पश्चिम बंगाल सरकार के मदरसों का सर्वे कराने के आदेश पर सियासत गरमा गई है. असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के वरिष्ठ नेता वारिस पठान ने इस फैसले को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है. उनका आरोप है कि बीजेपी बंगाल के मदरसों के पीछे पड़ गई है.
वारिस पठान ने बीजेपी पर देश में एक खास एजेंडे के तहत काम करने का आरोप लगाया. मदरसा सर्वे के फैसले का कड़ा विरोध करते हुए वारिस पठान ने कहा, 'जब से बीजेपी सरकार सत्ता में आई है, उनका एकमात्र एजेंडा सिर्फ और सिर्फ नफरत फैलाना रहा है.'
उन्होंने आगे कहा कि मुसलमानों के खान-पान की आदतों, बुर्के, मस्जिदों और मदरसों को लेकर जानबूझकर नफरत पैदा की जा रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी हर उस चीज से नफरत करती है जो अल्पसंख्यकों से जुड़ी हुई है. अब इसी कड़ी में वो बंगाल के मदरसों के पीछे पड़ गई है.
मदरसे के सफल छात्रों का दिया हवाला
मदरसों की शिक्षा व्यवस्था का बचाव करते हुए वारिस पठान ने कहा कि मदरसों को लेकर गलत धारणाएं फैलाई जा रही हैं. उन्होंने सवाल उठाया, 'आप उन अनेक सफल लोगों को क्यों नहीं मानते जिन्होंने मदरसों से अपनी पढ़ाई और ग्रेजुएशन पूरा किया है?' उन्होंने कहा कि मदरसों से पढ़कर निकले कई लोग आज समाज में ऊंचे मुकाम पर हैं और देश की तरक्की में अपना योगदान दे रहे हैं, लेकिन सरकार उनके योगदान को पूरी तरह नजरअंदाज कर रही है.
'मंदिरों का सर्वे क्यों नहीं करते'
वारिस पठान ने कानून की समानता पर जोर देते हुए कहा कि हमारा संविधान देश के सभी नागरिकों और संस्थानों को बराबर का अधिकार देता है. उन्होंने मांग उठाई, 'आप मदरसों का सर्वे कर सकते हैं, लेकिन मंदिरों का सर्वे क्यों नहीं करते? हमारा संविधान पूरी तरह समानता की बात करता है, इसलिए देश के कानून और नियम सभी पर समान रूप से लागू होने चाहिए.'
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AIMIM नेता ने कहा कि अगर सरकार को वाकई में धार्मिक और शैक्षणिक संस्थानों की स्थिति जाननी है, तो भेदभाव नहीं होना चाहिए. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर आप सर्वे का काम कर ही रहे हैं, तो बिना किसी पक्षपात के सभी का सर्वे करें, तभी न्याय होगा.