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मुस्लिम गांव वालों ने कराया हिंदू युवक का अंतिम संस्कार, असम में गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल

असम के बोंगाईगांव जिले के एक मुस्लिम बहुल गांव ने सांप्रदायिक सौहार्द की ऐसी मिसाल पेश की है, जिसकी चर्चा दूर-दूर तक हो रही है. गांव के मुस्लिम समुदाय के लोगों ने एक हिंदू युवक के निधन के बाद उसके अंतिम संस्कार की पूरी जिम्मेदारी संभाली और हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार सम्मानपूर्वक अंतिम विदाई देकर मानवता का संदेश दिया.

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मुस्लिम लोगों ने कराया हिंदू युवक का अंतिम संस्कार (Photo: itg)
मुस्लिम लोगों ने कराया हिंदू युवक का अंतिम संस्कार (Photo: itg)

असम के बोंगाईगांव जिले से सांप्रदायिक सौहार्द और सामाजिक एकता की एक प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है. यहां मुस्लिम बहुल अंबारी-पारेरचार गांव के लोगों ने धर्म से ऊपर उठकर मानवता का परिचय दिया और एक हिंदू युवक के अंतिम संस्कार में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. गांव वालों के इस कदम की पूरे इलाके में सराहना हो रही है.

जानकारी के अनुसार, श्रीजंग्राम विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले अंबारी-पारेरचार गांव निवासी प्रतीक भौमिक का निधन हो गया था. युवक की मौत के बाद परिवार शोक में डूबा हुआ था. ऐसे कठिन समय में गांव के मुस्लिम समुदाय के लोग उनके साथ खड़े नजर आए. ग्रामीणों ने न केवल परिवार को सांत्वना दी, बल्कि अंतिम संस्कार की पूरी प्रक्रिया में सहयोग भी किया.

श्मशान घाट तक पहुंचाया शव

स्थानीय लोगों ने मिलकर प्रतीक भौमिक के पार्थिव शरीर को कंधा दिया और उसे सार्वजनिक श्मशान घाट तक पहुंचाया. इसके बाद हिंदू धर्म की परंपराओं और रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार की सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की गईं. गांव के लोगों का कहना है कि दुख की घड़ी में इंसानियत सबसे बड़ा धर्म होती है और यही संदेश उन्होंने समाज को देने की कोशिश की है.

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गांव के निवासी अमर अली ने कहा कि प्रतीक भौमिक के असमय निधन से पूरा गांव दुखी है. उन्होंने कहा कि धर्म के आधार पर लोगों को बांटने की सोच का समाज में कोई स्थान नहीं होना चाहिए. किसी व्यक्ति के निधन के बाद उसे सम्मानजनक विदाई देना हर इंसान का कर्तव्य है. इसी भावना के साथ गांव के सभी लोग अंतिम संस्कार में शामिल हुए.

धर्म से ऊपर इंसानियत

अमर अली ने बताया कि उनके गांव में अलग-अलग धर्मों के लोग वर्षों से आपसी भाईचारे और सम्मान के साथ रहते आए हैं. मुश्किल समय में एक-दूसरे का साथ देना यहां की परंपरा रही है. उन्होंने कहा कि प्रतीक का परिवार भी गांव का अभिन्न हिस्सा है और भविष्य में भी उन्हें समुदाय का पूरा सहयोग मिलता रहेगा.

ऐसे समय में जब देश के विभिन्न हिस्सों में धार्मिक ध्रुवीकरण और सामाजिक विभाजन की चर्चाएं होती रहती हैं, अंबारी-पारेरचार गांव की यह पहल एक सकारात्मक संदेश देती है. 

 

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