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आज का दिन: भारत, रूस की नजदीकी से बढ़ेगी चीन और पाकिस्तान की चिंता!

कल भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनकी मुलाकात हुई. इससे पहले रक्षा मंत्री राजनाथ की रूसी रक्षा मंत्री के साथ मीटिंग हुई और साथ ही कल रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भी विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ बातचीत की. तो कल भारत और रूस के बीच हुई इन तमाम बातचीत का हासिल क्या रहा? और क्या इस मीटिंग और समझौते के बाद अमेरिका से हमारे रिश्ते प्रभावित हो सकते हैं?

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पीएम मोदी और व्लादिमीर पुतिन
पीएम मोदी और व्लादिमीर पुतिन

1- रूस और भारत की दोस्ती 70 साल से ज़्यादा पुरानी है. रूस ने अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भार का साथ देने से लेकर 65 के युद्ध में पाकिस्तान के साथ युद्ध होने पर मध्यस्थता कराने जैसे कई मसलों में भारत का साथ दिया. और दोनों देशों के बीच सिर्फ राजनयिक ही नहीं, बल्कि आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक संबंध रहे हैं. भारत के औद्योगिकरण में योगदान देने से लेकर रूस की तकनीक और आर्थिक मदद ने भारत के विकास में बड़ी भूमिका निभाई. रक्षा, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा, इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी से लेकर कई तरह के डेवलपमेंट में रूस का भारत को लेकर अहम रोल रहा है. आप 1990 से देखें तो जब सोवियत संघ टूट रहा था उस दौर में भारत, रूस की नजदीकी और ज्यादा बढ़ी थी इसके बाद से ही दोनों देशों के बीच ट्रेड में तेजी आई थी. हालांकि मौजूदा समय में अमेरिका के करीब जाने पर भारत के साथ रूस के उन पुराने रिश्तों में भले ही उतनी गर्मजोशी न दिखती हो लेकिन ग्लोबल लेवल पर आज भी भारत के साथी के तौर पर रूस की ओर ही देखा जाता है.  लेकिन अब इस पुरानी दोस्ती का एक नया अध्याय लिखने के लिए इन दिनों रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत आए हुए हैं.

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बात अगर जातीय जनगणना की करें तो देश में आखिरी बार जातीय जनगणना साल 1931 में हुई थी और यही कारण है कि मौजूदा आंकड़े का पता लगाने के लिए बिहार का सत्ता दल और विपक्ष ताल से ताल मिला रहा है. संसद के विंटर सेशन के दौरान भी विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने CM नीतीश कुमार से मिलकर जातीय जनगणना कराने की मांग की थी और मुख्यमंत्री ने तेजस्वी को भरोसा दिया था कि जल्द जातीय जनगणना को लेकर ऑल पार्टी मीटिंग कर अंतिम रूप दिया जाएगा. तो बिहार की राजनीति में जातीय जनगणना इतनी महत्वपूर्ण क्यों हैं और सत्ता दल से लेकर विपक्ष इसमें अपना क्या राजनीतिक हित देखता है? 

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