वंदे भारत एक्सप्रेस का एक लोको पायलट शराब पीकर ट्रेन चलाने के शक के घेरे में आ गया. वजह थी ड्यूटी के बाद हुआ ब्रेथलाइजर (Breathalyzer) टेस्ट. दिलचस्प बात यह है कि टेस्ट के दौरान पहले नतीजा निगेटिव आया, लेकिन करीब 45 मिनट बाद उसी जांच को पॉजिटिव बता दिया गया. इतना ही नहीं, ब्रेथलाइजर में शराब का स्तर 550 mg/100 ml दिखने का दावा किया गया. एक्सपर्ट्स के मुताबिक एल्कोहल का यह लेवल जानलेवा है. मामला तब और उलझ गया, जब बाद में लोको पायलट के ब्लड टेस्ट में एल्कोहल का कोई नामोनिशान नहीं मिला.
यह मामला 25 अगस्त का है. आगरा-कानपुर वंदे भारत ट्रेन चलाने वाले लोको पायलट श्याम सिंह ने आगरा कैंट स्टेशन पर सुबह करीब 9.21 बजे ड्यूटी खत्म की थी. इसके तुरंत बाद लोको पायलट लॉबी में उनका ब्रेथलाइजर टेस्ट किया गया. मामले से जुड़े एक अधिकारी के मुताबिक, शुरुआती टेस्ट में नतीजा निगेटिव आया. इसके बाद श्याम सिंह रनिंग रूम चले गए. करीब 45 मिनट बाद उन्हें दोबारा बुलाया गया.
आरोप है कि उसी लोको इंस्पेक्टर ने उन्हें बताया कि उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है और शराब की मौजूदगी की पुष्टि के लिए ब्लड टेस्ट कराया जाएगा. इसी दौरान ब्रेथलाइजर में शराब का स्तर 550 mg/100 ml दिखने की बात सामने आई. यही इस पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल बन गया है. सीनियर लोको पायलट्स का कहना है कि सामान्य तौर पर ब्रेथलाइजर टेस्ट का नतीजा तुरंत सामने आ जाता है. ऐसे में पहले निगेटिव नतीजा आने और करीब 45 मिनट बाद उसी जांच को पॉजिटिव बताए जाने पर सवाल उठना स्वाभाविक है.
ब्लड टेस्ट ने बदल दी पूरी तस्वीर
श्याम सिंह का कहना है कि वह शराब नहीं पीते. उनका आरोप है कि उन्हें जानबूझकर परेशान किया गया और झूठे मामले में फंसाने की कोशिश की गई. मामले से जुड़े अधिकारी के मुताबिक, बाद में कराई गई ब्लड जांच में श्याम सिंह के शरीर में शराब नहीं मिली. इसके बाद ब्रेथलाइजर टेस्ट की प्रक्रिया और उसकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए. घटना वाले दिन श्याम सिंह को वापस आगरा भेज दिया गया और उन्हें ट्रेन चलाने की अनुमति नहीं दी गई. हालांकि, अगले ही दिन उन्हें दोबारा ड्यूटी पर ले लिया गया.
CMS में रिकॉर्ड क्यों नहीं हुआ टेस्ट?
मामले को लेकर एक और सवाल ब्रेथलाइजर मशीन और क्रू मैनेजमेंट सिस्टम (CMS) से जुड़ा है. लॉबी स्टाफ के मुताबिक, ब्रेथलाइजर मशीनें सीएमएस से जुड़ी होती हैं और टेस्ट के नतीजे सिस्टम में दर्ज होते हैं. इसी रिकॉर्ड के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाती है. हालांकि, संबंधित लोको इंस्पेक्टर का कहना था कि तकनीकी खराबी के कारण टेस्ट का नतीजा सीएमएस में दर्ज नहीं हो सका. इसके बावजूद उन्होंने दावा किया कि ब्रेथलाइजर में श्याम सिंह के शरीर में शराब की मात्रा काफी ज्यादा दिखाई दी.
550 mg/100 ml की रीडिंग पर सवाल
सीनियर लोको पायलट्स ने 550 mg/100 ml की रीडिंग पर भी सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि इतनी अधिक मात्रा की रीडिंग सही होने पर व्यक्ति में नशे के गंभीर लक्षण दिखाई देने चाहिए. उनका तर्क है कि श्याम सिंह ने इससे पहले ट्रेन सुरक्षित तरीके से चलाई थी और टेस्ट के लिए खुद रेलवे लॉबी में मौजूद थे. हालांकि, इस रीडिंग की सटीकता और ब्रेथलाइजर की स्थिति की पुष्टि आधिकारिक जांच के बाद ही हो सकेगी.
CCTV फुटेज और ब्लड रिपोर्ट की मांग
पूरे घटनाक्रम के बाद लोको पायलट श्याम सिंह ने वरिष्ठ रेलवे अधिकारियों को लिखित शिकायत दी है. उन्होंने ब्रेथलाइजर टेस्ट के समय की CCTV फुटेज, अपनी ब्लड टेस्ट रिपोर्ट की कॉपी और संबंधित लोको इंस्पेक्टर के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. उनका आरोप है कि खराब नीयत से उन्हें झूठे और बेबुनियाद मामले में फंसाने की कोशिश की गई. एक वरिष्ठ रेलवे अधिकारी ने कहा है कि मामले को देखा जा रहा है और जांच के बाद उचित फैसला लिया जाएगा. इस पूरे मामले ने रेलवे के ब्रेथलाइजर सिस्टम की विश्वसनीयता और जांच की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.