'शादी पक्की समझिए...' गुजरात के भावनगर में रहने वाले युवक से शायद यही कहा गया होगा. आखिर कई दिनों की तलाश के बाद उन्हें एक लड़की मिल गई थी. फोटो भी पसंद आई, मुलाकात भी हो गई और शादी की बात भी लगभग तय हो गई. लेकिन युवक को क्या पता था कि वह दुल्हन नहीं, बल्कि एक ऐसे गिरोह के जाल में फंस चुका है, जिसका काम ही शादी के नाम पर लोगों को लूटना था.
31 साल का युवक काफी समय से शादी के लिए लड़की तलाश रहा था. जब कहीं बात नहीं बनी तो उसने नागपुर में रहने वाले एक परिचित से मदद मांगी. कुछ दिन बाद फोन आया कि लड़की मिल गई है, नागपुर आ जाइए. युवक बिना देर किए नागपुर पहुंच गया.
नागपुर में उनकी मुलाकात रानी उर्फ कोमल पांडे से कराई गई. उसने एक युवती की फोटो दिखाई. नाम बताया गया- नम्रता मालवीय. फोटो पसंद आई तो युवक को कोराडी इलाके के एक घर ले जाया गया. वहां नम्रता भी मौजूद थी. कुछ लोग खुद को उसके रिश्तेदार बता रहे थे. बातचीत हुई, रिश्ता लगभग तय हो गया.

फिर आया असली मुद्दा... शादी का खर्च लगेगा... 70 हजार रुपये और दुल्हन के लिए सोने-चांदी के गहने देने होंगे. युवक ने बिना शक किए एटीएम से 70 हजार रुपये निकाले और दे दिए. गहनों की व्यवस्था भी कर दी. अब उसे बस शादी का इंतजार था. इसके बाद युवक से कहा गया कि शादी कोराडी में नहीं, बल्कि नागपुर के सीताबर्डी स्थित मंदिर में होगी. युवक तैयार होकर मंदिर पहुंच गया. उसे लगा कि अब कुछ ही देर में फेरे शुरू होंगे.
लेकिन तभी इस कहानी में ट्विस्ट आ गया. एक शख्स मंदिर पहुंचा और जोर-जोर से चिल्लाने लगा कि ये मेरी पत्नी है... तुम इससे शादी कैसे कर सकते हो? मंदिर में हंगामा मच गया. युवक कुछ समझ पाता, उससे पहले पूरा 'शादी का सेटअप' बिखर चुका था. उसी पल एहसास हुआ कि शादी के नाम पर ठगी की गई है. युवक ने तहसील पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई. जांच शुरू हुई तो पता चला कि नम्रता मालवीय पहले भी शादी के नाम पर ठगी के मामलों में गिरफ्तार हो चुकी है.

पुलिस की जांच आगे बढ़ी तो इस पूरे खेल की कथित मास्टरमाइंड रानी उर्फ कोमल पांडे निकली. पुलिस ने उसे पाचपावली इलाके से गिरफ्तार कर लिया. अदालत ने उसे पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है. अब पुलिस गिरोह के बाकी सदस्यों की तलाश कर रही है और यह पता लगाने में जुटी है कि इस गैंग ने अब तक कितने लोगों को इसी तरह शादी का सपना दिखाकर ठगा है.
यह कहानी सिर्फ एक युवक की नहीं है. यह उन गिरोहों की कहानी है, जो लोगों की शादी की मजबूरी को अपना धंधा बना चुके हैं. फोटो दिखाना, रिश्तेदार बनकर भरोसा जीतना, शादी का खर्च मांगना और फिर आखिरी वक्त पर पूरा खेल पलट देना... यही इनका तरीका है. इस बार दूल्हा तो बच गया, लेकिन उसके 70 हजार रुपये और गहने लुट गए.