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पीठ पर गिटार था... AI कैमरे को लगा- बिना हेलमेट आदमी बैठा है... काट दिया 500 का चालान, बेंगलुरु की कहानी

बेंगलुरु में एक बाइक सवार की पीठ पर टंगा गिटार AI ट्रैफिक कैमरे को इंसान नजर आया. कैमरे ने समझा कि बाइक पर पीछे बिना हेलमेट पिलियन राइडर बैठा है और 500 का चालान काट दिया. बाइक सवार ने सोशल मीडिया पर मामला शेयर किया तो AI की ये अजीबोगरीब गलती वायरल हो गई.

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ट्रैफिक AI के कैमरे ने गिटार को समझा इंसान. (Photo: Twitter@souvikonline)
ट्रैफिक AI के कैमरे ने गिटार को समझा इंसान. (Photo: Twitter@souvikonline)

सोचिए, आप बाइक चला रहे हैं. हेलमेट आपने पहन रखा है. बाइक पर आपके अलावा कोई नहीं है. बस पीठ पर एक गिटार टंगा है. आप आराम से अपनी मंजिल की तरफ जा रहे हैं. तभी कुछ दिन बाद आपके पास चालान पहुंचता है. वजह पढ़ते ही आप अपना सिर पकड़ लें - 'पिलियन राइडर बिना हेलमेट.' अब सवाल उठता है कि भाई, पीछे बैठा कौन था? जवाब है - कोई था ही नहीं. पीछे एक गिटार था.

बेंगलुरु में AI वाले ट्रैफिक कैमरे ने गिटार को ही पीछे बैठा इंसान समझ लिया और 500 का चालान काट दिया. मामला सोशल मीडिया पर पहुंचा तो कहानी वायरल हो गई. कहानी शुरू होती है एक बाइक से. बेंगलुरु की सड़क. बाइक पर एक आदमी. और उसकी पीठ पर एक गिटार. अब तक सब नॉर्मल है. गिटार लेकर कोई संगीतकार निकले या कोई शौकिया गिटार बजाने वाला, इसमें ऐसी कोई बात नहीं जो ट्रैफिक कैमरे को परेशान करे. लेकिन कैमरा शायद कुछ और ही सोच रहा था. 

सौविक दत्ता अपनी पत्नी के दोपहिया वाहन से अकेले जा रहे थे. उन्होंने हेलमेट पहन रखा था और गिटार उनकी पीठ पर टंगा हुआ था. यानी बाइक पर वे अकेले थे. लेकिन ट्रैफिक सिस्टम की नजर में कहानी कुछ और बन गई. सिस्टम ने शायद गिटार को देखा. फिर उसकी आकृति देखी. फिर बाइक पर बैठे व्यक्ति की पोजिशन देखी. और फैसला कर दिया - पीछे एक और आदमी बैठा है. अब अगला सवाल था - उस आदमी ने हेलमेट पहना है या नहीं? सिस्टम का जवाब आया - नहीं. और फिर जो होना था, वो हो गया.

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सौविक दत्ता के मुताबिक, उनकी पत्नी के नाम रजिस्टर्ड बाइक पर चालान आया. वजह थी - पिलियन राइडर का बिना हेलमेट होना. अब जरा इस सीन की कल्पना कीजिए. आपके हाथ में चालान है. उसमें लिखा है कि पीछे बैठा शख्स बिना हेलमेट घूम रहा था. आप अपने पीछे देखते हैं. वहां कोई शख्स है ही नहीं. वहां आपका गिटार है. यानी मशीन की नजर में गिटार आदमी बन चुका था. और आदमी के लिए सवाल ये था कि अब मशीन को समझाएं कैसे कि भाई, ये इंसान नहीं है.

सौविक ने सोशल मीडिया पर अपनी परेशानी शेयर की. उन्होंने बेंगलुरु ट्रैफिक पुलिस को टैग किया और बताया कि वह अकेले बाइक चला रहे थे और गिटार उनकी पीठ पर था. उन्होंने AI वाले ट्रैफिक सिस्टम पर भी सवाल उठाया और चालान रद्द करने की अपील की. मामला सोशल मीडिया पर पहुंचा तो लोगों ने भी कमेंट किए. किसी ने इसे AI की मजेदार गलती माना. किसी ने सवाल उठाया कि जब मशीन किसी चीज को गलत पहचान लेती है तो उसकी जांच कौन करता है. 

आखिर AI को गिटार में आदमी क्यों दिखा?

