फर्जी सिम कार्ड के जरिए 238 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग और फर्जी पुलिस केस की धमकी देकर डराकर एक मनगढ़ंत मामले में सीनियर नागरिक शिकायतकर्ता को सुप्रीम कोर्ट का फर्जी नोटिस भेजा गया और उसे 'डिजिटल अरेस्ट' किया गया. जिससे 1.12 करोड़ रुपये की वित्तीय धोखाधड़ी को अंजाम दिया गया.
इस मामले में मुंबई की नॉर्थ साइबर पुलिस ने इंडसइंड बैंक के ऑपरेशनल मैनेजर और आईटी सेक्टर के एक वेब डेवलपर समेत कुल 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है.
जानकारी के मुताबिक, शिकायतकर्ता के खिलाफ दिल्ली में मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया गया है ऐसा कहकर डराया गया. शिकायतकर्ता को डिजिटल रूप से गिरफ्तार कर लिया गया और उससे कुल 1,12,26,000 रुपये की धोखाधड़ी की गई.
एक अत्यंत संवेदनशील अपराध में, आरोपियों ने अपनी पहचान पूरी तरह से छिपा ली, पुलिस अधिकारियों का रूप धारण करने की साजिश रची, पुलिस की वर्दी पहनी और सरकारी अधिकारियों और राष्ट्रीय जांच एजेंसियों के नाम, मुहर और लेटरहेड का इस्तेमाल किया. शिकायतकर्ताओं को बार-बार गिरफ्तारी की धमकी दी और उनके बैंक खातों से धनराशि हड़पने के लिए वीडियो कॉल किए.
साइबर अपराध के आरोपियों ने धोखाधड़ी से प्राप्त राशि को अलग-अलग व्यक्तियों और कंपनियों के नाम पर विभिन्न बैंक चालू खातों का उपयोग करके हासिल किया. मुंबई के नॉर्थ साइबर पुलिस स्टेशन की जांच टीम ने उक्त साइबर अपराध की कुशलतापूर्वक, निरंतर और सकारात्मक जांच करते हुए आरोपियों की आपराधिक कार्यप्रणाली को समझा,
गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से 2 लैपटॉप, 20 मोबाइल फोन, अलग-अलग नामों से 25 बैंक खाते, एटीएम कार्ड, पासबुक, आधार कार्ड आदि बरामद किए गए हैं. गिरफ्तार किए गए आरोपियों में राजेश कुमार, मोहम्मद तारिक, शिखर, गौरव, अजय कुमार, चिंतनकुमार शामिल हैं.
इस बीच नागरिकों से अपील की गई है कि डिजिटल गिरफ्तारी और साइबर धोखाधड़ी से सुरक्षित रहने के लिए जरूरी निर्देशों का पालन करें.