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चलती बस के आगे हाथ फैला सीना तानकर खड़ी हो गईं ACP मोनिका शुक्ला, जानिए कौन हैं बहादुर महिला अफसर

भोपाल किसान आंदोलन के दौरान ACP मोनिका शुक्ला के साहस की चर्चा हो रही है. बिना ड्राइवर के आगे बढ़ रही स्कूल बस को रोकने के लिए वह निडर होकर उसके सामने खड़ी हो गईं. दोनों हाथों से बस रोककर उन्होंने संभावित हादसा टाल दिया. जानिए कौन हैं मोनिका शुक्ला, जिनकी बहादुरी, कर्तव्यनिष्ठा और पुलिस सेवा में साहस की मिसाल दी जाती है.

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ACP मोनिका शुक्ला का वीडियो खूब वायरल हो रहा है (Photo: ITG)
ACP मोनिका शुक्ला का वीडियो खूब वायरल हो रहा है (Photo: ITG)

भोपाल में किसान आंदोलन के दौरान ACP मोनिका शुक्ला का साहस चर्चा में है. बिना ड्राइवर के धीरे-धीरे आगे बढ़ रही स्कूल बस को रोकने के लिए वह अकेले उसके सामने खड़ी हो गईं. दोनों हाथ फैलाकर उन्होंने बस को रोकने की कोशिश की और आखिरकार बस रुक गई. मोनिका शुक्ला का यह साहसी कदम सोशल मीडिया से लेकर पुलिस विभाग तक चर्चा का विषय बना हुआ है.

भोपाल में किसान आंदोलन के दौरान एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया. प्रदर्शनकारी किसान जब बैरिकेड पार कर आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे थे, तभी एक स्कूल बस धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगी. बस में कोई ड्राइवर नहीं था, जबकि कुछ किसान बस की छत पर खड़े थे और कुछ लोग नीचे से उसे धक्का दे रहे थे. स्थिति कभी भी बड़ी घटना में बदल सकती थी. इसी दौरान मौके पर तैनात ACP मोनिका शुक्ला ने जो किया, उसने उनके साहस और कर्तव्यनिष्ठा की मिसाल पेश कर दी.

बिना डरे सामने खड़ी हो गईं ACP मोनिका शुक्ला

किसानों की भीड़ के बीच जब बस धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगी तो ACP मोनिका शुक्ला तुरंत दौड़कर वहां पहुंचीं. उन्होंने खतरे की परवाह किए बिना बस के सामने अपनी जगह बना ली. दोनों हाथ फैलाकर वह बस को रोकने लगीं. बस को रोकना आसान नहीं था. सामने बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी थे और पीछे से बस को धक्का दिया जा रहा था. लेकिन मोनिका शुक्ला अपनी जगह से नहीं हटीं. उन्होंने पूरी ताकत लगाकर बस को रोकने की कोशिश जारी रखी. उनके साहस को देखकर मौके पर मौजूद कुछ किसान और पुलिसकर्मी भी मदद के लिए आगे आए. आखिरकार बस रुक गई और एक संभावित हादसा टल गया. अगर उस समय बस को नहीं रोका जाता तो भीड़ के बीच कोई बड़ा हादसा हो सकता था. लेकिन ACP मोनिका शुक्ला की सूझबूझ और हिम्मत ने स्थिति को संभाल लिया.

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सिर्फ इस घटना से नहीं, पहले भी दिखा चुकी हैं साहस

ACP मोनिका शुक्ला का नाम पुलिस विभाग में साहसी अधिकारियों में लिया जाता है. यह पहली बार नहीं है जब उन्होंने चुनौतीपूर्ण हालात में आगे बढ़कर मोर्चा संभाला हो. बताया जा रहा है कि करीब एक दशक पहले भोपाल के काजी कैंप इलाके में एक सड़क हादसे के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया था. दुर्घटना के बाद भीड़ उग्र हो गई और हालात बिगड़ने लगे थे. उस समय मोनिका शुक्ला ने भीड़ के बीच जाकर स्थिति को नियंत्रित करने की जिम्मेदारी उठाई थी. बताया जाता है कि वह अकेले जीप लेकर उपद्रवियों के बीच पहुंच गई थीं. हालात काबू से बाहर होते देख उन्होंने सख्ती दिखाई और अपनी सूझबूझ से स्थिति संभाली. उस घटना के बाद भी उनके साहस की काफी चर्चा हुई थी.

महिला अधिकारी होकर भी बनाई अलग पहचान

पुलिस सेवा में चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सामना करना आसान नहीं होता. खासकर कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में मौके पर तुरंत फैसला लेना पड़ता है. मोनिका शुक्ला ने अपने करियर में कई बार साबित किया है कि जिम्मेदारी निभाने में वह पीछे नहीं हटतीं. जिले में पुलिस अधीक्षक (SP) रहते हुए भी उन्होंने अपनी कार्यशैली से अलग पहचान बनाई. अनुशासन, सख्ती और मौके पर निर्णय लेने की क्षमता उनकी कार्यशैली की खासियत मानी जाती है.

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कौन हैं ACP मोनिका शुक्ला

मोनिका शुक्ला मध्य प्रदेश पुलिस की वरिष्ठ अधिकारी हैं. वह मूल रूप से मध्य प्रदेश प्रशासनिक सेवा की अधिकारी थीं. वर्ष 1994 में उन्होंने पुलिस सेवा में कदम रखा था. बाद में वर्ष 2009 में उन्हें भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में अवॉर्ड किया गया. अपने लंबे पुलिस करियर में उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं. जिलों में SP के पद पर रहते हुए उन्होंने कानून-व्यवस्था संभाली और अपनी कार्यशैली से पहचान बनाई. मोनिका शुक्ला के पति शशिकांत शुक्ला भी IPS अधिकारी हैं. वह भी पुलिस विभाग में महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं.

कर्तव्य के आगे खतरे की परवाह नहीं

भोपाल किसान आंदोलन के दौरान सामने आया यह वीडियो और घटना एक बार फिर यह दिखाती है कि पुलिस अधिकारियों के सामने कई बार ऐसे हालात आ जाते हैं, जहां कुछ सेकंड का फैसला बहुत मायने रखता है. ACP मोनिका शुक्ला ने उस समय भीड़, भारी वाहन और संभावित खतरे के बीच जिस तरह हिम्मत दिखाई, वह उनकी जिम्मेदारी और कर्तव्य भावना को दर्शाता है. एक महिला पुलिस अधिकारी के तौर पर उन्होंने यह संदेश दिया कि वर्दी पहनने वाले अधिकारी के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता लोगों की सुरक्षा होती है. यही वजह है कि आज मोनिका शुक्ला का नाम एक ऐसी अफसर के रूप में लिया जा रहा है, जो मुश्किल वक्त में मैदान छोड़ने के बजाय सामने खड़ी होकर हालात का सामना करती हैं.

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