आम आदमी पार्टी (AAP) के सात राज्यसभा सांसदों के BJP में शामिल होने के बाद शुक्रवार को NDA को राज्यसभा में महत्वपूर्ण बढ़त मिली है, लेकिन सत्तारूढ़ गठबंधन (NDA) अभी-भी दो-तिहाई बहुमत से काफी दूर है. AAP सांसदों के स्विच होने के बाद NDA की कुल ताकत अब 145 हो गई है. राज्यसभा की कुल सदस्य संख्या 244 है, जिसमें दो-तिहाई बहुमत के लिए 163 सांसदों की जरूरत होती है. यानी NDA अभी भी 18 सांसदों से कम हैं.
वहीं, एक बार जब एनडीए को ऊपरी सदन में दो-तिहाई बहुमत मिल जाएगा तो उसके लिए संवैधानिक संशोधनों की आवश्यकता वाले महत्वपूर्ण कानूनों को पारित करना मुश्किल नहीं होगा. लोकसभा में साधारण बहुमत होने के बावजूद एनडीए के पास दो-तिहाई बहुमत नहीं है. लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत के लिए उसे 363 सांसदों के समर्थन की जरूरत है. यही कारण था कि हाल ही में महिला आरक्षण से जुड़ा महत्वपूर्ण विधेयक संसद में पास नहीं हो सका था.
उधर, राघव चड्ढा समेत आम आदमी पार्टी के 7 अन्य सदस्यों समेत सभी ने बीजेपी का दामन थामते ही. बीजेपी ने विलय के लिए आवेदन कर दिया है. राज्यसभा अध्यक्ष सीपी राधाकृष्णन द्वारा आम आदमी पार्टी (आप) के भाजपा में विलय को मंजूरी देने के बाद, सत्तारूढ़ पार्टी के पास कुल 113 सांसद हो जाएंगे. फिलहाल बीजेपी संसद में 106 हैं.
बहुमत के करीब बीजेपी
राज्यसभा में साधारण बहुमत के लिए 123 सदस्यों की जरूरत होती है. सात सांसदों के आने के बाद बीजेपी की अपनी ताकत 113 हो जाएगी. अगर सात नामांकित सदस्यों और दो निर्दलीय सांसदों का समर्थन भी जोड़ लिया जाए तो ये आंकड़ा 122 तक पहुंचता है. ये संख्या ठीक आधे यानी हाफ-वे मार्क के बराबर है. बीजेपी अब अपने दम पर साधारण बहुमत हासिल करने से महज एक कदम दूर रह जाएगी.
राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि संविधान के प्रावधानों के तहत दो-तिहाई से अधिक सांसदों ने विलय का फैसला किया है. अगर चेयरमैन इस विलय को मंजूरी देते हैं, तो इन सांसदों की सदस्यता पर कोई खतरा नहीं रहेगा. 'AAP' के 10 में से 7 सांसदों का साथ आना तकनीकी रूप से विलय की श्रेणी में आता है. अब एनडीए को उम्मीद है कि इस मजबूती के बाद भविष्य में महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराना आसान होगा.