नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर (NSA) अजीत डोभाल ने सोमवार को ईरान के सीनियर सिक्योरिटी अफसर गदीर नेजामीपुर के साथ अहम बैठक की है. इस मुलाकात में वेस्ट एशिया में तेजी से बदल रहे सुरक्षा माहौल और क्षेत्रीय हालात पर चर्चा हुई. गदीर ईरान की पावरफुल सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल (SNSC) में डिफेंस अफेयर्स के डिप्टी सेक्रेटरी हैं.
गदीर नेजामीपुर BRICS के सिक्योरिटी कॉन्क्लेव में हिस्सा लेने के लिए दिल्ली पहुंचे हैं. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि दोनों पक्षों ने वेस्ट एशिया के हालात का रिव्यू किया. BRICS प्लेटफॉर्म के तहत सहयोग और आपसी रिश्तों पर भी चर्चा हुई. US के साथ समझौता वार्ता के बाद ये ईरान के किसी बड़े अधिकारी का यह पहला भारत दौरा है.
BRICS देशों के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर्स मंगलवार को क्षेत्रीय सुरक्षा हालात पर विस्तृत चर्चा करेंगे. यह सिक्योरिटी कॉन्क्लेव सोमवार से शुरू हो रहा है. इसकी अध्यक्षता NSA अजीत डोभाल करेंगे. भारत मौजूदा समय में BRICS की अध्यक्षता कर रहा है. इसी भूमिका में इस महत्वपूर्ण बैठक की मेजबानी की जा रही है. इसमें चीन, रूस समेत कई देश हिस्सा ले रहे हैं.
इस बैठक में चीन के विदेश मंत्री वांग यी, रूस के NSA सर्गेई शोइगु और BRICS देशों के अन्य टॉप सिक्योरिटी अधिकारी शामिल होंगे. BRICS की शुरुआत ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के साथ हुई थी. साल 2024 में इसमें मिस्र, इथियोपिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात को शामिल किया गया. इसके बाद 2025 में इंडोनेशिया भी इसका हिस्सा बना.
BRICS अब दुनिया के सबसे प्रभावशाली समूहों में शामिल हो चुका है. यह 11 बड़ी उभरती अर्थव्यवस्थाओं को एक मंच पर लाता है, जो दुनिया की करीब 49.5 प्रतिशत आबादी, लगभग 40 प्रतिशत ग्लोबल GDP और करीब 26 प्रतिशत ग्लोबल ट्रेड का प्रतिनिधित्व करती हैं. BRICS सिक्योरिटी कॉन्क्लेव में दुनिया के रीजनल सिक्योरिटी सिनेरियो पर भी चर्चा होने की उम्मीद है.
भारत इस बैठक में आतंकवाद के मुद्दे को प्रमुखता से उठा सकता है. इसमें पाकिस्तान में मौजूद आतंकी संगठनों की गतिविधियां और जम्मू-कश्मीर को निशाना बनाकर होने वाली बॉर्डर पार आतंकवादी गतिविधियां शामिल हैं. सूत्रों के मुताबिक, बातचीत में पाकिस्तान-अफगानिस्तान के बीच बढ़ते तनाव और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों पर भी चर्चा हो सकती है.
इससे पहले मई में हुई BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक बिना किसी संयुक्त बयान के खत्म हुई थी. उस दौरान वेस्ट एशिया संघर्ष को लेकर ईरान और UAE के बीच मतभेद सामने आए थे. BRICS आम सहमति के फ्रेमवर्क पर काम करता है. भारत ने उस समय चेयर का स्टेटमेंट और आउटकम डॉक्यूमेंट जारी किया था. इसमें दो खास पैराग्राफ पर सहमति नहीं बन पाई थी.