आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीताराम राजू जिले में भारी बारिश ने आदिवासी इलाकों में रहने वाले लोगों की मुश्किल बढ़ा दी है. अनंतगिरी मंडल की लुंगापर्थी पंचायत के ओनुकोण्डा गांव में बारिश के बाद नाला उफान पर है. हालात ऐसे हैं कि गांव के लोगों को अपने घरों तक पहुंचने और जरूरी सामान लाने के लिए तेज बहाव वाले पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ रहा है.
इस दौरान सामने आए वीडियो और तस्वीरों में लोग जान जोखिम में डालकर उफनते नाले को पार करते दिखाई दे रहे हैं. कहीं लोग पानी के तेज बहाव के बीच संभल-संभलकर कदम बढ़ा रहे हैं, तो एक शख्स अपने कंधों पर बच्चे को बैठाकर नाला पार करता नजर आया.
बंगाल की खाड़ी के ऊपर बने डीप डिप्रेशन के असर से आंध्र प्रदेश के कई इलाकों में भारी बारिश हुई. इसका असर अल्लूरी सीताराम राजू जिले में भी देखने को मिला. पहाड़ी और आदिवासी इलाके होने की वजह से यहां बारिश के बाद छोटे-बड़े जलस्रोत तेजी से भर जाते हैं. ओनुकोण्डा गांव का नाला भी लगातार बारिश के बाद उफान पर आ गया. मुश्किल यह है कि इस नाले पर ग्रामीणों के आने-जाने के लिए कोई पक्का पुल नहीं है. नतीजा यह कि बारिश के मौसम में पानी बढ़ते ही गांव का संपर्क मुश्किल हो जाता है.
यहां देखें वीडियो
सामने आए विजुअल में एक शख्स अपने कंधे पर बच्चे को बैठाए दिखाई देता है. नीचे पानी का तेज बहाव है और उसे इसी रास्ते से दूसरी तरफ जाना है. वह धीरे-धीरे पानी के बीच कदम बढ़ाता है. आसपास दूसरे लोग भी इसी तरह नाले को पार करते नजर आते हैं.
सोचिए, जिस रास्ते से रोजमर्रा की जिंदगी चलती है, वही रास्ता बारिश में इतना खतरनाक हो जाए कि हर कदम पर बह जाने का डर बना रहे. लेकिन गांव के लोगों के सामने रास्ता चुनने का विकल्प भी नहीं है. उन्हें घर पहुंचना है. जरूरी सामान लाना है. रोजमर्रा के काम करने हैं. ऐसे में उफनता नाला पार करना उनकी मजबूरी बन जाता है.

पुल की मांग, सालों से इंतजार
स्थानीय लोगों का कहना है कि ओनुकोण्डा नाले पर पुल नहीं होना लंबे समय से समस्या है. बारिश के मौसम में यह परेशानी और गंभीर हो जाती है. ग्रामीणों ने प्रशासन से यहां एक स्थायी पुल बनाने की मांग की है, ताकि मानसून के दौरान उन्हें जान जोखिम में डालकर पानी पार न करना पड़े. उनका कहना है कि एक पुल बनने से गांव की कनेक्टिविटी बेहतर होगी और लोगों को जरूरी सेवाओं तक पहुंचने में भी आसानी होगी.
फिलहाल भारी बारिश के कारण नाले में पानी का बहाव तेज है. ऐसे में लोगों के लिए इसे पार करना खतरे से खाली नहीं है. सबसे बड़ी चिंता बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को लेकर है. अगर पानी का बहाव अचानक बढ़ जाए तो स्थिति और गंभीर हो सकती है.
एक तरफ बारिश आती है और पहाड़ी इलाकों के लिए पानी जीवन का हिस्सा बन जाता है. दूसरी तरफ वही पानी लोगों के लिए रास्ता रोक देता है. ओनुकोण्डा में फिलहाल लोग उसी रास्ते से गुजर रहे हैं, जहां नीचे तेज बहता पानी है और ऊपर अपने घर तक पहुंचने की मजबूरी. यहां सवाल सिर्फ रास्ते का नहीं है. सवाल यह है कि बारिश के दिनों में घर पहुंचने के लिए इन लोगों को आखिर कब तक अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ेगी?