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मुंबई की मीठी नदी साफ नहीं, मेयर ने भी माना... ठेका और ठेकेदारी में उलझी सफाई

मुंबई में मानसून के दौरान जलभराव की समस्या को लेकर चिंता बढ़ रही है क्योंकि शहर की प्रमुख स्टॉर्म वॉटर ड्रेन मीठी नदी की सफाई अधूरी है. बीएमसी ने सफाई का 80% काम पूरा होने का दावा किया था, लेकिन हकीकत इससे काफी उलट है.

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मुंबई की मीठी नदी की सफाई अब तक नहीं हो सकी है
मुंबई की मीठी नदी की सफाई अब तक नहीं हो सकी है

मुंबई में मानसून दस्तक देने वाला है. लेकिन इसी के साथ हर साल की चिंता भी सिर उठाने लगी है. ये चिंता है भारी बारिश के कारण जलभराव. इससे भी बड़ी बात है कि शहर का सबसे महत्वपूर्ण ड्रेनेज सिस्टम मानी जाने वाली 'मीठी नदी' की हालत भी जस की तस है. वह भी तब जब बीते वर्षों में यह नदी और इसकी सफाई सियासी मुद्दा भी बन गई थी. 

बीएमसी की ओर से नदी की सफाई और गाद निकालने का काम लगभग 80 फीसदी पूरा होने का दावा किया गया था, लेकिन जमीनी हकीकत इससे काफी उलट है. कुर्ला स्थित कल्पना थिएटर के पास नदी के किनारों और उथले हिस्सों में घनी झाड़ियां उगी हुई हैं. जो पानी का बहाव रोकती हैं. नदी में प्लास्टिक कचरा, घरेलू अपशिष्ट और निर्माण सामग्री का मलबा भी कई जगह पड़ा हुआ है. 

स्थानीय नेताओं का भी आरोप है कि तय समय सीमा के बावजूद कई स्थानों पर काम नहीं हुआ है. नगर निगम को सौंपी गई रिपोर्ट में लगभग 80 प्रतिशत काम पूरा होने का दावा किया गया है, लेकिन मौके पर दिखाई दे रही स्थिति इन दावों से मेल नहीं खाती. 

सामने आया है कि अप्रैल में बीएमसी ने मीठी नदी की सफाई का ठेका एम/एस प्रशांत लाड और तुलजा भवानी कंस्ट्रक्शंस को दिया था. यह काम 10 जून तक पूरा होना था. हालांकि निरीक्षण के दौरान कई स्थानों पर काम अधूरा दिखाई दिया, जिससे परियोजना की निगरानी और पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं. 22 किलोमीटर लंबी मीठी नदी मुंबई की सबसे बड़ी स्टॉर्म वॉटर ड्रेन है और मानसून के दौरान शहर को बाढ़ से बचाने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है. ऐसे में यदि सफाई कार्य समय पर और प्रभावी तरीके से पूरा नहीं हुआ तो भारी बारिश के दौरान जलभराव और बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है.

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मुंबई के डिप्टी मेयर संजय घाडी ने मीठी नदी की सफाई को लेकर कहा कि यह सच है कि नदी उतनी साफ नहीं है, जितनी होनी चाहिए थी. उन्होंने बताया कि पहले सफाई का ठेका वित्तीय अनियमितताओं के कारण रद्द कर दिया गया था. नया ठेकेदार अप्रैल महीने में ही नियुक्त हुआ है, इसलिए काम को गति देने में कुछ समय लगा.

संजय घाडी ने कहा कि केवल प्रशासन ही नहीं, बल्कि नागरिकों की भी जिम्मेदारी है कि वे नदी में कचरा और अन्य सामान फेंकने से बचें. सफाई अभियान के दौरान नदी से एक ऑटो रिक्शा तक बरामद किया गया, जिससे यह साफ होता है कि लोग किस तरह से नदी को प्रदूषित कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि मानसून के दौरान भी गाद निकालने (डीसिल्टिंग) का काम जारी रहेगा. बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) लगातार निगरानी कर रही है और जल निकासी व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए जरूरी कदम उठा रही है. डिप्टी मेयर ने भरोसा जताया कि बीएमसी बारिश के मौसम में जलभराव की स्थिति को रोकने के लिए पूरी तरह तैयार है और शहरवासियों को किसी बड़ी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा.
 

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