AI को हम अक्सर ऐसे समझते हैं जैसे उसके पास इंसानों जैसी आंखें हैं. लेकिन ऐसा नहीं है. ट्रैफिक कैमरे से मिलने वाली तस्वीर को सिस्टम कुछ खास पैटर्न और संकेतों के आधार पर पढ़ता है. उसे बाइक पर सवार व्यक्ति, दूसरे व्यक्ति की मौजूदगी और हेलमेट जैसी चीजों को पहचानना होता है.

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कई बार ये सिस्टम बहुत तेजी से हजारों वाहनों के बीच संभावित नियमों की अनदेखी करने वालों को पकड़ सकता है. लेकिन समस्या तब आती है, जब तस्वीर में कोई ऐसी चीज दिखाई दे, जिसे सिस्टम अपनी ट्रेनिंग के आधार पर किसी दूसरी चीज से जोड़ दे.

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बेंगलुरु के इस मामले में गिटार और उसका कवर शायद इसी तरह सिस्टम को कन्फ्यूज कर गया. इंसान ने तस्वीर देखी तो उसे गिटार नजर आया. AI ने तस्वीर देखी तो उसे शायद पिलियन राइडर नजर आया. बस यहीं मशीन और इंसान की नजर अलग हो गई.

पहली नजर में ये कहानी हंसाती है. सच कहें तो है भी. क्योंकि एक गिटार को बिना हेलमेट वाला आदमी समझ लेना अपने आप में अजीब है. लेकिन अगर आप इसे थोड़ा गंभीर होकर देखें तो मामला सिर्फ मजाक का नहीं है.

मान लीजिए AI किसी गाड़ी को गलत पहचान ले. या नंबर प्लेट गलत पढ़ ले. या किसी ऐसी चीज को ट्रैफिक उल्लंघन मान ले, जो असल में उल्लंघन है ही नहीं. तब क्या होगा? जिसके नाम वाहन है, उसके पास चालान पहुंचेगा. फिर उसे साबित करना होगा कि सिस्टम से गलती हुई. यानी तकनीक जितनी तेजी से गलती पकड़ती है, उतनी ही तेजी से उसे सुधारने का रास्ता भी होना चाहिए.

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टेक सिटी बेंगलुरु में AI का ये कैसा कमाल?

बेंगलुरु को टेक्नोलॉजी के लिए जाना जाता है. AI की बात हो. ऑटोमेशन की बात हो. स्मार्ट सिस्टम की बात हो. बेंगलुरु का नाम सामने आता है. लेकिन इसी शहर में एक ट्रैफिक कैमरा गिटार और इंसान के बीच फर्क नहीं कर पाया. जिस तकनीक का मकसद ट्रैफिक नियमों को ज्यादा स्मार्ट तरीके से लागू करना है, उसी तकनीक ने एक ऐसे व्यक्ति को चालान थमा दिया जो दावा कर रहा है कि उसने नियम तोड़ा ही नहीं.

रिपोर्टों के मुताबिक, बेंगलुरु ट्रैफिक पुलिस AI से जुड़े गलत डिटेक्शन की संभावना को देखते हुए मैनुअल वैलिडेशन की जरूरत पर भी काम कर रही है. और यही सबसे अहम बात है. क्योंकि मशीन कितनी भी स्मार्ट क्यों न हो, सड़क पर किसी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई का सवाल आता है तो अंतिम व्यवस्था में इंसानी जांच की भूमिका काफी महत्वपूर्ण हो जाती है.

पूरी कहानी में अगर किसी की कोई गलती नहीं है, तो वो गिटार है. न उसने ट्रैफिक नियम तोड़ा. न उसने हेलमेट उतारा. वो तो बस पीठ पर टंगा हुआ था. लेकिन कैमरे की नजर में वही बाइक का दूसरा सवार बन गया. और फिर उसे हेलमेट न पहनने का आरोप भी मिल गया. सोशल मीडिया पर सौविक ने इसी गलती की तरफ ध्यान दिलाया.

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अब आगे चालान का क्या होता है, ये अलग बात है. लेकिन इस एक घटना ने एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है. जब मशीन सड़क पर निगरानी कर रही हो और मशीन ही गलती कर दे, तो उस गलती को पकड़ने की जिम्मेदारी किसकी होगी?क्योंकि आज गिटार है. कल कोई बड़ा बैग हो सकता है. कोई सामान हो सकता है. या तस्वीर का कोई और हिस्सा सिस्टम को कुछ और दिखा सकता है.

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