पहले से रजिस्ट्रेशन कराएबिना बड़ी संख्या में श्रद्धालु अमरनाथ यात्रा के लिए जम्मू-कश्मीर पहुंच रहे हैं. इस साल की अमरनाथ यात्रा के सामने यह पहली बड़ी व्यवस्थागत चुनौती खड़ी हो गई है. इससे जम्मू में रजिस्ट्रेशन सिस्टम पर भारी दबाव पड़ रहा है और प्रशासन की तैयारियों की भी कड़ी परीक्षा हो रही है.
इस साल अमरनाथ यात्रा 57 दिनों तक चलेगी, जिसकी शुरुआत 3 जुलाई को हुई. यात्रा के शुरुआती दिनों में ही सैकड़ों श्रद्धालु ऑन-द-स्पॉट रजिस्ट्रेशन कराने के लिए जम्मू पहुंच गए, जिसके चलते टोकन वितरण केंद्रों पर लंबी कतारें देखने को मिलीं.
ये श्रद्धालु दक्षिण कश्मीर हिमालय में 3,880 मीटर ऊंचाई पर स्थित पवित्र गुफा मंदिर की यात्रा पर जाने वाले हैं. स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने रजिस्ट्रेशन फैसिलिटी का विस्तार किया है, अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती की है और भीड़ प्रबंधन के इंतजाम मजबूत किए हैं.
सबसे ज्यादा भीड़ जम्मू के तवी रिवरफ्रंट पर देखने को मिली है, जहां ऑन-द-स्पॉट रजिस्ट्रेशन के लिए 10 टोकन काउंटर बनाए गए हैं. टोकन आवंटन के बाद श्रद्धालुओं का रजिस्ट्रेशन, ई-केवाईसी वेरिफिकेशन और रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिटी कार्ड (RFIDC) जारी करने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है. तवी रिवरफ्रंट के अलावा भगवती नगर, गीता भवन, पुरानी मंडी (राम मंदिर) और जम्मू रेलवे स्टेशन पर भी रजिस्ट्रेशन से जुड़ी सुविधाएं स्थापित की गई हैं.
अमरनाथ यात्रा शुरू होने के 24 घंटे में ही 12000 से अधिक श्रद्धालुओं ने पवित्र गुफा में बाबा बर्फानी के दर्शन किए. दूसरा और तीसरा जत्था भी अमरनाथ गुफा के लिए रवाना हो चुका है. इस बीच जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने श्रद्धालुओं को परेशानी से बचने के लिए यात्रा नियमों का सख्ती से पालन करने की सलाह दी है.
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने अमरनाथ यात्रा की स्थिति का जायजा लेने के लिए शनिवार को अधिकारियों के साथ बैठक की. इस बैठक में यात्रा के लिए बिना रजिस्ट्रेशन कराए श्रद्धालुओं के जम्मू-कश्मीर पहुंचने का मुद्दा उठा. उपराज्यपाल के निर्देशों पर जम्मू-कश्मीर प्रशासन और श्री अमरनाथ जी श्राइन बोर्ड ने तीर्थयात्रियों के लिए एडवाइजरी जारी की और कहा कि पहले से रजिस्ट्रेशन कराए बिना और अपनी तय तारीख से पहले आने वाले श्रद्धालुओं को यात्रा की अनुमति नहीं मिलेगी.