राहुल गांधी का ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम 22 अगस्त 2026 को पुणे के AISSMS कॉलेज ग्राउंड में आयोजित किया गया. इसमें महिलाओं की सुरक्षा की बात करते हुए उन्होंने कहा कि महिलाओं को मां, पत्नी या बेटी की भूमिका तक सीमित नहीं देखा जाना चाहिए. उन्होंने मनुस्मृति का हवाला देते हुए कहा कि उसमें लिखा है कि बचपन में महिला पिता के अधीन, युवावस्था में पति के अधीन और पति की मृत्यु के बाद बेटों के अधीन रहती है. राहुल गांधी ने कहा कि मनुस्मृति के अनुसार महिला को कभी स्वतंत्र नहीं होना चाहिए. उन्होंने कहा कि देश की सबसे बड़ी ताकत यह है कि महिलाएं स्वतंत्र हों, अपने लिए खड़ी हों और खुद पर विश्वास करें.
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा कि महिलाएं स्वभाव से पुरुषों की तुलना में अधिक संवेदनशील, कोमल, दयालु और दूर की सोच रखने वाली होती हैं. यही वजह है कि उनका मानना है कि भारत की महिलाएं देश की सबसे बड़ी ताकत हैं.
राहुल गांधी ने कहा कि जब भी वह पुरुषों से बात करते हैं तो महिलाओं को अक्सर तीन भूमिकाओं में बांटकर देखा जाता है- बेटी, पत्नी या मां. उन्होंने कहा कि बेटी, पत्नी या मां के रूप में पहचान होने में कुछ भी गलत नहीं है, लेकिन यही किसी महिला की एकमात्र पहचान नहीं हो सकती. उन्होंने कहा कि देश में कई प्रतिभाशाली महिलाएं अलग-अलग क्षेत्रों में शानदार काम कर रही हैं. वे प्रोफेशनल हैं, खिलाड़ी हैं और कई तरह के काम करती हैं. ऐसे में उनकी पहचान केवल बेटी, पत्नी या मां तक सीमित नहीं की जा सकती.
महिलाएं सबसे बड़ी ताकत
‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा कि जब उनसे पूछा जाता है कि भारत की सबसे बड़ी ताकत क्या है, तो कोई देश की अर्थव्यवस्था, सेना, स्वास्थ्य व्यवस्था या लोगों को इसकी सबसे बड़ी ताकत बताता है. लेकिन उनके अनुसार भारत की सबसे बड़ी ताकत और सबसे बड़ी संपत्ति देश की महिलाओं की 70 करोड़ अलग-अलग यात्राएं, कल्पनाएं और सपने हैं.