एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि जून 2025 में अहमदाबाद में हुए एयर इंडिया फ्लाइट AI-171 हादसे की फाइनल जांच रिपोर्ट का ड्राफ्ट इस साल अक्टूबर तक तैयार होने की उम्मीद है. इस विमान हादसे में कुल 260 लोगों की मौत हुई थी.
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में AAIB ने कहा कि किसी अंतरराष्ट्रीय उड़ान से जुड़े गंभीर विमान हादसे की जांच केवल भारत का आंतरिक मामला नहीं होती. यह शिकागो कन्वेंशन और इंटरनेशनल सिविल एविएशन ऑर्गनाइजेशन के एनेक्सर-13 के तहत जांच प्रक्रिया का हिस्सा होती है.
एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो ने बताया कि ICAO के एनेक्सर-13 में विमान दुर्घटनाओं की जांच के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तय किए गए हैं. हलफनामे में कहा गया कि शिकागो कन्वेंशन का आर्टिकल-26 उस देश को जांच की जिम्मेदारी देता है, जहां दुर्घटना होती है.
वहीं एनेक्सर-13 और एयरक्राफ्ट (एक्सीडेंट एंड इंसिडेंट इन्वेस्टिगेशन) रूल्स, 2025 के तहत विमान के रजिस्ट्रेशन, ऑपरेटर, डिजाइन और निर्माता देश को भी जांच प्रक्रिया में शामिल होने का अधिकार और जिम्मेदारी मिलती है. ये जांच केवल घरेलू प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं होती.
AAIB ने कहा कि सभी संबंधित देशों के मान्यता प्राप्त प्रतिनिधि और तकनीकी विशेषज्ञ शामिल रहते हैं. विमान हादसे की जांच का उद्देश्य किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी या आपराधिक दायित्व तय करना नहीं है. इसका उद्देश्य विमानन सुरक्षा को मजबूत कर भविष्य में दुर्घटनाओं को रोकना है.
AAIB ने बताया कि हादसे की गंभीरता, व्यापकता और तकनीकी जटिलताओं को देखते हुए जांच की समयसीमा का आकलन किया गया है. हलफनामे के मुताबिक, लंबित बाहरी प्रक्रियाएं पूरी होने की स्थिति में अगले करीब छह सप्ताह में जांच की मौजूदा गतिविधियां पूरी होने की उम्मीद है.
इसके बाद विश्लेषण का चरण पूरा होगा और अक्टूबर 2026 तक फाइनल जांच रिपोर्ट का ड्राफ्ट तैयार कर लिया जाएगा. AAIB ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कानूनी प्रावधान जांच से जुड़ी संवेदनशील सामग्री की गोपनीयता सुनिश्चित करते हैं. इसमें बयान और दस्तावेज अहम हैं.
इनमें गवाहों के बयान, कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR) की रिकॉर्डिंग और ट्रांसक्रिप्ट, एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) कम्युनिकेशन, मेडिकल रिकॉर्ड और संरक्षित दस्तावेज शामिल हैं. इन जानकारियों का खुलासा जांच की निष्पक्षता और विमान दुर्घटना जांचों की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकता है.