प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण के लिए पंजाब, हरियाणा और संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वित प्रयास जरूरी हैं.