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नफीसा जोसेफ ने खुदकुशी क्यों की? बॉम्बे हाई कोर्ट का 22 साल बाद बड़ा फैसला, आरोपी को भी राहत नहीं

शादी के पहले सामने आए एक सच से नफीसा जोसेफ और गौतम खंडूजा के रिश्ते में दरार आ गई. तलाक के कागजों को लेकर विवाद इतना बढ़ा कि नफीसा ने अपनी जान दे दी. अब 22 साल पुराने इस मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है.

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नफीसा जोसेफ की मौत के मामले में HC का बड़ा फैसला. (Photo-File)
नफीसा जोसेफ की मौत के मामले में HC का बड़ा फैसला. (Photo-File)

बॉम्बे हाई कोर्ट ने मुंबई के बिजनेसमैन गौतम खंडूजा को मॉडल नफीसा जोसेफ की आत्महत्या से जुड़े मामले में आरोप मुक्त करने से इनकार कर दिया है. जस्टिस एमएम साठाये की बेंच ने कहा कि मजबूत शक को सबूत नहीं माना जा सकता, लेकिन इस मामले में क्या हुआ और किसकी क्या भूमिका थी, इसका फैसला ट्रायल के दौरान होगा.

गौतम खंडूजा की मुलाकात नफीसा से 2003 में हुई थी. दोनों दोस्त बने और बाद में उनका रिश्ता शादी तक पहुंच गया. 23 मई 2004 को दोनों की सगाई हुई. खंडूजा ने नफीसा से कहा था कि उन्होंने अपनी पहली पत्नी नुशीन खान से तलाक ले लिया है. इसके लिए उन्होंने एक दस्तावेज या समझौते का भी जिक्र किया था.

बाद में खंडूजा की मां ने नफीसा को बताया कि उनका तलाक नहीं हुआ है. इसके बाद नफीसा ने खंडूजा से तलाक के कागज दिखाने को कहा, लेकिन उन्हें ये कागज नहीं दिखाए गए. 28 जुलाई 2004 को इसी मुद्दे पर दोनों के बीच झगड़ा हुआ. उसी दिन गौतम ने नफीसा की मां को फोन किया और उन्हें मुंबई आने को कहा.

शादी से इनकार करने के बाद बिगड़ी बात

नफीसा की मां के तलाक के बारे में पूछने पर गौतम ने कहा कि नफीसा बहुत गुस्से वाली हैं और उनकी बात नहीं सुनतीं. इसी आधार पर उन्होंने शादी करने से इनकार कर दिया. इसी बीच खाना ना खाने से नफीसा की हालत बिगड़ती गई और इसके कुछ समय बाद उन्होंने अपनी जान ले ली. 

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बचाव पक्ष ने कहा- आत्महत्या के लिए उकसाने का सबूत नहीं

खंडूजा की ओर से वरिष्ठ वकील अशोक मुंदर्गी ने कोर्ट में कहा कि पुलिस की चार्जशीट में ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे यह साबित हो कि नफीसा को आत्महत्या के लिए उकसाया, धमकाया, या दबाव बनाया गया. उन्होंने यह भी कहा कि शादी से इनकार करना और नफीसा के साथ डॉक्टर के पास ना जाना, आत्महत्या के लिए उकसाने का आधार नहीं हो सकता.

यह भी पढ़ें: 'धर्म और जीवनसाथी चुनना मौलिक अधिकार', महाराष्ट्र के धर्मांतरण कानून को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती

कोर्ट ने कहा- ट्रायल में होगा अंतिम फैसला

कोर्ट ने कहा कि शादी की तैयारियां चल रही थीं, उसी दौरान रिश्ता टूटने का नफीसा पर गहरा असर पड़ा. हालांकि कोर्ट ने यह भी साफ किया कि खंडूजा की नीयत क्या थी और तलाक के कागज नहीं देना, शादी से इनकार करना या डॉक्टर के पास न जाना आत्महत्या का सीधा कारण था या नहीं, यह अभी तय नहीं हुआ है.

इन सवालों का जवाब ट्रायल के दौरान सबूतों के आधार पर ही मिलेंगे. इसलिए हाई कोर्ट ने खंडूजा को इस मामले से अभी आरोप मुक्त करने से इनकार कर दिया.

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