राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले का खुलासा होने के बाद जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है. आठ आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस और विशेष जांच दल (एसआईटी) की पूछताछ में कई नए सुराग मिलने का दावा किया जा रहा है. सूत्रों के मुताबिक, अब मंदिर में हुई कुछ भर्तियों में रिश्वतखोरी के आरोपों की भी जांच शुरू कर दी गई है. इसके साथ ही निर्माण कार्यों में कमीशनखोरी से जुड़े आरोपों की भी पड़ताल की जा रही है. इससे पहले राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने भी राम मंदिर ट्रस्ट की जमीन खरीद में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए कुछ दस्तावेज एसआईटी को सौंपे हैं. हालांकि, इन सभी मामलों की जांच अभी जारी है और किसी भी आरोप की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
चढ़ावा चोरी में आरोपियों के यहां से लाखों रुपये नकद बरामद
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में गिरफ्तार आरोपियों के ठिकानों से बड़ी मात्रा में कैश और अन्य सामान बरामद होने का दावा किया गया है. जांच में सबसे अधिक कैश आरोपी अविनाश शुक्ला के यहां से मिली, जहां से 20.39 लाख रुपये नकद बरामद किए गए. इसके अलावा 1121 अमेरिकी डॉलर, लगभग 159.54 ग्राम चांदी जैसी धातु, 8.14 ग्राम पीली धातु की चेन और 3.44 ग्राम का एक अन्य आभूषण भी बरामद किया गया. इसके बाद करुणेश पाण्डेय के यहां से 18.07 लाख रुपये, अनुकल्प मिश्रा के यहां से 16.82 लाख रुपये, लवकुश मिश्रा के यहां से 14.25 लाख रुपये और रामाशंकर मिश्रा के यहां से 7.32 लाख रुपये नकद बरामद होने की जानकारी सामने आई. वहीं मनीष कुमार यादव के यहां से दो लाख रुपये तथा रामशंकर यादव उर्फ टिंकू के हॉस्टल के कमरे से एक लाख रुपये नकद बरामद किए गए.
भर्ती प्रक्रिया भी जांच के दायरे में
चढ़ावा चोरी की जांच के दौरान अब मंदिर में हुई नियुक्तियों की प्रक्रिया भी जांच के दायरे में आ गई है. सूत्रों के मुताबिक, पुलिस उन आरोपों की जांच कर रही है जिनमें दावा किया गया है कि मंदिर में नौकरी दिलाने के नाम पर कुछ लोगों से पैसे लिए गए थे. बताया जा रहा है कि गिरफ्तार आरोपी अविनाश शुक्ला से पूछताछ के दौरान जांच एजेंसियों को कुछ ऐसे इनपुट मिले, जिनके आधार पर नियुक्तियों से जुड़े दस्तावेजों और प्रक्रिया की भी पड़ताल शुरू की गई. पुलिस यह जांच कर रही है कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के अनुरूप हुई थी या नहीं.
सूत्रों के अनुसार, जांच में यह दावा भी सामने आया है कि मंदिर प्रतिष्ठान में विभिन्न पदों पर करीब 125 कर्मचारियों की नियुक्ति हुई थी. आरोप है कि इनमें से कुछ उम्मीदवारों ने नौकरी पाने के लिए पैसे दिए थे. हालांकि पुलिस अभी इन दावों का सत्यापन कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन आरोपों में कितनी सच्चाई है. जांच एजेंसियों ने भर्ती से जुड़े रिकॉर्ड भी खंगालने शुरू कर दिए हैं. शुरुआती पड़ताल में कुछ कर्मचारियों के नियुक्ति पत्र, सेवा अनुबंध और अन्य दस्तावेज तत्काल उपलब्ध नहीं मिलने की बात सामने आई है. अब प्रत्येक नियुक्ति, उससे जुड़े दस्तावेज और पूरी प्रक्रिया की अलग-अलग जांच की जा रही है.
निर्माण कार्यों से जुड़े आरोपों की भी पड़ताल
सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी अब मंदिर निर्माण कार्यों में कथित कमीशनखोरी से जुड़े आरोपों की भी जांच कर रही है. इसके अलावा दान में मिले आभूषणों और अन्य बहुमूल्य वस्तुओं के रिकॉर्ड की भी समीक्षा की जा रही है. सूत्रों का दावा है कि कुछ प्रक्रियाओं को लेकर सवाल उठे हैं, जिनकी जांच की जा रही है. बताया जा रहा है कि एसआईटी ने ट्रस्ट के पिछले पांच वर्षों के ऑडिट रिकॉर्ड की भी विस्तृत समीक्षा करने का निर्णय लिया है. जांच एजेंसियां वित्तीय लेनदेन और संबंधित दस्तावेजों का मिलान कर रही हैं. हालांकि अभी तक किसी भी स्तर पर किसी अनियमितता की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है.
जमीन खरीद को लेकर भी उठे सवाल
चढ़ावा चोरी के खुलासे से पहले से राज्यसभा सांसद संजय सिंह राम मंदिर ट्रस्ट की जमीन खरीद को लेकर कथित अनियमितताओं के आरोप लगाते रहे हैं. उन्होंने दावा किया है कि उनके पास 13 जमीनों से जुड़े दस्तावेज हैं और इनमें से दो मामलों का आपस में संबंध है. संजय सिंह ने इन दस्तावेजों को एसआईटी को सौंप दिया है. उनका आरोप है कि ट्रस्ट ने कुछ जमीनों की खरीद बाजार मूल्य से अधिक कीमत पर की, जबकि मंदिर के नजदीक की कुछ जमीनें अपेक्षाकृत कम कीमत पर खरीदी गईं. उन्होंने इन सभी लेनदेन की निष्पक्ष जांच की मांग की है. हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पक्ष की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. एसआईटी इन दस्तावेजों और दावों की भी जांच कर रही है.