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'बच्चों को रातोंरात स्कूलों से नहीं निकाल सकते', बॉम्बे हाई कोर्ट ने 14 स्कूलों को दी राहत

बॉम्बे हाई कोर्ट ने मुंबई के मलाड इलाके में संचालित 14 गैरमान्यता प्राप्त स्कूलों को शैक्षणिक सत्र 2026-27 के अंत तक पढ़ाई जारी रखने की अनुमति दी है. अदालत ने कहा कि वंचित और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को रातोंरात स्कूलों से नहीं हटाया जा सकता.

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अदालत ने स्पष्ट किया कि स्कूलों को पढ़ाई जारी रखने की अनुमति देने का मतलब यह नहीं है कि वे कानूनी जरूरतों से मुक्त हो गए हैं (फोटो-ITG)
अदालत ने स्पष्ट किया कि स्कूलों को पढ़ाई जारी रखने की अनुमति देने का मतलब यह नहीं है कि वे कानूनी जरूरतों से मुक्त हो गए हैं (फोटो-ITG)

बॉम्बे हाई कोर्ट ने मुंबई के मलाड इलाके में संचालित 14 कथित गैरमान्यता प्राप्त स्कूलों को बड़ी राहत दी है. अदालत ने बुधवार को कहा कि वंचित और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के एक हजार से अधिक बच्चों को रातोंरात उनके स्कूलों से नहीं हटाया जा सकता. हाई कोर्ट ने इन स्कूलों को शैक्षणिक सत्र 2026-27 के अंत तक पढ़ाई जारी रखने की अनुमति दी है. हालांकि, अदालत ने स्कूल प्रबंधन को इस दौरान बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) से आवश्यक मान्यता और अनुमति हासिल करने के निर्देश भी दिए हैं.

बॉम्बे हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एमसी त्रिपाठी और जस्टिस अद्वैत एम सेठना की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि इन स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे पहली से चौथी कक्षा के हैं. इतनी कम उम्र में बच्चों को एक स्कूल से दूसरे स्कूल में भेजना उचित नहीं होगा. अदालत ने बीएमसी को निर्देश दिया कि वह यह सुनिश्चित करने का प्रयास करे कि कानूनी रूप से संभव होने पर इन संस्थानों को मान्यता मिल सके, ताकि बच्चों को दूसरे स्कूलों में स्थानांतरित करने की नौबत न आए.

'बच्चों के भविष्य को अंधकार में नहीं डाल सकते'

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा कि अदालत की प्राथमिक चिंता बच्चों की शिक्षा है. उन्होंने कहा कि कमजोर और वंचित वर्गों से आने वाले परिवार अक्सर यह जांच नहीं कर पाते कि स्कूल को सरकारी मान्यता प्राप्त है या नहीं. वे केवल इतना देखते हैं कि स्कूल में शिक्षक हैं और उनके बच्चों को बुनियादी शिक्षा मिल रही है. चीफ जस्टिस ने टिप्पणी की, 'हम इन बच्चों के भविष्य को अंधकार में नहीं डाल सकते. हमें उनकी शिक्षा की चिंता है.'

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अदालत ने कहा कि स्कूलों को तुरंत बंद करने के बजाय यह देखना जरूरी है कि उन्हें नियमानुसार मान्यता मिल सकती है या नहीं. यदि ऐसा संभव नहीं होता, तो आसपास के दूसरे स्कूलों में बच्चों के दाखिले के विकल्प पर विचार किया जा सकता है.

2017 से नोटिस जारी, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई

मामले की सुनवाई के दौरान बीएमसी की ओर से दाखिल हलफनामे का भी परीक्षण किया गया. अदालत ने पाया कि मलाड पश्चिम के मालवणी इलाके में संचालित सभी 14 स्कूल गैरमान्यता प्राप्त हैं. इन संस्थानों को वर्ष 2017 से नोटिस जारी किए जा रहे थे, लेकिन इनके खिलाफ कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई.

हाई कोर्ट ने कहा कि ये संस्थान वर्ष 2009 से संचालित हो रहे हैं. इतने लंबे समय तक स्कूलों के संचालन की अनुमति जैसी स्थिति बने रहने के बाद अचानक उन्हें बंद करना बच्चों के हित में नहीं होगा. पीठ ने टिप्पणी की, '2017 से नोटिस जारी किए जा रहे हैं, लेकिन कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया. बदलाव धीरे-धीरे होना चाहिए. आप किसी को रातोंरात नहीं हटा सकते.'

स्कूलों को मान्यता के लिए आवेदन करने का निर्देश

अदालत ने स्पष्ट किया कि स्कूलों को पढ़ाई जारी रखने की अनुमति देने का मतलब यह नहीं है कि वे कानूनी जरूरतों से मुक्त हो गए हैं. पीठ ने कहा कि सभी संस्थानों को न्यूनतम पात्रता और निर्धारित मानकों को पूरा करना होगा. इसके बाद उन्हें आवश्यक अनुमति के लिए आवेदन करना होगा और निर्धारित शुल्क जमा करना होगा.

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अदालत ने यह भी कहा कि स्कूलों में पढ़ाने वाले प्रत्येक शिक्षक के पास न्यूनतम निर्धारित शैक्षणिक योग्यता होनी चाहिए. शिक्षकों को बच्चों की जरूरतों और उनकी शिक्षा से जुड़े पहलुओं की समझ भी होनी चाहिए, ताकि छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो.

स्कूल बंद करने की मांग पर क्या बोला हाई कोर्ट?

सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता मिलिंद साठे ने नियमों का पालन नहीं करने वाले स्कूलों को बंद करने का आग्रह किया. इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि अदालत फिलहाल जमीन और शिक्षकों से जुड़े सभी विवादों का दायरा बढ़ाना नहीं चाहती. इस समय मुख्य चिंता बच्चों की शिक्षा है.

हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि अगर इन संस्थानों को नियमानुसार मान्यता नहीं मिलती, तो उन्हें बंद करना होगा. स्कूलों का संचालन कानून के मुताबिक ही होना चाहिए. पीठ ने कहा कि इस मामले में किसी को दोष देने के बजाय व्यावहारिक समाधान तलाशने की जरूरत है.

15 जनवरी को होगी अगली सुनवाई

यह मामला मलाड निवासी नजीर बशीर खान की जनहित याचिका से जुड़ा है. याचिका में बीएमसी की ओर से 14 स्कूलों को वैकल्पिक व्यवस्था किए बिना बंद करने की कार्रवाई को चुनौती दी गई थी. इससे पहले 30 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान भी हाई कोर्ट ने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता जताई थी और संकेत दिया था कि उन्हें मौजूदा शैक्षणिक सत्र पूरा करने के लिए राहत दी जा सकती है. अब अदालत ने स्कूलों को शैक्षणिक सत्र 2026-27 के अंत तक पढ़ाई जारी रखने की अनुमति देते हुए मान्यता प्राप्त करने की प्रक्रिया पूरी करने को कहा है. इस मामले की अगली सुनवाई 15 जनवरी 2027 को होगी.

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